बुधवार, 8 अगस्त 2018

कामयाबी के शिखर पर सेंसेक्स

सेंसेक्स ने कामयाबी का एक और नया शिखर पार कर लिया। उसे कोटि-कोटि बधाई।

दिली खुशी मिलती है सेंसेक्स को चढ़ता देख। बिना शोर-शराबा या शिकवा-शिकायत किए बेहद खामोशी से वो अपना काम करता रहता है। मैंने कभी उसे खुद से अपनी सफलता का जश्न मनाते या असफलता का रोना रोते नहीं देखा। यहां तक कि वो लोगों के कहे पर भी कभी अपने कान नहीं देता।

37 हजार तक का सफर उसके लिए इतना आसान नहीं था। यहां तक पहुंचने के लिए उसे जाने कितनी ही मुश्किलों से दो-चार होना पड़ा। किस-किस की क्या-क्या जली-कटी नहीं सुननी-झेलनी पड़ी। जाने कितनी ही दफा गिरा, टूटा, लुढ़का मगर हिम्मत फिर भी हिम्मत न हारी। हर बड़ी गिरावट के बाद खुद को संभालते हुए पुनः मुस्तैदी के साथ उठ खड़ा हुआ।

विपरीत परिस्थितियों में भी इसका हार न मानना मुझे व्यक्तिगत तौर पर बहुत ताकत देता है। इसके संघर्ष को देख मेरे मन में कभी निराशा घर नहीं करती। सच कहूं- मैं जीवन में कभी महापुरुष नहीं बल्कि सेंसेक्स जैसा बनना पसंद करूंगा।

अब का नहीं बहुत पुराना परिचय है मेरा इससे। खूब याद है, जब ये  5 हजार के आस-पास टहला करता था। न बहुत ज्यादा गिरावट रहती थी, न बढ़त। कभी कहीं से जोर का झोंका कोई आ जाता तो ये डर-सा जाता था। अपने संवेदी स्वभाव के कारण जाने कितनी ही दफा छोटी-मोटी खबरों पर ये मुंह के बल गिरा है। मंदड़ियों ने कितनी ही बार इसे लहू-लुहान भी किया है।

पर इसने कभी किसी नकारात्मक खबर को दिल पर नहीं लिया, न ही अपने घाव किसी को दिखाए। हां, बीच-बीच में सेंटीमेंट जरूर बिगड़े पर जल्द सुधर भी गए।

सेंसेक्स हमारी अर्थव्यवस्था की जान है। ये बढ़ता है तो देश में आर्थिक खुशहाली के दर्शन होते हैं। न सिर्फ देश बल्कि विदेश तक में इसकी कामयाबी के गीत गाए जाते हैं।

अक्सर सेंसेक्स की सफलता रुपए की गिरावट के गम को गलत कर देती है। रुपया तो एक बार को फिर भी धोखा दे सकता है किंतु सेंसेक्स नहीं।

ऐसा मुझे तो याद नहीं पड़ता जब इसने किसी का जानबूझकर नुकसान किया हो! अति-उत्साही लोगों ने अपने पैरों पर खुद ही कुल्हाड़ी मारी है। अपनी खामियों का दोष जब लोग सेंसेक्स पर मढ़ते हैं तो मुझे बहुत बुरा लगता है। कलेजा मुंह को आ जाता है।

सेंसेक्स कभी न अपने लिए जीता है न किसी से कुछ मांगता। वो तो हरदम यही चाहता है कि लोग उसके मार्फ़त अधिक से अधिक आर्थिक फायदा उठा सकें। दो का चार कर सकें। आसमान सरीखी बुलंदियों को छू सकें।

दरअसल, गड़बड़ तब शुरू होती है जब लोग बाग खुद को सेंसेक्स का बाप समझने लगते हैं। उससे जीतने की हिरस करने लग जाते हैं। खुद को सट्टेबाजी में लिप्त कर लेते हैं। अपनी जमीन-जायदाद तक दांव पर लगा देते हैं।

जब मोटा नुकसान झेलते हैं, तब सेंसेक्स को गरियाते हैं। लेकिन सुधरते फिर भी नहीं। न सुधरना शायद इंसान की फितरत में शामिल हो चुका है।

ऐसे लोग भी कम नहीं जिनका दिल किस्म-किस्म के शेयर्स पर आया रहता है। शेयर्स को वे अपनी जान से भी ज्यादा सहेज कर रखते हैं। बढ़ने पर बेचते नहीं। गिरने पर रोना रोते हैं। और, गिरावट का सारा दोष बेचारे सेंसेक्स के माथे मढ़ देते हैं। समझते नहीं, सेंसेक्स खुद से नहीं बल्कि शेयर्स के सहारे ही चलता है। शेयर बढ़ेंगे तो सेंसेक्स भी बढ़ेगा। शेयर गिरेंगे तो सेंसेक्स भी गिरेगा।

मैं तो हमेशा ही सेंसेक्स को सकारात्मक रूप में देखने की कोशिश करता हूं। उसके प्रति मन में कभी कैसी भी दुर्भावना नहीं रखता। अगर कभी गिरता है तो उसे गीता का यह उपदेश 'जो होता है अच्छे के लिए होता है। जो होगा वो भी अच्छे के लिए होगा' ही सुनाता हूं।

सेंसेक्स विकट दयालु है। वो किसी का बुरा या नुकसान नहीं चाहता। उसकी शरण में जो भी आता है, सभी को बड़ी सहजता और सरलता से लेता है। कभी-कभी तो मुझे सेंसेक्स के दिल में कवि या साहित्यकार घुसा हुआ-सा जान पड़ता है।

सेंसेक्स इसलिए भी अधिक सहज है क्योंकि वो दिखावा नहीं करता। जैसा बाहर से है, वैसा ही भीतर से भी। उसका अब तक का रिकॉर्ड देख लीजिए, जो कभी उसने अपनी सफलता का जश्न मनाया हो। हां, उसके चाहने वाले मानते हैं, तो उसे अच्छा लगता है। इतनी विनम्रता तो इंसानों में भी नहीं पाई जाती।

मैं तो दिल से चाहता हूं, सेंसेक्स दिन दुगनी, रात चौगनी तरक्की करे। अभी इसने 37 हजार के स्तर को पार किया है, जल्द ही 44 हजार को भी क्रोस कर जाए। दुनिया को दिखा दे कि कामयाबी का रास्ता खमोशी से भी निकल सकता है।

औरों का नहीं मालूम लेकिन मेरे लिए तो प्रेरणा का दूसरा नाम सेंसेक्स है। इतनी ऊंचाई पर पहुंच कर भी खुद को इतना सहज रख पाना यह हर किसी के बस की बात नहीं।

ऊपर वाले से दुआ करता हूं, सेंसेक्स की ये ऊंचाई, उदारता और सहजता हमेशा बनी रहे।

गुरुवार, 2 अगस्त 2018

आइए, मुझे 'ट्रोल' कीजिए

यद्यपि मैं जानता हूं कि 'ट्रोल करना' या 'ट्रोल होना' दोनों ही सबसे खतरनाक सोशल अवस्थाएं हैं, फिर भी, मैं 'ट्रोल' होना चाहता हूं। ट्रोल होकर उससे मिलने वाले 'यश' या 'अपयश' को भुगतना चाहता हूं। देखना चाहता हूं, कल को मेरे ट्रोल होने पर अखबारों में जो 'हेड-लाइन' बनती हैं, वो कैसी होंगी। निजी अनुभव लेना चाहता हूं कि मेरे ट्रोल होने पर सोशल मीडिया और मेरे नाते-रिश्तेदार मेरे बारे में क्या और कैसी राय बनाते हैं।

ट्रोल होने पर किसकी निगाह में मैं कितना उठता और कितना गिरता हूं।
वैसे, अब तक देखने-सुनने में तो यही आया है कि जो ट्रोल हुआ, उसकी किस्मत चमक गई। रातोंरात सेलिब्रिटी होने का खिताब पा गया। कल तक जो उसके नाम और काम से परिचित न थे, सब जान गए। देश से लेकर विदेश तक में उसकी ट्रोलिंग की तूती बोलने लगी। बहुत से दिलजलों ने उसकी राहों पर चलना भी शुरू किया किंतु उतने सफल न हो सके, जितना कि वो।

किस्मत चमकने का सितारा हर किसी की जेब में नहीं होता। जैसे- पहले कभी मैं भी यही चाहता कि प्रियंका चोपड़ा की तरह मैं भी बॉलीवुड में नाम कमाऊं। मगर जब अपनी शक्ल आईने में देख लेता था, 'हीरो' बनने का भूत तुरंत मेरे सिर से उतर जाता था।

मैं अच्छे से जानता हूं कि खुद को ट्रोल किए जाने की ख्वाहिश मेरा काल्पनिक भूत है पर कभी-कभी दिल को खुश रखना भी जरूरी हो जाता है।

आजकल तो कवि लोग, सोशल मीडिया पर, दिल को भी ट्रोल करने से बाज नहीं आ रहे! दिल पर ट्रोलिंग-प्रधान कविताएं लिख रहे हैं। विडंबना यह है कि लोग भी ऐसी कविताओं को चटकारे लेकर पसंद कर रहे हैं।
ट्रोलिंग आलोचना का बिगड़ा रूप है। पहले जमाने में आलोचना खासी तमीज के साथ की जाती थी, अब ट्रोलिंग बदतमीज होकर की जा रही है। ट्रोलर्स के हाथ ट्रोलिंग का उस्तरा क्या आ गया, सबको निपटाने को तैयार बैठा रहता है।

इधर सरकार भी ट्रोलिंग को लेकर सख्त जान पड़ रही है। सोशल प्लेटफार्म भी ट्रोलिंग पर हिदायतें दे रहे हैं। मगर ट्रोलर्स हैं कि मानते ही नहीं। किसी न किसी रास्ते वे अगले को ट्रोल करने का नुक्ता छेड़ ही देते हैं।

मालूम है कि ट्रोलिंग के अनुभव काफी बुरे रहे हैं पर चार लोग जान तो पाए हैं अगले को। बस ऐसा ही कुछ मैं खुद के साथ भी चाहता हूं। अच्छे करम कर मशहूर न हो सका तो क्या, ट्रोलिंग से ही हो जाऊं क्या बुरा है। यों भी, बदनामी से मिली प्रसिद्धि मुझे कुछ ज्यादा ही रास आती है। नाम है तो दुनिया-जहान में पहचान है, वरना कुछ भी नहीं।

तो साहेबान, आप लोगों को खुली छूट देता हूं। आप आइए और मुझे जमकर ट्रोल कीजिए। मैं आपके द्वारा खुद को ट्रोल किए जाने का कतई बुरा न मानूंगा, इस बात की गारंटी देता हूं।