सोमवार, 19 फ़रवरी 2018

आइए, हंसा जाए

हंसते हुए चेहरे मुझे बहुत भाते हैं। ऐसे चेहरों को देख मुझे जीवन के प्रति 'सकारात्मक ऊर्जा' मिलती है। हंसना इसलिए भी जरूरी है ताकि कुछ पलों के लिए ही सही आप तनाव-मुक्त हो सकें। लॉफिंग बुद्धा को देखा है, हमेशा की तरह बुक्काफाड़ हंसी के मोड में रहता है। हंसी ऐसी ही होनी चाहिए।

यों, दूसरों पर हंसने के तमाम बहाने हैं। कुछ लोगों को आनंद ही दूसरों पर हंसकर मिलता है। इतिहास दूसरों पर हंसी से भरा पड़ा है। अगर द्रौपदी दुर्योधन के गिरने पर न हंसी होती तो शायद इतना बड़ा कांड (महाभारत) भी न होता। उस जमाने में तो हंसने-रोने पर ही श्राप मिल जाया करते थे।

खैर...।

हंसने का असली मजा तो खुद पर है। बात तो तब है जब केले के छिलके पर पांव पड़ते ही रपटने जाने पर दूसरों के हंसने से पहले हम ही खुद पर हंस लें। पर ऐसा हम कर ही कहां पाते हैं। खुद पर हंसना दुनिया के सबसे कठिनतम कामों में से एक है। काल्पनिक तो छोड़िए, असल जिंदगी में ही ऐसे बहुत कम लोग मिलेंगे जिन्हें खुद पर हंस कर सुख मिलता हो।

ऐसा लेकिन मैंने अपने साथ नहीं होने दिया है। मुझे खुद पर हंसने में मजा आता है। आप भी बे-ख़ौफ होकर मुझ पर हंस सकते हैं। मेरी कोशिश भी हमेशा यही रहती है कि लोग मेरे लिखे, मेरे कहे, मेरी हरकतों और मेरे चेहरे पर हंसे। मुझ पर हंस कर अगर दूसरे का खून बढ़ रहा है तो यह मेरे लिए सम्मान की बात है। यों भी लोगबाग अब कम ही हंसते-मुस्कुराते नजर आते हैं। सोशल मीडिया ने तो मानो हंसी पर ग्रहण ही लगा दिया है।

हालांकि हंसी के भी अपने कायदे हैं। बे-कायदे की हंसी कभी-कभी अच्छे-खासे कांड करवा देती है। फिर भी, हमें अपने दिलों में हंसी के प्रति गुंजाइश तो रखनी ही चाहिए। हंसी पर बिफर जाना मूर्खता है। जो हंस नहीं सकता। जो दूसरे की हंसी को एन्जॉय नहीं कर सकता। जो केवल अपनी ही हंसी हंसता है, उसका जीना भी क्या जीना है लल्लू।

जब आप चार्ली चैपलिन की हंसी पर हंस सकते हैं तो खुद पर किसी के हंस देने पर आपको क्यों आपत्ति हो भला!

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