मंगलवार, 28 अगस्त 2018

कटी नाक का सुख

आईना निहारने का मुझे शौक नहीं। मजबूरीवश निहारता हूं ताकि अपनी नाक को देख सकूं।

चेहरे पर नाक मेरी मजबूरी है। आईने में अपनी साबूत नाक देखकर परेशान हो जाता हूं कि ये अभी भी जगह पर है, कटी क्यों नहीं!

साबूत नाक के अपने लफड़े हैं। कटी नाक के नहीं। हालांकि सुख सबसे अधिक नाक के कटने में ही है। लेकिन नाक-प्रेमी कटी नाक वालों को बेहद हेय दृष्टि से देखते हैं। कटी नाक वालों से हद दर्जे की नफरत करते हैं।

जबकि सच तो यह है कि साबूत नाक वाले बेहद दंभी और चालक होते हैं। हर वक्त अपनी नाक पर यों गर्व करते रहते हैं मानो ये ईश्वर का कोई वरदान हो!

लेकिन कटी नाक वाले साबूत नाक वालों से कहीं बेहतर और सज्जन होते हैं। मेरे ऐसे कई परिचित हैं, जिनकी नाक किसी न किसी बहाने कटी है मगर उन्हें इस बात का जरा भी अफसोस नहीं। न ही वे खुद को साबूत नाक वालों से कमतर समझते हैं।

मैंने ही खुद जाने कितनी दफा प्रयास करके देख लिया अपनी नाक को काटने का। किंतु नाक है कि कटने में ही नहीं आ पाती। बल्कि इस बार ईद पर मैंने बकरे की जगह अपनी नाक काटने की सिफारिश भी की थी। मगर कसाई ने मेरी काटने से यह कहते हुए मना कर दिया कि हम व्यंग्यकारों की नाक नहीं काटते।

सच कहूं, नाक कटे लोग मुझे बहुत पसंद हैं। मैं तो चाहता हूं दुनिया में मुझे सिर्फ नाक कटे लोग ही दिखाई पड़ें। साबूत नाक वाले बड़े मतलबी होते हैं।

अब तो उस दिन की प्रतीक्षा में हूं कि किसी रोज सो कर उठूं और मुझे अपनी नाक आईने में कटी मिले। पता नहीं, वो 'सौभाग्यशाली दिन' कब आएगा।

2 टिप्‍पणियां:

अजय कुमार झा ने कहा…

आपने तो अच्छे अच्छों की नाक काट दी

HARSHVARDHAN ने कहा…

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन हॉकी के जादूगर मेजर ध्यान चंद और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।