पृष्ठ

मंगलवार, 9 फ़रवरी 2021

शेयर बाजार की तेजी पर कुर्बान

भीतर से अर्थव्यवस्था की हालत जो हो पर बाहर से टनाटन बनी हुई है। बढ़ते सेंसेक्स ने अर्थव्यवस्था को पहाड़ पर चढ़ा दिया है। दलाल पथ पर रौनक बढ़ गई है। तेजड़ियों के चेहरे खिल गए हैं। ठंड में गर्मी का एहसास हो रहा है। शेयर सोना उगल रहे हैं। मगर देश की धरती के सोना उगलने वाले किसान 60 दिन से आंदोलनरत हैं, उनकी चिंता किसी को नहीं। वार्ता पर वार्ताएं हो रही हैं किंतु नतीजा कोई नहीं निकल रहा। सरकार अपनी पर अड़ी है, किसान अपनी पर डटे हैं। खैर…

शेयर बाजार बिन पिए ही झूम रहा है। निवेशकों का 'वन टू का फोर' कर रहा है। विश्लेषक अभी 'और तेजी' का राग अलापा रहे हैं। जितने मुंह उतनी बातें हैं। क्या करूं, मैं भी बहती गंगा में हाथ धो रहा हूं। मौका बढ़िया है। अगर अभी चूक गया तो कल को पता नहीं क्या हो। बढ़त में जितना पैसा निकल आए उतना ही ठीक।

शेयर बाजार की एकतरफा बढ़त ने अच्छों-अच्छों को सकते में डाल दिया है। एक तरफ पूरा विश्व कोरोना से लड़ रहा है, दूसरी तरफ सेंसेक्स दौड़े चला जा रहा है। किसी के हाथ नहीं आ रहा। ऐसा लगता है कि शेयर बाजार ने रुकना फिलहाल टाला हुआ है।

हुआ यह है कि हर घर, हर गली, हर मोहल्ले में शेयर बाजार के बड़े-बड़े जानकर निकल आए हैं। हर शेयर पर ऐसे जानकारी दे रहे हैं मानो उसका अस्तित्व इन्हीं से है। जिन्हें शेयर बाजार का ककहरा नहीं मालूम, वे इस वक़्त 'ऊंचे विश्लेषक' बने बैठे हैं। लेकिन ये तब कहां थे, जब बीते साल मार्च में कोरोना के भय से सेंसेक्स भरभराकर गिर रहा था। तब कोई निकलकर सामने नहीं आया था, ज्ञान देने को। दरअसल, ये वो कुकुरमुत्ते हैं, जो अपनी सुविधानुसार कहीं भी, किधर भी उग आते हैं। बस इन्हीं से बचकर रहना है।

अभी बढ़ता हुआ सेंसेक्स सबको भा रहा है क्योंकि पैसा दे रहा है। मगर तब यह खलनायक हो जाता है, जब औंधे मुंह गिरता है। तब यह नहीं देखता कि किधर और क्यों गिर रहा है। पलभर में ही लाखों का माल कौड़ियों के भाव कर देता है। मत भूलिए, सेंसेक्स अपने मूल चरित्र में बड़ा निर्दयी है। खिलाड़ी चाहे कितना ही तगड़ा क्यों न हो, बख्शता किसी को नहीं। जिनने इससे दिल लगा लिया, समझिए वो गया काम से।

सेंसेक्स गिरकर उठने की प्रेरणा भी देता है। संघर्ष करना भी सीखता है। विपरीत परिस्थितियों के बीच भी डटे रहना है, यह बताता है। मैं अक्सर ही सेंसेक्स की जिजीविषा को सलाम ठोकता हूं। मैंने कभी किसी महापुरुष से प्रेरणा नहीं ली। मेरे लिए तो सेंसेक्स ही मेरा महापुरुष है। बेरहम है यह जानता हूं पर उतना ही संवेदनशील भी है। कभी आजमाकर देखिए।

बताने वाले बता रहे हैं कि शेयर बाजार में तेजी का दौर अभी बना रहेगा। 50 हजार का स्तर आकंड़ा छू चुका है। जल्द से इसके पार भी जाएगा। बड़ी ही सकारात्मक सोच रखता है यह। अतीत पर रोता नहीं। अतीत को ढोता नहीं। ऊपर चढ़ने का कोई मौका खोता नहीं। फिर भी, अपने निवेशकों से कहता यही है कि मुझसे दिल न लगाएं। मैं कब, किस घड़ी किसका दिल तोड़ दूं, नहीं जानता।

शेयर बाजार में बनी तेजी पर कुर्बान जाता हूं। यह यों ही बनी रहे। ऊपर वाले से दुआ मांगता हूं।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें