शुक्रवार, 28 सितंबर 2018

सब जादू-टोने का असर है

अभी रुपए की फिसलन रुक नहीं पाई, उधर तेल की बढ़ी कीमत अलग आग लगा रही है। विरोध का फोकस कभी रुपए पर केंद्रित हो जाता है तो कभी तेल पर। सरकार परेशान है, करे तो क्या करे। दबी जुबान में उसने कह भी दिया है- कीमतों पर नियंत्रण उसके बस से बाहर है!

कुछ हद तक बात सही भी है। रुपए का लुढ़कना और तेल का रॉकेट होना; सरकार की मर्जी से थोड़े न हो रहा। ये तो अदृश्य किस्म की ताकतें हैं, जो सब करवा रही हैं। मुझे तो कुछ-कुछ जादू-टोने का असर लग रहा है। वरना, रुपए और तेल पर एक साथ आफत कभी आई है भला!

दुनिया और समाज में चिढ़ने वाले भी कम नहीं। जलने वाले भी कम नहीं। मन-भेद और मत-भेद रखने वाले भी कम नहीं। ऐसे में क्यों न गिरे रुपया और क्यों न बढ़े तेल की कीमत। चाहे कितना भी न मानें फिर भी जादू-टोना कहीं न कहीं तो अपना असर छोड़ता ही है।

मैंने तो सुना है, जादू-टोटका करने व करवाने वाले बड़े ऊंचे खिलाड़ी होते हैं। हर किस्म की काट होती है उनके कने। ये लोग तो कभी-कभी विज्ञान को भी धूल चटा देते हैं। मैं इनका भुक्तभोगी हूं इसीलिए कह रहा हूं।

कुछ साल पहले एक बेहद करीबी सज्जन ने मेरे लेखन से चिढ़कर मुझ पर ही जादू-टोना करवा दिया था। बड़ी मुश्किल से राहत पाई थी। जिंदगी बड़ी बदरंग-सी बन गई थी तब।

कोई चाहे माने या न माने मुझे तो रुपए और तेल के खेल में विरोधियों के टोने-टोटके की ही बू आ रही है। और, ये टोटका अब से नहीं सदियों से चल रहा है। न सरकार न वित्तमंत्री न अर्थशास्त्री न बुद्धिजीवि न नेता न जनता कोई भी इस चाल को समझ ही नहीं पा रहा। सब अपने-अपने गणित बैठाने में लगे हैं।

रुपए और तेल पर कोई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय दबाब नहीं है, सब जादू-टोने का प्रभाव है।

मेरे विचार में तो सरकार को किसी अच्छे से झाड़-फूंक वाले बाबा या तांत्रिक से संपर्क साधना चाहिए। उससे सलाह लेनी चाहिए। हो सकता है, किसी शरारती ने रुपए के भीतर और तेल के कुओं में ताबीज-फाबिज गाड़ रखा हो। टोटके भी सैकड़ों प्रकार के होते हैं।

थोड़ा ध्यान हम-आप भी रखें। गाड़ियां कम खरीदें। कम चलाएं। तेल पर निर्भरता कम करें। खर्चों पर नियंत्रण रखें। रुपए को ज्यादा से ज्यादा जेबों में रखे रहने दें।... बाकी सरकार अपने स्तर से देख ही लेगी।
साथ-साथ फोकस टोने-टोटके पर ही बनाएं। ये बुरे दिन हमें इसी कारण से देखने को मिल रहे हैं।

आप भी अपने स्तर से पता करें, मैं भी कर रहा हूं। जैसे ही कोई काबिल तांत्रिक नजर आए तुरंत सरकार को बताएं। इस जादू-टोने का काट सिर्फ उसी के पास हो सकता है। एंवाई हवा में विरोध के तीर छोड़ते रहने से कुछ न होगा। संकट सिर के ऊपर खड़ा है।

4 टिप्‍पणियां:

शिवम् मिश्रा ने कहा…

ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 28/09/2018 की बुलेटिन, शहीद ऐ आज़म की १११ वीं जयंती - ब्लॉग बुलेटिन “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

रश्मि शर्मा ने कहा…

बहुत बढ़िया

Rohitas ghorela ने कहा…

हाहाहा
बेहतरीन कटाक्ष.

रंगसाज़

Anshu Mali Rastogi ने कहा…

शुक्रिया रश्मि जी।

शुक्रिया रोहिताश जी।