मंगलवार, 1 मई 2018

लाल किला बिक थोड़े न रहा है

बात बहुत बड़ी नहीं, बस इतनी-सी है। कि, सरकार लाल किले की देख-भाल का जिम्मा एक निजी ग्रुप को सौंप रही है। तो क्या...! सौंपने दीजिए न। जब खुद से नहीं संभल-संवर पा रहा तो निजी ग्रुप ही देखे। इस बहाने लाल किला लाल किला तो नजर आएगा। निजी ग्रुप उसकी साफ-सफाई तो करता रहेगा। रंगाई-पुताई, धुलाई भी साथ-साथ हो जाया करेगी।

अब सरकार के पास इतना वक्त कहां धरा है कि वो देश की धरोहरों की देख-भाल करती फिरे। सरकार खुद की ही देख-भाल कर ले, ये ही बहुत है। आए दिन तो उसे कभी इस तो कभी उस राज्य के चुनावों में बिजी रहना पड़ता है। सरकार या मंत्री लोग चुनाव देखें या धरोहरों को। उनके लिए तो उनकी कुर्सी ही धरोहर है। वे तो उसे ही बचाए रखने में दिन-रात संघर्षरत रहते हैं।

अच्छा ही किया जो सरकार ने लाल किले की साफ-सफाई का अधिकार एक निजी ग्रुप को दे दिया। कम से कम अब वे लाल किले को अपना समझकर तो उसकी देख-रेख करेंगे। अब सब कुछ समय-प्रबंधन के साथ होगा। उम्मीद है, लाल किला का लाल रंग और भी निखर कर आएगा।

मगर उड़ाने वाले तो यह अफवाह उड़ा रहे हैं कि सरकार ने लाल किले को निजी हाथों बेच दिया। उसका सौदा कर दिया। धरोहर की इज्जत को नुकसान पहुंचाया। विश्व में देश का सिर शर्म से झुका दिया। आदि-आदि।

हद है। सरकार भला ऐसा क्यों करेगी। जितना प्यार विपक्ष लाल किला से करता है, उससे कहीं ज्यादा सरकार करती है। धरोहर को कैसे सहेजा जाए, यह सरकार से ज्यादा अच्छा कौन जानता है भला। सरकार के भीतर क्या कम धरोहरें हैं। जिन्हें वो आज भी करीने से सहेजे हुए है।
लाल किला जैसी धरोहर अगर सरकार की प्राथमिकता में नहीं होती तो उसके बारे में वो सोचती ही क्यों। यह बात सरकार भी अच्छे से जानती है कि धरोहर की हिफाजत जितना बेहतरीन तरीके से निजी ग्रुप कर लेगा शायद सरकार न कर पाए। कभी सरकारी दफ्तर और निजी ऑफिस के भीतर जाकर देखिए, फर्क स्वयं पता चल जाएगा।

कल तक लाल किले की चिंता किसी को नहीं थी। आज एक निजी ग्रुप को क्या कह दिया देख-भाल करने के लिए विपक्ष से लेकर बुद्धिजीवि तक यों चीख-चिल्ला रहे हैं मानो हिमालय पर्वत खिसक कर बरेली में शिफ्ट हो गया हो!

लाल किला को बेचने-फेचने की बातें सिर्फ अफवाहें हैं। अफवाहों के न सिर होते हैं न पैर। वे बे-पर ही यहां-वहां उड़ती रहती हैं। अतः अफवाहों पर ध्यान न दें। सरकार की मंशा को गलत न समझें। लाल किला कल भी अपना था। आज भी अपना है। हमेशा अपना ही रहेगा।

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