रविवार, 10 जून 2018

महाभारत काल में 'इंटरनेट' का होना

अगर वो बताते नहीं तो हमें भी कहां पता नहीं चल पाता कि महाभारत काल में भी 'इंटरनेट का अस्तित्व' था! मैं समझ नहीं पा रहा महाभारत के रचयिता और सीरियल बनाने वालों ने हमसे इस 'महत्त्वपूर्ण रहस्य' को छिपाए क्यों रखा? महाभारत काल में 'इंटरनेट' का होना कोई छोटी-मोटी घटना नहीं थी। यह युद्ध से कहीं अधिक मायने रखती थी।

बल्कि मुझको तो ऐसा भी लगता है कि महाभारत की प्रत्येक घटना उस वक्त 'इंटरनेट' पर जरूर डाली गई होगी। यह गहन खोज का विषय है। इतिहासकारों एवं वैज्ञानिकों को इस पर अवश्य ही शोध करना चाहिए।
मुझे पक्का यकीन है, उन्होंने महाभारत काल में इंटरनेट होने की बात हवा में नहीं कही होगी। अवश्य ही उनके पास इसके ठोस तथ्य मौजूद होंगे। कोई और भले ही कर ले किंतु नेता लोग कभी इतिहास से छेड़छाड़ नहीं किया करते! हो सकता है, कभी उन्होंने भी उन जगहों की खुदाई की हो, जहां महाभारत का युद्ध घटा! जहां कौरव-पांडव आदि रहा करते थे। खुदाई के दौरान हो सकता है, उन्हें इंटरनेट चलाने वाली कोई डिवाइस मिली हो! सिम या फिर उस वक्त का कोई डेटा प्लान की शीट आदि ही हाथ आ गई हो!

जब उस दौर में इंटरनेट था ही तो यह भी संभव है कि किसी न किसी शक्ल में मोबाइल भी जरूर रहे ही होंगे। वरना, तब वे लोग इंटरनेट चलाते किस पर थे।

मुझे तो इस बात की भी हैरानी है कि पूर्व में हुईं इतनी खुदाइयों के बाद भी खुदाई-कर्त्ता वो नहीं खोज पाए जो उन्होंने एक ही बार में खोजकर देश को बता दिया। इससे यह बात भी प्रमाणित होती है कि देश के नेता सिर्फ राजनीति ही करना नहीं जानते बल्कि वे पैराणिक काल की भी ठीक-ठाक जानकारी रखते हैं।

उनके कहे पर मेरी सहमति इस कारण भी बनती है क्योंकि महाभारत के युद्ध का आंखों-देखा हाल संजय ने महाराज धृतराष्ट्र को सुनाया था। एक-एक पल की खबर उन्हें वे देते रहते थे। इतना ही नहीं वासुदेव कृष्ण भी युद्ध का परिणाम बहुत अच्छे से जानते थे। एक-दूसरे के खेमे की गुप्त सूचनाओं का आदान-प्रदान भी, तब के इंटरनेट के, माध्यम से ही होता रहा होगा।

इंटरनेट का तो खैर उन्होंने बता ही दिया, साथ ही, यह भी खोज और जिज्ञासा का विषय है कि क्या यूट्यूब का जलवा तब भी था! राजा-महाराजा अपना मनोरंजन गीत-संगीत-नृत्य आदि से तो करते ही थे, क्या दिल बहलाने को यूट्यूब का भी इस्तेमाल किया करते थे! जब इंटरनेट था तो संभव है, यूट्यूब भी रहा ही होगा! वैसे, इस विषय पर शोध किया जा सकता है।

अभी एक नेता ने और भी दिलचस्प बयान दिया कि नारदजी के पास गूगल समान जानकारियां रहती थीं। कुछ समय पहले इन्हीं नेता जी ने राम के तीरों को इसरो के रॉकेट जैसा बताया था! मगर लोग हैं कि इस सब को मजाक समझ हवा में उड़ा दे रहे हैं। किंतु मैं ऐसा कतई नहीं करता। बल्कि मुझे तो गर्व टाइप फील हो रहा है कि मेरे देश के नेता वैज्ञानिक सोच के मामले में दस कदम आगे हैं। बेशक, उनकी बातों-बयानों को सुनकर आपका सिर चकरा रहा होगा पर पौराणिक सत्य को कभी झुठलाया नहीं जा सकता।

न भूलें, डार्विन के विकासवाद के सिद्धांत को भी पिछले दिनों एक नेता ने चुनौती दी थी।

चलिए, वापस महाभारत पर लौटते हैं। अक्सर जब महाभारत के युद्ध के विषय में सोचता हूं तो मेरे दिमाग में बार-बार यही प्रश्न कौंधता है कि महाभारत का युद्ध कहीं इंटरनेट की मदद से तो नहीं लड़ा गया था? कहीं युद्ध के तौर-तरीकों को गूगल तो नहीं किया गया था? मामा शकुनि के बारे में अक्सर मुझे कुछ ऐसा ही शक होता है। उनके पास अपने प्रिय भांजे दुर्योधन को देने के लिए इतनी सलाहें थीं। इतने तो वाण भी न होंगे अर्जुन के तरकश में।

महाभारत के किसी भी पात्र की बात कर लीजिए, हर किसी में कुछ न कुछ इंटरनेटिए प्रभाव दिखेगा ही।

मुझे तो पांडवों द्वारा इंद्रप्रस्थ का निर्माण भी गूगल किया हुआ ही लगता है।

इतने प्रमाण मिलने के बाद भी उनके बयान 'महाभारत काल में इंटरनेट था' पर विश्वास न करना कोरी बेवकूफी ही कहलाएगी। शेष आपकी मर्जी।

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