शुक्रवार, 16 अक्तूबर 2020

अब इंस्टाग्राम पर भी


 आखिर मैं भी 'इंस्टाग्राम' पर आ ही गया। मेरे मोहल्ले के बहुत लोग इस पर हैं। सुना है, मोहल्ले के वरिष्ठ कवि और जूनियर जेबकतरा भी इंस्टाग्राम पर आ गए हैं। दोनों की अच्छी खासी फॉलोइंग बन गई है। जब देखो तब हाथ में मोबाइल थामे कुछ न कुछ इंस्टा पर पोस्ट करते ही रहते हैं। इंस्टा पर आ जाने से मोहल्ले में उनका नाम और सम्मान बढ़ गया है।

इसीलिए मैंने तय किया जब वे लोग इंस्टा पर आ सकते हैं, तो मैं क्यों नहीं? इंस्टा पर आकर खुद में सेलिब्रिटी जैसा फील हो रहा है। कदम जमीन पर पड़ ही नहीं रहे। कभी मैं इंस्टा, कभी मैं मोबाइल को ताकता रहता हूं। मित्र मंडली में अपने इंस्टा पर आने की बात बड़ी शान से बताता हूं। अब तो बीवी की निगाह में भी मेरी इज्जत खासा बढ़ गई है।

इंस्टाग्राम पर आने का अपना चार्म है। सोशल मीडिया का सबसे चर्चित मंच है यह। सेलिब्रिटी लोगों का जमघट यहीं लगता है। पता चलता रहता है कि वे क्या पहन रहे हैं। क्या खा रहे हैं। कहां जा रहे हैं। किसी देश में घूम रहे हैं। किससे दोस्ती कर रहे हैं। किससे दुश्मनी निकाल रहे हैं। उनके बिना इंस्टा की रौनक ही फीकी है।

कह चाहे हम कुछ लें पर आजकल जमाना 'आत्मप्रचार' का ही है। जहां जितना हो सकता है अपना आत्मप्रचार करें। आत्मप्रचार के लिए इंस्टा से उम्दा कोई जगह नहीं। फेसबुक और ट्विटर भी इसके आगे फेल हैं। 

मुझे यह जगह इसलिए भी ठीक लगी कि यहां मैं अपने लेखन का उचित प्रचार कर सकता हूं। अपने प्रकाशित व्यंग्य में किसी भी सेलेब को टैग कर सकता हूं। दोस्तों के बीच उनका प्रचार कर सकता हूं। खुद के प्रचार के लिए भला किसी दूसरे पर क्यों टिके रहना। 

मनोरंजन के मामले में इंस्टा का जबाव नहीं। कोई ऐसा मनोरंजन का साधन नहीं जो यहां उपलब्ध न हो। हर प्रकार का मनोरंजन यहां मिलेगा। हर उम्र के लोगों के लिए मिलेगा। चाहे तो आप यहां से ज्ञान भी हासिल कर सकते हैं। फिर, कवियों के लिए यह सबसे उम्दा प्लेटफॉर्म है। जितना जी चाहे खूबसूरत-खूबसूरत कविताएं यहां टांगिए। इंस्टाग्राम पर कविताओं और शेरो-शायरी की अच्छी डिमांड है। सोच रहा हूं, यहां मैं व्यंग्य न लिखकर कविताएं ही लिखा करूं। क्या पता इंस्टा की बदौलत मैं भी कवि बन जाऊं। यों, फेसबुक पर कवियों की भरमार है। व्यंग्यकार भी यहां कम नहीं। इसीलिए अपनी एक दुकान इंस्टा भी लगा ली है।

दुनिया के भीतर दूसरी ही दुनिया मुझे यहां खुलती हुई दिखाई दिखती है। जिसे देखो वो यहां लगा पड़ा है। इंस्टाग्राम को देखो तो लगता है दुनिया और लोग ठहरे नहीं हैं। निरंतर चल रहे हैं। लिख रहे हैं। बुन रहे हैं। बहस कर रहे हैं। नए का स्वागत और बिछड़े को जल्द भुलाने की कोशिश में लगे हैं।

अब जब इंस्टाग्राम पर आ ही गया हूं तो यहां जितना हो सकेगा अपना आत्मप्रचार करूंगा। किसी के भरोसे टिका नहीं रहूंगा। दुनिया चढ़ते सूरज को सलाम ठोकती है। भीड़ या रेस में जो पिछड़ गया, उसे दूध में पड़ी मक्खी की तरह निकाल दिया जाता है।

तो आएं मेरे इंस्टाग्राम अकाउंट पर आएं। मेरी एक दुकान अब वहां भी।

1 टिप्पणी:

Amrita Tanmay ने कहा…

बहुत बढ़िया ।