बुधवार, 4 मार्च 2020

कोरोना का कहर और सेंसेक्स

आखिर वही हुआ न जिसका 'डर' था! कोरोना वायरस के कहर ने दलाल पथ पर बमचक मचा ही दी। लगातार लुढ़क कर सेंसेक्स ने निवेशकों के करोड़ों रुपए स्वाह कर ही दिए। असर केवल भारतीय शेयर बाजार पर ही नहीं, दुनिया भर के शेयर बाजार 'लाल निशान' पर टिके रहे। वैसे, अपना सेंसेक्स ठीक-ठाक ही चल रहा था। बीच-बीच में जरा-बहुत झटके आ जाते थे तो खुद को संभाल लेता था। लेकिन कोरोना का करंट तो एक ही दिन में विकट झटका दे गया। सुनाई में आ रहा है, आगे आने वाले दिन भी सेंसेक्स के लिए मुश्किल भरे हो सकते हैं!

कभी-कभी सोचता हूं तो लगता है कि बिचारे सेंसेक्स को कितना कुछ 'झेलना' पड़ता है। कितना भार है उसके कंधों पर। एक कंधे पर अर्थव्यवस्था टिकी है तो दूसरे कंधे पर निवेशकों की उम्मीदें। और ये सबकुछ उसे ही देखना है। मगर 'संवेदनशील' भी वो कम नहीं। जरा कहीं किसी को छींक भी आ जाए तो तुरंत 'ढह' पड़ता है। जबकि मैंने इसे कितनी ही बार समझाया कि पियारे इतना संवेदी बनकर भी न रहा करो कि खुद पर 'कंट्रोल' ही न रख पाओ। मगर वो है कि समझता ही नहीं।

चीन के प्रति दीवानगी भी दुनिया की कुछ कम न थी। दिन-रात चीन चीन ही करते थे। मोबाइल से लेकर कचरी तक चीन की बनी हुई इस्तेमाल करते हैं। और जब कोरोना जैसा भयंकर वायरस चपेट में ले लेता है, तब चीन को गरियाते हैं। दुनिया भर में चीन ने ऐसा असर कायम किया है कि लोग पगलाए रहते हैं उसके इश्क में। बदले में उसने कोरोना का झुनझुना दे दिया है, अब बजाते रहो हर पल।

हम भी कहां कुछ कम हैं। हमें भी खाने से लेकर सोने तक में बस चीन ही चीन चाहिए। एक तरफ राग 'मेक इन इंडिया' का अलापते हैं, दूसरी तरफ 'मेड इन चाइना' को जेब में रख मुस्कुराते हैं। हर एक के जीवन में चीन यों हावी है मानो वही उनका असली 'देवता' हो।

सेंसेक्स का यों बैठे-ठाले लुढ़कना मुझे अच्छा नहीं लगता। दिल में बड़ी तकलीफ-सी होती है। जैसे-तैसे कर शेयर्स की वैल्यू कुछ बढ़ती है फिर बीच में ऐसा भूचाल आ जाता है कि सब मिट्टी में मिला देता है। एक तो हमारा सेंसेक्स भी न हर अंतरराष्ट्रीय मुद्दे या बीमारी का लोड खुद पर ले लेता है। जबकि कोरोना से भारतीय शेयर बाजार को भला क्या मतलब! यह चीन का वायरस है, चीन ही निपटे इससे। मगर नहीं, सेंसेक्स को तो हर बात में अपनी टांग घुसेड़ने की आदत है न। जब टांग टूट जाती है, तब रोता है, पछताता है। लेकिन पछताने से क्या होता है, जब चिड़िया चुग गई खेत।

दलाल पथ पर बिखरी 'उदासी' देखकर कलेजा मुंह को आता है। इसे ऐसा नहीं होना चाहिए था। यह जगह तो हर वक़्त गुलजार रहनी चाहिए। अंटी में दो पैसे बढ़ते हैं तो सुकून मिलता है। सेंसेक्स को सिर्फ भारतीय निवेशकों पर निगाह रखनी चाहिए। उनकी ही बेहतरी के लिए चढ़ते-बढ़ते रहना चाहिए। वो चलेगा तो अर्थव्यवस्था भी चलेगी और देश भी। कोरोना-फोरोना तो बेकार के वायरस हैं। इन्हें चीन में ही बना रहने दें तो अच्छा। कोरोना के चक्कर में आकर अपनी हालत क्यों पतली की जाए!

मेरी सेंसेक्स से गुजारिश है कि वो ऐसे और इतने भयंकर तरीके से न लुढ़का करे। दिल बैठ जाता है हमारा। पॉजिटिविटी का दामन न छोड़े बस।

1 टिप्पणी:

दिलबागसिंह विर्क ने कहा…

आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 05.03.2020 को चर्चा मंच पर चर्चा - 3631 में दिया जाएगा| आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी|

धन्यवाद

दिलबागसिंह विर्क