शुक्रवार, 1 मई 2020

कवि, कोरोना और कविता

बेमतलब सड़कों पर टहलने वाले कवि आजकल घरों में कैद हैं। घरों में रहकर 'कोरोना पर कविताएं' लिख रहे हैं। एक से एक धाकड़ कविताएं लिखी जा रही हैं। जो कभी कहानी, व्यंग्य, उपन्यास लिखा करते थे, वे भी कोरोना पर कविताएं खींच रहे हैं। कविताएं फेसबुक पर चढ़ाई जा रही हैं। इन-बॉक्स में लिंक डालकर कह जा रहा है, जरूर पढ़ें। पढ़कर प्रतिक्रिया भी दें। मुझे भी कई लिंक प्राप्त हुए हैं पर कविताओं को पढ़ने-समझने में मैं हमेशा से 'अनाड़ी' रहा हूं।

मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं कि कोरोना किसी 'वैक्सीन' से नहीं कविताएं लिखकर ही भागेगा। ट्रंप बेवजह ही भारत से क्लोरोक्वीन मंगाने के पीछे पड़े हैं, दो-चार कवि मंगवा लें और पीड़ितों को उनकी कविताएं सुनवाएं निश्चित ही उन्हें आराम मिलेगा। बल्कि मैं तो कहता हूं, भारत के कवियों को उन मुल्कों में भी भेजा जाना चाहिए जहां-जहां कोरोना संक्रमित मरीज हैं। वे कविताएं सुनाकर ही बीमारी को भगा देंगे।

कवि के बारे में कहा भी गया है- 'जहां न पहुंचे रवि, वहां पहुंचे कवि'। दरअसल, कोरोना जब चीन के वुहान में था तब ही हिंदुस्तान के कवियों ने उसे 'पहचान' लिया था। उन्होंने तब ही से उस पर कविताएं लिखना शुरू कर दी थीं। बल्कि कुछ कवियों ने तो इतनी धीर-गंभीर कविताएं लिखीं कि कोरोना उनका 'मुरीद' हो गया। कहीं ऐसा तो नहीं कि कोरोना उन्हीं की कविताओं को सुनने यहां आया हो! क्योंकि अब तो मामला 'लोकल' का हो गया है न। इधर कवि कविता लिखेगा, उधर कोरोना उसे पढ़ लेगा। आपदा और कविता साथ-साथ चलते रहेंगे।

कोरोना वायरस पर जिस तरह और जितनी तादाद में कविताएं लिखीं जा रही हैं, मुझे उम्मीद है, कविता पर दिया जाने वाला अगला पुरस्कार 'कोरोना कविता' को ही मिलेगा। इस पर कवियों के कविता-संग्रह आएंगे। कविता पाठ होंगे। गोष्ठियां होंगी। कवियों का सम्मान होगा। देश उन्हें इज्जत की नजरों से देखेगा।

देश का कवि अब भोला न रहा। वो जानता है, कैसे उसे अपनी कविता की मार्केटिंग करनी है। कैसे अपनी कविता को बाजार के बीच भुनाना है। कवि जब से फेसबुक पर आया है, कविता के रंग-ढंग ही बदल गए हैं। जिन्होंने कभी कविता का 'क' भी नहीं सीखा था, वे भी जमकर फेसबुक पर कविताएं लिखने लगे हैं। फ़ेसबुकिया कवियों ने कविता को उस मुकाम पर पहुंचा दिया, जहां पहुंचने की कविता ने कभी कल्पना भी न की होगी। गजब यह है, कोरोना पर सबसे अधिक कविताएं फेसबुक पर ही लिखी जा रही हैं। फेसबुक-लाइव में पढ़कर सुनाई जा रही हैं। कवि अनगिनत लाइक और कमेंट में वाह, वाह पा रहा है। कोरोना के बहाने ही सही कवि इन दिनों चांदी कूट रहा है।

कभी किसी जमाने में कवि बनना 'कठिन' रहा होगा किन्तु आजकल बहुत 'आसान' है। जो बंदा स्मार्टफोन चलाना जानता है, वो निश्चित कवि होगा ही होगा। शायद ही ऐसा कोई घर या मोहल्ला हो जहां कोई कवि न हो। आजकल के जमाने में 'वन-लाइनर' लिखने से लेकर 'चार लाइन' लिखने वाला भी कवि है। इससे भी इंकार नहीं किया जा सकता कि लॉकडाउन ने भी बहुतों को बैठे-ठाले कवि बना दिया है। मेरे मोहल्ले का सब्जी वाला भी कोरोना पर कविता लिख रहा है। आज वो भी कवि है।

कभी-कभी मुझे खुद के कवि न होने पर 'अफसोस' होता। कोशिश तो मैंने बहुतेरी की कवि होने की लेकिन बन नहीं सका। बड़े और वरिष्ठ कवियों की संगत का भी कोई असर न हुआ। निराला से लेकर मुक्तिबोध तक को पढ़ डाला। फेसबुक के कवियों को भी दबाकर पढ़ा। 'कविता कैसे लिखें' की क्लास भी ली मगर कवि बनने का एक भी गुण मेरे भीतर न घुस पाया। अगर कवि बन गया होता तो आज मैं भी कोरोना पर कविता लिख देश सेवा कर रहा होता।

खैर, मैं फिर कह रहा हूं- कोरोना को हराएगा कवि ही। कवि ने इतनी कविताएं कभी 'स्वाइन फ्लू', 'एड्स', 'डेंगू', 'प्लेग' आदि पर न लिखी होंगी, जितनी कोरोना पर लिख रहा है। कोई बता रहा था, कोरोना पर कविता लिखने के लिए देश में कवि भी कम पड़ने लगे हैं। आज यह जिम्मेदारी प्रत्येक देशवासी की है कि वो कोरोना पर कविता लिख इसे हराने के प्रयास में जुट जाए।

फिलहाल मैं व्यंग्य लिखकर ही कोरोना को देश निकाला देने की कोशिश में जुटा हूं। एक तरफ कवि है दूसरी तरफ व्यंग्यकार, हो सकता है, सामूहिक प्रयास से वायरस उलटे पैर यहां से भाग जाए।

4 टिप्‍पणियां:

अजय कुमार झा ने कहा…

रहिये रहिये , अभी कवियों को खबर किये देते हैं महाराज। वे व्यंग्यकारों पर एक कविता लिखकर अपना बदला जरूर लेंगे। धोया भी और निचोड़ा भी। गजब

Shah Nawaz ने कहा…

लजीब... कोरोना भी सोच रहा होगा कि कहाँ कवियों में फंस गया 😂

रवि रतलामी ने कहा…

समस्या ये भी है कि आंख कान नाक सब बंद कर लेने के बावजूद कोरोना से तो बच सकते हैं, कोरोना कविता से नहीं! :)
कोरोना कविता ब्र्ह्मांड में व्याप्त हो गई है.:)

दिगम्बर नासवा ने कहा…

एक कविता ही तो बची जो बेचारे कवि कर सकते अहिं ... अब वो भी न करें तो ...
गज़ब लपेटा है ...