बुधवार, 26 फ़रवरी 2020

ट्रंप और बरेली का झुमका

मैं चाहता हूं, डोनाल्ड ट्रंप जब भारत आएं तो एक चक्कर बरेली का भी जरूरी लगाएं। मैं ट्रंप को बरेली आने का न्यौता इसलिए दे रहा हूं क्योंकि वे देसी आदमी हैं। रहते अमरिका में अवश्य हैं पर जमीन से जुड़े नेता हैं। एक बार जो 'कमिटमेंट' कर लेते हैं फिर पूरा करके ही मानते हैं। इस धरती पर उनके जैसे 'मुंहफट' नेता कम ही हैं। 'मुंहफट' लोग मुझे पसंद भी हैं।

मैं ट्रंप को बरेली दिखाना चाहता हूं। खासकर, उन्हें वो स्थल दिखाना चाहता हूं, जहां साधना का गुम हुआ झुमका लटकाया गया है। मैं जानता हूं, ट्रंप साधना को नहीं जानते होंगे पर चिंता की कोई बात नहीं। उन्हें 'झुमका गिरा रे बरेली के बाजार में…' गाना सुनवा दिया जाएगा। गीत सुनकर, हो सकता है, ट्रंप थोड़ा थिरक भी लें! साधना को देख वे मोहित अवश्य होंगे, ऐसा मेरा विश्वास है।

यों भी, लोगों के दिलों में बड़ी बेचैनी रहती थी बरेली आकर उस जगह को देखने की जहां कभी राजा मेंहदी अली खान ने साधना का झुमका गिराया था। वैसे, यह आज भी खोज का विषय है कि राजा साहब को झुमका गिराने के लिए बरेली ही क्यों मिली; दिल्ली क्यों नहीं, कानपुर क्यों नहीं, इलाहाबाद क्यों नहीं!

अब यह तो नहीं कह सकता कि ट्रंप का दिल झुमका देखकर झूमेगा कि नहीं। पर जैसा बन पाया बरेली वालों ने बनाकर लटका दिया। बरेली को उसका झुमका मिल गया, यह क्या कम बड़ी बात है।

साथ-साथ मैं ट्रंप को बरेली की दो-तीन मशहूर जगहें भी दिखाना चाहूंगा। मसलन- पागलखाना, प्रियंका चोपड़ा का घर और कवि वीरेन डंगवाल का स्मारक। कह नहीं सकता कि ट्रंप की दिलचस्पी प्रियंका का घर और वीरेन दा का स्मारक देखने में कितनी होगी पर पागलखाना वे जरूर देखना चाहेंगे। बरेली में एक यही जगह है, जहां आकर मुझे सुकून मिलता है। उम्मीद है, ट्रंप को भी मिलेगा। पागलों को ट्रंप में अपनी और ट्रंप को पागलों में अपनी सूरत नजर आएगी। दुनिया जानती है कि ट्रंप अक्सर ही पागलों जैसी हरकतें कर बैठते हैं। खुद उनके देश में भी लोग ऐसा कहते व मानते हैं। पर शायद ही उन्हें इस सब से कभी फर्क पड़ता हो।

ट्रंप की बरेली यात्रा को लेकर एक बार फिर से मेरा शहर सुर्खियों में आ जाएगा। देश भर का मीडिया यहां जुट जाएगा। कोने-कोने में यह खबर फैल जाएगी कि ट्रंप ने बरेली आकर झुमके के दर्शन किए। चूंकि मैं भी यहीं रहता हूं इस नाते मेरी पहचान में भी थोड़े चार-चांद लग जाएंगे।

साथ ही, ट्रंप से इस बात की गारंटी लेने की कोशिश करूंगा कि वे अमरिका लौटकर बरेली पर संस्मरण अवश्य लिखें। और उस संस्मरण में मेरा और झुमके का जिक्र जरूर हो। ताकि दुनिया जान पाए कि बरेली शहर में एक अंशुमाली भी रहता है।

कोई टिप्पणी नहीं: