बुधवार, 7 फ़रवरी 2018

करते रहिए फ़्लर्ट!

प्यार का तो कुछ ऐसा है कि किसी न किसी से हो ही जाता है। प्यार होते ही साथ-साथ जीने-मरने की कसमें तो खैर खाई ही जाती हैं। कुछ इससे भी आगे निकल शादी कर लेते हैं। यानी लव; 'लव-मैरिज' में तब्दील हो जाता है। 'लव-मैरिज' वालो को मेरा सलाम।

समाज में कुछ ऐसे भी साहसी लोग हैं जो फ़्लर्ट भी कर लेते हैं। ऐसा वैसा नहीं बल्कि कामयाब फ़्लर्ट। हींग लगे न फिटकरी, रंग चोखा।
कॉलेज के दिनों में मेरा एक दोस्त था। वो फ्लिर्टिंग का मास्टर था।
पढ़ाई-लिखाई से कहीं ज्यादा ध्यान वो किस्म-किस्म के फ़्लर्ट पर देता था। फ़्लर्ट उसकी आत्मा से लेकर स्वभाव तक में शामिल था। एकाध दफा तो ऐसा भी हुआ कि उसके हमारे मोहल्ले में आने पर मोहल्ले वालों ने पाबंदी ही लगा दी। मोहल्ले की लड़कियों से फ़्लर्ट वो कर जाता था, नाम बदनाम मेरा होता था कि ये सब मैं करवा रहा हूं। उड़ते-उड़ते बात मेरे घर तक पहुंच जाती थी। मुझे घर वालो की सख्त नसीहतों का सामना करना पड़ता था सो अलग।

जो भी हो पर मेरे दिल में न केवल उस दोस्त बल्कि हर उस व्यक्ति के प्रति खासा सम्मान है, जो किसी न किसी बहाने फ्लिर्टिंग में लगे रहते हैं। यों भी, आजकल जमाना प्यार से अधिक फ्लिर्टिंग का है। और, सोशल मीडिया पर तो फ्लिर्टिंग के क्या कहने। फेसबुक के इन-बॉक्स में न जाने कितने ही फ़्लर्ट की कहानियां दबी पड़ी हैं।

आदर्शवादी लोग ऐसा मानते हैं कि फ़्लर्ट एक अय्याशी-तलब विधा है। फ़्लर्टवादी समाज का सबसे बिगड़ैल प्राणी होता है। फ़्लर्ट ने प्यार जैसी पवित्र चीज को नुकसान पहुंचाया है। जबकि ऐसा कुछ भी नहीं है। फ्लिर्टिंग की परंपरा तो अपने देश में अनादि-काल से रही है। कितने ही देवी-देवताओं, राजा-महाराजाओं ने अपने जीवन काल में कितने ही फ़्लर्ट किए। चूंकि वो सब पवित्र आत्माएं थीं सो उनके फ़्लर्ट को 'प्रेम' नाम दे दिया गया। हां, यह सत्य है कि उनके फ़्लर्ट बड़े कायदे के और आदर्श हुआ करते थे।

आजकल के जमाने में प्यार होना ही इतना कठिन हो लिया है, फ़्लर्ट करना तो और भी मेहनत का काम है। किसी को क्या मालूम अपने व्हाट्सएप्प पर अगला कितनों से फ़्लर्ट कर रहा है। सबकी अपनी-अपनी चाहतें और स्वतंत्रताएं हैं। आखिर हम एक लोकतांत्रिक मुल्क हैं। लोकतंत्र में सबको प्यार, धिक्कार, स्वीकार, फ़्लर्ट करने का अधिकार है।

गाहे-बगाहे इच्छा तो मेरी भी बहुत होती है कि मैं भी फ़्लर्ट करूं। पर अचानक से पत्नी का कथित रौद्र-रूप ध्यान में आ जाता है और अपनी इच्छा को कैंसिल कर देना पड़ता है। वैसे, जानकारी के लिए बता दूं, शादीशुदा लोग फ़्लर्ट अधिक करते हैं। चाहे तो इस मुद्दे पर शोध करवा लीजिए। मैं गलत साबित न होऊंगा।

तो करते रहिए फ़्लर्ट। बाकी जो होगा सो देखा जाएगा।

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