सोमवार, 2 जुलाई 2018

बुरा मानने वाले

ऐसे लोग मुझे बेहद पसंद हैं, जो बुरा मानते हैं। या कहूं, धरती पर जन्म ही उन्होंने बुरा मानने के लिए लिया होता है। वे इसी खुशफहमी में डूबे रहते हैं कि यह दुनिया टिकी ही उनकी बुरा मानने की आदत पर है। वे अगर बुरा नहीं मानेंगे तो विश्वभर की तमाम बुरी आत्माओं का भविष्य खतरे में आ जाएगा।

उनके बुरा मानने का कोई विषय या मुद्दा निर्धारित नहीं होता। किसी भी बात का बुरा मान सकते हैं। यों भी, बुरा मानने या जुबान चलाने में कभी एक नया पैसा खर्च नहीं करना होता।

बुरा मानने का तो ये है कि आप नल में पानी न आने से लेकर पक्षी के सिर पर हग देने तक का बुरा मान सकते हैं। हालांकि इन दोनों घटनाओं के घटने पर जोर किसी का भी नहीं है, तो क्या, उनको तो बुरा मानने से मतलब। कई बुरा मानने वाले मैंने तो ऐसे भी देखे हैं, जो अक्सर अपने जन्म लेने को ही बुरा मानते हैं। कहते हैं, जन्म लेकर जीवन की बहुत बड़ी गलती कर दी।

उन्हें समझाना बेकार है क्योंकि बुरा मानने को वे अपना लोकतांत्रिक हक मानते हैं।

सुन या देखकर ऐसा लगता जरूर है कि बुरा मानना बेहद सरल विधा है। किंतु ऐसा है नहीं। हर बात पर बुरा मानने के लिए आपको दिल से ज्यादा दिमाग को मजबूत करना होता है। काम सिर्फ बुरा मानने से ही नहीं चल जाता। डिपेंड यह करता है कि आप किस बात का कितनी देर या कितने लंबे समय तक बुरा मानते हैं। कुछ क्षणिक भर को बुरा मानते हैं तो कुछ जन्म-जिंदगी भर बुरा माने रहते हैं। बुरा माने रहने में धैर्य बहुत बड़ी भूमिका निभाता है।

निजी और सामाजिक जीवन में जब से सोशल मीडिया का असर बढ़ा है, लोगों की बुरा मानने की आदत में भी खासा इजाफा हुआ है। जहां तक मेरा अंदाजा कहता है, सोशल मीडिया पर तकरीबन अस्सी प्रतिशत लोग किसी न किसी बात पर बुरा मान ही जाते हैं। कभी-कभी तो मामला कोर्ट-कचहरी तक भी खींच जाता है।

बर्दाश्त करना क्या होता है, इस पर तो सोशल मीडिया पर बुरा मानने वाले वीर विचार करना ही पसंद नहीं करते। मानो- जब तक वे किसी बात का बुरा नहीं मान जाएंगे, उनका खाना हजम नहीं होगा।

गाहे-बगाहे मैं भी कोशिश करता रहता हूं बुरा मानने की लेकिन अभी वो बात मुझमें नहीं आ पाई है। मगर लगा हुआ हूं। एक दिन मैं भी बुरा मानने का हुनर सीख ही लूंगा। किसी और लाइन में भले ही नाम न कर पाऊं, बुरा मानने में तो कर ही लूंगा।

अच्छे और भले लगते हैं मुझे वे लोग जो अपने बुरा मानने को दिल में नहीं रखते। बाहर निकाल देते हैं। जमाना ही कुछ ऐसा हो चला है, जो जितना बुरा मानेगा, वो उतना ही बड़ा साहसी कहलाएगा।

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