गुरुवार, 30 अप्रैल 2020

खुद पर थूक लेता हूं

थूकना अब 'जुर्म' है। यों, यहां-वहां, जहां-तहां अब कोई नहीं थूक सकता। सरकार थूक और थूकने वाले पर 'सख्त' हो गई है। सुना है, कोरोना थूक से भी फैल सकता है! इसीलिए पान-गुटके पर रोक लगाई गई है। न कोई इन्हें खाएगा, न सार्वजनिक जगहों पर थूक की चित्रकारी करेगा। थूक को इससे पहले इतना 'संदिग्ध' कभी नहीं देखा था। कुछ लोगों ने तो थूक का रंग भी रख दिया है। रंग देखकर ही पता लगा लेते हैं कि किसने थूका था।

थूकने पर लगी 'पाबंदियों' ने मुझे मुसीबत में डाल दिया है। पूरा मोहल्ला जानता है कि मुझे थूकने की बीमारी है। मैं बिन लिखे रह सकता हूं किंतु बिन थूके नहीं। मेरा थूक इतना चर्चित है कि देखते ही कोई भी बता सकता है किसने थूका है। अपनी थूकने की आदत के चलते मैं दफ्तर में बॉस की और घर में बीवी की 'जली-कटी' सुनता रहता हूं। लेकिन क्या करूं थूक पर कंट्रोल नहीं रख पाता।

हमें यह भूलना नहीं चाहिए कि भारत एक थूक-प्रधान देश भी है। पान की पीकों के दर्शन हमें कहीं भी हो जाते हैं। गलती से कोई किसी पर थूक भी दे तो 'सॉरी' कहकर मामले को रफा-दफा कर दिया जाता है। एक दफा चलती बस में से एक सज्जन ने मुझ पर थूककर तुरंत ही 'सॉरी' बोल दिया था। मैंने भी उनके थूकने का बुरा नहीं माना। बुरा मानकर उनका कर भी क्या लेता। थूक ही तो था निकल गया। हमें अपने ही नहीं वरन दूसरे के थूक की भी इज्जत करनी चाहिए। बल्कि पान-गुटका खाने वाले तो बाकायदा 'दूर तक थूकने' का आपस में कंपीटिशन भी करते हैं।

थूक पर कायम सख्ती को देख मैंने यह किया है कि अब मैं थूक को अपने मुंह में ही रखना पसंद करता हूं। न यह बाहर निकलेगा, न जुर्माना पड़ेगा। इसे सटक लेने में ही खुद की, समाज की और देश की भलाई है। कोरोना से लड़ना है तो थूक पर कंट्रोल करना ही होगा।

लेकिन मैं उन लोगों के बारे सोचता हूं, जो थूकते ही नहीं। पता नहीं वे बिना थूके कैसे रह पाते होंगे! जिनके मुंह से थूक नहीं निकलता, वे कैसे किसी को 'गाली' भी दे पाते होंगे। मेरे एक परिचित कवि हैं वे कभी थूकते ही नहीं। बिना थूके ही कविता लिखते हैं। जबकि लोग उनकी कविताएं पढ़-सुनकर उन पर थूकते हैं। वे तब भी चुप रहते हैं। हो सकता है, उनकी कविताओं पर मिलने वाले थूक उन्हें थूकने से रोक लेते हों।

बहरहाल, मुझे थूकना तो दूर इस पर किसी से बात करने में भी डर-सा लगने लगा है। जब कभी बहुत मन करता है तो चुपचाप खुद पर ही थूक लेता हूं। खुद पर थूका थूक किसी को दिखे नहीं सो उसे चाट भी लेता हूं। थूक कर चाटना शायद इसी को कहते होंगे। है न...।

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