गुरुवार, 22 फ़रवरी 2018

घोटाला कर भागने वाले को 'वीर' कहते हैं!

घोटाला अपने नेचर में 'प्रेम' की तरह होता है। किया नहीं जाता, हो जाता है। जिनमें माआदा होता है वे अपने प्रेम को खींचकर शादी तक ले जाते हैं। जिनमें रिस्क लेने की हिम्मत नहीं होती वे बेगानी शादी में 'अब्दुल्ला' बनकर रह जाते हैं।

ठीक ऐसी ही प्रवृत्ति घोटालेबाज में पाई जाती है। घोटाला भी वही कर पाता है जिसमें हिम्मत होती है। समाज, जनता, मीडिया के ताने बर्दाश्त करने का जज्बा होता है। किए गए घोटाले पर कभी शर्म महसूस नहीं होती। चेहरे पर ताजगी, दिल में न्याय-व्यवस्था के प्रति आत्म-विश्वास बना रहता है। सरकार और पुलिस की नाक के नीचे भागने का हौसला रखता है।

घोटाला जितना बड़ा होता है, उसके चर्चे भी उतने ही बड़े होते हैं। घोटालेबाज रातभर में सुपरस्टार बन जाता है। सोशल मीडिया से लेकर चाय-पान के खोखे तक बस उसी के किस्से छाए रहते हैं। कुछ लोग उसे गरियाते तो कुछ उससे प्ररेणा भी लेते हैं। और, कुछ मेरे जैसे भी होते हैं जो रह-रहकर अपने लेखक होने को कोसते और घोटालेबाज न बन पाने पर गहरा अफसोस जाहिर करते हैं।

फिलहाल तो अभी मुझे उन सयाने लोगों पर दया आ रही है जो पीएनबी घोटाले के मेन हीरो को 'बुरा' कह रहे हैं। उसके विदेश भागने को हिकारत भरी निगाह से देख रहे हैं। कभी सरकार तो कभी व्यवस्था को गलिया रहे हैं।

क्यों भाई क्यों? अगले ने भागकर क्या गलत किया? यहां रुके रहकर उसे अपनी खोपड़ी थोड़े न तुड़वानी थी। जब उसके समकालीन घोटाला कर भाग सकते हैं तो वो क्यों नहीं? यों भागने पर किसी का जोर नहीं। कोई हर सुबह सेहत बनाने के लिए भागता है तो कोई खुद के बचाव में। ध्यान रखें। भाग वही पाता है, जिसकी टांगे मजबूत और घुटने कामयाब होते हैं।

हमें तो अगले को गलियाने की बजाए उसको थैंक्स बोलना चाहिए कि उसने घोटाले की प्रासंगिकता को बनाए रखा। हमारे कानों में घोटाला शब्द को पड़ने दिया। वरना इधर कुछ सालों में तो इस शब्द को ही हम भूलने से लगे थे।

मेरा ऐसा व्यक्तिगत मत है कि घोटाला कर भागने वाला 'कायर' नहीं बल्कि 'वीर' होता है। वीर लोग ही घोटाला कर भी पाते हैं। क्या नहीं!

1 टिप्पणी:

राजा कुमारेन्द्र सिंह सेंगर ने कहा…

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन वीनस गर्ल आज भी जीवित है दिलों में : ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...