मंगलवार, 30 अप्रैल 2019

बीवी का मजदूर

बतौर शौहर मैं अपनी बीवी का ‘मजदूर’ हूं। मुस्कुराई मत, आप भी हैं। भले ही कम या ज्यादा हों।

लेकिन मुझे बीवी का मजदूर होने में कतई ‘शर्म’ महसूस नहीं होती। बल्कि ‘गर्व’ होता है कि यह जिम्मेदारी मेरे हिस्से आई। मजदूर होना ‘गुलाम’ होने से कहीं बेहतर है।

एक बीवी के ही नहीं, जिंदगी में हम किसी न किसी मजदूर ही हैं। कोई कंपनी का मजदूर है, कोई जनता का मजदूर है, कोई व्यवस्था का मजदूर है, कोई राजनीति का मजदूर है, कोई वोट का मजदूर है, कोई पैसे का मजदूर है तो कोई इश्क का मजदूर है।

लेकिन मैं इस बात से बिल्कुल भी सहमत नहीं कि हम मजबूरी के नाते मजदूर हैं। मजबूरी का तो सवाल ही पैदा नहीं होता। मजबूरी कैसी? मजदूर हैं तो हैं।

यों भी, मजदूर होना इतना बुरा नहीं जितना लोग मानते-समझते हैं। दुनिया में अगर मजदूर न हों तो यह एक पल भी विकास के पथ पर आगे बढ़ ही न पाए। मजदूर उद्योग से लेकर समाज तक की बुनियाद हैं।

आप समझ नहीं सकते उस वक़्त कितनी खुशी जब मिलती है, जब बीवी मुझे अपना कोई काम करने को कहती है। उसके कपड़े धोने से लेकर स्कूटी स्टार्ट करने तक सारे काम मैं ही करता हूं। सही भी है न कम से कम इस बहाने मुझे खाली खटिया तोड़ने और यहां-वहां बकलोली करने से मुक्ति तो मिल जाती है। समय का सद्पयोग हो जाता है सो अलग।

दो जन जब घर में हैं वही जब एक-दूसरे का काम नहीं करेंगे तो पड़ोसी तो आकर कर नहीं देंगे। एकल परिवार होने के कुछ नुकसान हैं तो कुछ फायदे भी हैं। मगर इस पर फिर कभी बात करेंगे।

कहना न होगा शौहर अपनी बीवी का मजदूर उसी दिन बन जाता है, जब वो उसके संग सात फेरे लेता है। हालांकि यह बात कभी कोई पंडित नहीं कहे-बताएगा किंतु अंतिम सच यही है।

मैंने ऐसे भी कई शौहर देखे हैं, जिन्हें अपनी बीवी का मजदूर बनने में बड़ी शर्म आती है। वो चाहते हैं, उनकी बीवी उनकी मजदूर बनके रहे। ऐसा भला कैसे संभव है? बीवी का बीवी होना ही शौहर के लिए बहुत है। वो उसकी मजदूर हो ही नहीं सकती। आखिर नारी स्वंतन्त्रता भी तो कोई चीज है।

यह बात अच्छी है कि बीवी ने कभी मुझे अपना मजदूर होने नहीं दिया। हर दफा मना ही किया। मगर मैं उसकी यही बात नहीं मानता बस। मुझे उसका मजदूर बनकर रहने में आनंद आता है, तो आता है। आप चाहें तो मुझे कुछ भी कहते रहिए, मेरी सेहत पर फर्क न पड़ना।

मैं, बतौर बीवी का मजदूर, दुनिया भर के शौहरों से आह्वाहन करता हूं कि वे अपनी बीवियों के मजदूर बनें ताकि मजदूर का सिर गर्व से हमेशा ऊंचा रहे।

4 टिप्‍पणियां:

शिवम् मिश्रा ने कहा…

ब्लॉग बुलेटिन टीम और मेरी ओर से आप सब को मजदूर दिवस की हार्दिक मंगलकामनाएँ !!

ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 01/05/2019 की बुलेटिन, " १ मई - मजदूर दिवस - ब्लॉग बुलेटिन “ , में आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

M VERMA ने कहा…

जी हां सहमत

Nitish Tiwary ने कहा…

बीवी का मजदूर। बहुत बढ़िया शीर्षक है।
मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।
iwillrocknow.com

Anita saini ने कहा…

वाह !