गुरुवार, 18 फ़रवरी 2021

देशहित की खातिर


न न कोई न रो रहा। न कोई सरकार को कोस रहा। हर कोई खुश है। जिंदगी को अच्छे से एन्जॉय कर रहा है। जरा-बहुत ही तो तेल और सिलेंडर के दाम बड़े हैं। इतना तो आम जनता झेल सकती है। क्या पहले की सरकारों में दाम नहीं बढ़ते थे? बढ़ते थे, खुब बढ़ते थे। तब भी जनता झेल लेती थी, अब भी झेल रही है। लोकतंत्र में जनता नहीं झेलेगी तो क्या नेता झेलेंगे? समझने वाली बात है।

दरअसल, विपक्ष जनता को सरकार के खिलाफ बरगला रहा है। वो नहीं चाहता कि सरकार लंबी चले। जन-हितैषी काम करे। देश को 'न्यू इंडिया' व डिजिटल इंडिया' में परिवर्तित करे। सरकार अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के साथ है। देश, जनता व समाज के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। विश्व गुरु बनने की ओर हम अग्रसर हैं। मगर कुछ 'टूलकिटजीवी' सरकार और देश की छवि को मटियामेट कर रहे हैं। मुझे अक्सर ही इसमें विदेशी ताकतों का हाथ नजर आता है। विदेशी ताकतें विपक्ष से मिली हुई हैं।

तेल या गैस सिलेंडर के बढ़ते दामों पर हल्ला मचाने से पहले 'देशहित' के बारे में सोचिए। ज्यादा दाम देकर आप देश का आर्थिक विकास कर रहे हैं। इससे देश मजबूत होगा। आम जनता के चेहरे पर खुशहाली आएगी। आर्थिक रूप से विकसित देश की ओर दुश्मन आंख उठाकर भी न देखेगा। मत भूलिए, सरकार देश को विकास के ऊंचे रास्तों पर ले जाने को प्रतिबद्ध है। देश व सरकार से प्रेम करना सीखिए। विपक्ष के बहकावे में न आइए। विपक्ष की तो कट गई, आपको अभी कटनी है। बात को समझिए।

मुझे देखिए मैं हर हाल में प्रसन्न रहता हूं। तेल सौ का हो या सिलेंडर पर पचास रुपए बढ़ें मगर मैं 'टेंशन-फ्री' हूं। जेब या महंगाई के बारे में न सोचकर देशहित के बारे में सोचता हूं। मेरी जेब से रुपए निकलकर देश के काम आ रहे हैं, इससे बड़ा 'योगदान' क्या हो सकता है। मैं एलान करता हूं, तेल अगर पांच सौ रुपए भी हो जाएगा तब भी दुःखी न होऊंगा।

किस्मत वाले हैं आप-हम जो हमें दिन-रात महंगाई का मुंह देखना पड़ रहा है। वरना यह विरलों को ही नसीब होती है। समझे न।