मंगलवार, 5 जून 2018

खटमलों से प्रेम

पिछले दिनों एक सज्जन के घर ठहरने का मौका मिला। सज्जन की सज्जनता तब बहुत भा गई, जब रात को सोने से पहले ही उन्होंने मुझे बता दिया कि उनकी खटिया और बिस्तर में खटमल हैं! खटमल का नाम सुनते ही मेरा मन प्रसन्न हो उठा। मैंने उन्हें खटमल वाली खटिया और बिस्तर पर मुझे सुलाने के लिए तहे-दिल से धन्यवाद दिया। एक बार को वे भी थोड़ा सकपका-सा गए कि कैसा बंदा है, जो खटमल की खटिया और बिस्तर पर सोने के लिए बाबला हुआ जा रहा है।

उन्होंने मुझसे पूछा भी कि मुझे खटमलों के साथ सोने में कोई एतराज तो नहीं। मैंने उन्हें साफ कह दिया एतराज का तो कोई सवाल ही पैदा नहीं होता। बल्कि खटमलों के प्रति तो मेरे दिल में बचपन से ही प्यार और आदर हैं। खटमल द्वारा इंसानों का खून पीने को मैं कतई बुरा नहीं मानता। इंसान का खून उनका भोजन है। यों, किसी के भोजन पर लात मारना उचित नहीं।

वक्त ने इंसान को बड़ा निर्दयी और मतलबपरस्त बना दिया है। हमेशा वो अपना ही भला सोचता है। कभी नहीं चाहता कि उसके दम पर किसी दूसरे के साथ भी अच्छा हो। अपवादों को छोड़ दें तो 'अच्छाई' करना इंसानों की कुंडली में लिखा ही नहीं।

किंतु मैं ऐसा रत्तीभर नहीं सोचता। चाहे खटमल हो या छिपकली, इंसान हो या शैतान कोशिश मेरी यही रहती है, उनके साथ अच्छा ही करूं। बताते है, अच्छा करने से स्वर्ग मिलता है। हालांकि मुझे स्वर्ग की कभी तमन्ना नहीं रही, फिर भी, अगर मिल जाए तो क्या हर्ज?

कोई ऐसा मानेगा तो नहीं पर हम इंसानों ने खटमलों के साथ ज्यादती बहुत की है। उन्हें यों उपेक्षित रख छोड़ा है मानो वे हमें भारी नुकसान पहुंचाते हों! जबकि हकीकत यह है कि खटमल सिवाय इंसान का खून चूसने के और कोई हानि उसे नहीं पहुंचाता। एक नन्हा-सा जीव इतने बड़े इंसान का कितना खून चट कर जाएगा भला! उससे कहीं अधिक मात्रा में इंसान जानवरों का खून कर रहा है। खुद ही एक-दूसरे के खून का प्यासा है।

लेकिन खटमल जरा-सा क्या पी ले, हमें तरह-तरह की मुसीबतें होने लगती हैं। तुरंत ही उसे मारने के इंतजाम किए जाते हैं। जबकि खटमल से कहीं खतरनाक मच्छर है पर उस पर इंसान का जोर चल ही नहीं पा रहा। देश में मच्छर सुकून भरी जिंदगी जी रहे हैं। और बेचारे खटमल विलुप्ति की कगार पर हैं।

खटमलों के अस्तित्व को बचाए रखने के लिए किया मैंने यह है कि मैं उन सज्जन के यहां से दस-बीस खटमल मांग लाया हूं। ताकि उन्हें अपनी खटिया और बिस्तर पर संरक्षण दे सकूं। रात को जब सोऊं तो वे मेरे खून से अपनी भूख मिटा सकें। भूखे को भोजन खिलाना शास्त्रों में भी पुण्य का काम बताया गया है।

शेर, चीता, गाय आदि तो हम बचाते ही रहते हैं अब थोड़ा हमें खटमलों को बचाने के बारे में भी सोचना चाहिए। खटमलों को भी हमारे प्यार की दरकार है।

2 टिप्‍पणियां:

HARSHVARDHAN ने कहा…

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन जन्म दिवस - सुनील दत्त और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

Shah Nawaz ने कहा…

:)