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शनिवार, 6 फ़रवरी 2021

ठंड और चोर


ठंड आतंक मचाए हुए है। रजाई से बाहर निकलने का मन नहीं करता। न नहाने का दिल करता है। जी करता है पूरे टाइम रजाई में सिकुड़े पड़े रहो। लेकिन मैं दाद देता हूं उन चोरों को जो भीषण ठंड में भी चोरी कर रहे हैं। ठंड में चोरी करना आसान काम नहीं। जब लोग अपनी-अपनी रजाइयों में छिपे-दुबके बैठे होते हैं, तब चोर उनके घरों में चोरी करने उतरते हैं। एक तरफ ठंड का सितम, दूसरी तरफ पकड़े जाने का डर। फिर भी, वे अपने कर्तव्य पर डटे रहते हैं। पापी पेट क्या-क्या नहीं करवा लेता। आज के जमाने में चोरी करना पाप थोड़े है!

बदलते समय के साथ चोरी के तरीके भी काफी बदल गए हैं। कुछ चोरियां अब ऐसी भी हैं, जिनके लिए बाहर निकलना ही नहीं पड़ता। वे घर बैठे-बैठे ही ही हो जाती हैं। ऑनलाइन ठगी(चोरी) में कहीं जाने की जरूरत नहीं। कहीं से भी बैठकर किसी के भी बैंक खाते से रुपए उड़ाए जा सकते हैं। ये चोर बेहद शातिर होते हैं। बातें बनाकर फंसाने में माहिर होते हैं। इधर सावधानी घटी, उधर काम तमाम हुआ। लेकिन ऑनलाइन चोर पारंपरिक चोरों की तरह मेहनती नहीं होते। माना कि ऑनलाइन चोरी में मुनाफा अधिक है किंतु जमीनी अनुभव न के बराबर हैं। ऐसी चोरी भला किस काम की जिसमें हाथ-पैर न हिलाने पड़ें।

अब तो पारंपरिक चोरों ने भी ऑनलाइन चोरी का रास्ता पकड़ लिया है। वे भी अधिक मेहनत करने से अब कतराने लगे हैं। चोरी की लाइन में नई पीढ़ी जो आ रही है, उसका झुकाव ऑनलाइन ठगी की तरफ ज्यादा है। चोरी के नए-नए तरीके उसने ईजाद कर लिए हैं। फोन पर लोगों को उल्लू बनाकर खाते से पलभर में रुपया सफा-चट कर रहे हैं।

मगर मुझे तो जमीन से जुड़े पारंपरिक चोर ही अधिक पसंद हैं। वे चोरी करते हैं तो लगता है कि वास्तविक चोरी हुई है। चोरी की रपट लिखी जाती है। पुलिस मौका-ए-वारदात पर पहुंचती है। चोरी गई चीजों का हिसाब-किताब लगाया जाता है। ध्यान रहे, चोरी में गहने जरूर चुरते हैं। नकदी पर भी हाथ साफ किया जाता है। घर वालों, आस-पड़ोस, नौकर-चाकर से पूछताछ होती है। खबर अखबारों में छपती है। चार जन चाय और पान के खोके पर चर्चा करते हैं। मोहल्ले में दहशत का सा माहौल बनता है। चोरी होने वाले घर का दूर-दूर तक नाम होता है। कुछ भी कहिए, सीन पारंपरिक चोरी में ही बनता है।

विकट ठंड में चोरी कंपकंपी छुड़ा देती है। मगर पापी पेट की खातिर उन्हें यह करना पड़ता है। आखिर उनका भी परिवार है। उन्हें भी अपने शौक पूरे करने हैं। बीवी की पसंद और बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का भी ध्यान रखना है। चोरों का भी दिल होता है। मैंने कहानियों में कई ऐसे चोरों के बारे में सुन रखा है, जो चोरी की कमाई गरीबों में बांट दिया करते थे। कभी निम्न वर्ग को परेशान नहीं करते थे। उनके टारगेट पर हमेशा धन्नासेठ ही रहा करते थे। कितने दयावान चोर थे वे।

मेरा मानना है कि चोरी करना कविता या व्यंग्य लिखने से कहीं कठिन काम है। जितनी अक्ल चोरी करने में लगानी पड़ती है न, उतनी गणित के सवाल हल करने में नहीं। लेकिन लोग हैं कि चोरों को हमेशा बद्दुआएं देते हैं। कभी उनका आदर-सम्मान नहीं करते। चोर हैं तो क्या, इंसान तो वे भी हैं।

जीवन और लेखन में छोटी-मोटी चोरियां मैंने भी खूब की हैं। मुझे यह कहने में रत्तीभर शर्म नहीं कि मेरा समस्त लेखन चोरी की बुनियाद पर खड़ा है। मेरा दावा है, अगर आज मैं लेखक न होता तो बड़ा चोर अवश्य ही बन गया होता। चोर और चोरी दोनों से मुझे विशेष लगाव है। दिमाग में अक्सर ही चोरी के आईडिया आते रहते हैं।

इतना तय है कि धरती से जैसे भ्रष्टाचार कभी नहीं मिट सकता, वैसे ही चोरी भी कभी खत्म नहीं हो सकती। चोरों में भी नई-नई नस्लें आती रहेंगी। नए-नए तरीके चोरी के ईजाद किए जाते रहेंगे परंतु चोरियां खत्म कभी न होंगी। ठंड के मौसम में चोरी करना निश्चित ही कर्रा काम है। मेरे विचार में ऐसे वीर चोरों को कोई न कोई पुरस्कार सरकार की तरफ से अवश्य मिलना चाहिए! नहीं क्या...।

2 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" सोमवार 08 फरवरी 2021 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. सर, बढ़िया लिखे हैं, हालाँकि इस व्यंग्य में गुदगुदी और मारकता की कमी महसूस हो रही थी पढ़ते हुए।
      सर, क्षमा प्रार्थी होकर यह टिप्पणी कर रहे हैं��..

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