गुरुवार, 2 अगस्त 2018

आइए, मुझे 'ट्रोल' कीजिए

यद्यपि मैं जानता हूं कि 'ट्रोल करना' या 'ट्रोल होना' दोनों ही सबसे खतरनाक सोशल अवस्थाएं हैं, फिर भी, मैं 'ट्रोल' होना चाहता हूं। ट्रोल होकर उससे मिलने वाले 'यश' या 'अपयश' को भुगतना चाहता हूं। देखना चाहता हूं, कल को मेरे ट्रोल होने पर अखबारों में जो 'हेड-लाइन' बनती हैं, वो कैसी होंगी। निजी अनुभव लेना चाहता हूं कि मेरे ट्रोल होने पर सोशल मीडिया और मेरे नाते-रिश्तेदार मेरे बारे में क्या और कैसी राय बनाते हैं।

ट्रोल होने पर किसकी निगाह में मैं कितना उठता और कितना गिरता हूं।
वैसे, अब तक देखने-सुनने में तो यही आया है कि जो ट्रोल हुआ, उसकी किस्मत चमक गई। रातोंरात सेलिब्रिटी होने का खिताब पा गया। कल तक जो उसके नाम और काम से परिचित न थे, सब जान गए। देश से लेकर विदेश तक में उसकी ट्रोलिंग की तूती बोलने लगी। बहुत से दिलजलों ने उसकी राहों पर चलना भी शुरू किया किंतु उतने सफल न हो सके, जितना कि वो।

किस्मत चमकने का सितारा हर किसी की जेब में नहीं होता। जैसे- पहले कभी मैं भी यही चाहता कि प्रियंका चोपड़ा की तरह मैं भी बॉलीवुड में नाम कमाऊं। मगर जब अपनी शक्ल आईने में देख लेता था, 'हीरो' बनने का भूत तुरंत मेरे सिर से उतर जाता था।

मैं अच्छे से जानता हूं कि खुद को ट्रोल किए जाने की ख्वाहिश मेरा काल्पनिक भूत है पर कभी-कभी दिल को खुश रखना भी जरूरी हो जाता है।

आजकल तो कवि लोग, सोशल मीडिया पर, दिल को भी ट्रोल करने से बाज नहीं आ रहे! दिल पर ट्रोलिंग-प्रधान कविताएं लिख रहे हैं। विडंबना यह है कि लोग भी ऐसी कविताओं को चटकारे लेकर पसंद कर रहे हैं।
ट्रोलिंग आलोचना का बिगड़ा रूप है। पहले जमाने में आलोचना खासी तमीज के साथ की जाती थी, अब ट्रोलिंग बदतमीज होकर की जा रही है। ट्रोलर्स के हाथ ट्रोलिंग का उस्तरा क्या आ गया, सबको निपटाने को तैयार बैठा रहता है।

इधर सरकार भी ट्रोलिंग को लेकर सख्त जान पड़ रही है। सोशल प्लेटफार्म भी ट्रोलिंग पर हिदायतें दे रहे हैं। मगर ट्रोलर्स हैं कि मानते ही नहीं। किसी न किसी रास्ते वे अगले को ट्रोल करने का नुक्ता छेड़ ही देते हैं।

मालूम है कि ट्रोलिंग के अनुभव काफी बुरे रहे हैं पर चार लोग जान तो पाए हैं अगले को। बस ऐसा ही कुछ मैं खुद के साथ भी चाहता हूं। अच्छे करम कर मशहूर न हो सका तो क्या, ट्रोलिंग से ही हो जाऊं क्या बुरा है। यों भी, बदनामी से मिली प्रसिद्धि मुझे कुछ ज्यादा ही रास आती है। नाम है तो दुनिया-जहान में पहचान है, वरना कुछ भी नहीं।

तो साहेबान, आप लोगों को खुली छूट देता हूं। आप आइए और मुझे जमकर ट्रोल कीजिए। मैं आपके द्वारा खुद को ट्रोल किए जाने का कतई बुरा न मानूंगा, इस बात की गारंटी देता हूं।

कोई टिप्पणी नहीं: