मंगलवार, 31 दिसंबर 2019

दुविधा में हूं, क्या संकल्प लूं

नया साल सिर पर खड़ा हुआ है और मैं अभी तक यह तय नहीं कर पाया हूं कि क्या 'संकल्प' लूं, क्या छोड़ दूं। जबकि मेरे घर-परिवार, अड़ोसी-पड़ोसी व नाते-रिश्तेदार सभी अपने-अपने हिस्से का संकल्प ले चुके हैं। हालांकि उनके संकल्पों में नया कुछ भी नहीं, सब रटे-रटाए हैं। चूंकि नए साल पर कोई न कोई संकल्प लेना 'परंपरा'-सी बन गई है तो लेना जरूरी है। वरना, मैंने महसूस किया है कि समाज आपको 'भली निगाह' से नहीं देखता। सवाल करता है- क्यों, नए साल पर कोई संकल्प क्यों नहीं लिया?

विकट उधेड़बुन में हूं कि क्या संकल्प लिया जाए! शराब, सिगरेट, तंबाकू से परहेज करता हूं। इन्हें हाथ लगाना तो दूर की बात रही उस गली, उस मोहल्ले, उस सड़क पर ही नहीं जाता जहां इनकी दुकान हो। एक दफा चलते-चलते भूलवश जमीन पर पड़ी सिगरेट पर मेरा बायां पैर पड़ गया था, बाद में उस पैर को मैंने गंगाजल छिड़कर पवित्र किया। तब कहीं जाकर चैन पड़ा।

बहुत सोचने के बाद भी मुझे खुद में कोई 'बुराई' नजर न आई, जिसे नए साल पर छोड़ दूं। मुझमें और बुराई में 'छतीस का आंकड़ा' बचपन से रहा है। बल्कि मैं तो बुरे लोगों की संगत से भी खुद को हटा-बचाकर ही रखता हूं। बुरा न मैं लिखता हूं न पढ़ता। आलम यह है, बीवी भी आज तक मुझमें कोई बुराई नहीं खोज पाई है।

वजन घटाने का संकल्प पिछले साल ही लिया था, सो वो ठीक-ठाक चल रहा है। यों भी, लेखक का भला वजन होता भी कहां है! वो तो लिख-लिखकर ही खुद को मेनटेन किए रहता है। मेहनताना भी उसके पास उतना आता नहीं कि जिसे देखकर उसका वजन बढ़ सके। फिलहाल जितने भी वजन में हूं, मजे में हूं।

मेरे एक करीबी दोस्त ने बड़ा ही अजीबो-गरीब संकल्प मुझे सुझाया है। उसने मुझे राय दी है कि मैं नए साल पर 'फ़्लर्ट' करने का संकल्प लूं! मेरे दफ्तर में, मेरे पड़ोस में, मेरी रिश्तेदारी में, मेरे फेसबुक, ट्विटर पर जितनी भी महिलाएं हैं उनसे फ़्लर्ट कर लिया करूं। इससे दिल भी बहल जाएगा और संकल्प की परंपरा भी बनी रहेगी।

मित्र का सुझाव तो मस्त है, बीच में बस एक ही दिक्कत है- बीवी। कहीं किसी रोज उसे पता चल गया तो क्या फ़्लर्ट और क्या संकल्प; सब धरे के धरे रह जाएंगे। तलाक तक की नौबत आ सकती है।

नहीं, नहीं; यह संकल्प मेरे लिए बहुत रिस्की रहेगा। बीवी से ही लव और फ़्लर्ट करने में मेरी भलाई है।

फिलहाल, किसी भी संकल्प का दिमाग में न घुस पाना मेरी चिंता को बढ़ा रहा है। कल को बीवी भी पूछ सकती है : नए साल पर मैंने क्या संकल्प लिया? उसे नहीं बताया तो खामख्वाह मुझ पर शक करेगी! जी हां शक। इसीलिए तो मेरा संकल्प लेना नितांत आवश्यक है।

अभी तो फिलहाल सोचने के प्रोसेस में हूं। गहनता से सोचूंगा तो कोई न कोई संकल्प दिमाग की दीवार से टकरा ही जाएगा। आप भी सोचें। अगर कोई बढ़िया-सा संकल्प ध्यान आता हो तो मुझसे अवश्य ही शेयर करें। क्योंकि बिना संकल्प के नया साल मनाना, बिना फीते के जूते पहनने जैसा है। है न...।

4 टिप्‍पणियां:

दिलबागसिंह विर्क ने कहा…

आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 2.1.2020 को चर्चा मंच पर चर्चा - 3568 में दिया जाएगा । आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी ।

धन्यवाद

दिलबागसिंह विर्क

विकास नैनवाल 'अंजान' ने कहा…

सही कहा आपने.... नये साल बिना संकल्प कुछ वैसा ही है जैसे सरकारी काम बिना रिश्वत... वैसे आप कुछ संकल्प न लेने का संकल्प भी ले सकते हैं.... मैं तो ऐसा ही करता हूँ... हा हा हा... अच्छी प्रस्तुति

Nitish Tiwary ने कहा…

सुंदर लेख। हक़ीक़त तो यही है कि चाहे हम कोई भी संकल्प ले लें। अगले हफ़्ते ही फुस्स हो जाता है।

मन की वीणा ने कहा…

वाह अच्छा है ,ऐसा संकल्प लें सकते हैं कि ऐसे ही रौचक विषय हम लोगों तक प्रतिबद्धता से पहुंचाते रहें ।
रौचक ।