मंगलवार, 16 जनवरी 2018

चम्मच खतरे में है!

बहरहाल, यह तो नहीं बता सकता कि लोकतंत्र कितना खतरे में है कितना नहीं। यह जजों और बुद्धिजीवियों के विमर्श का विषय है। हां, इतना जरूर बता सकता हूं कि लोकतंत्र में चम्मच खतरे में हैं! चम्मचों से चमचों का अस्तित्व खतरे में है। यह खतरा छोटा-मोटा नहीं, बहुत बड़ा है।

इतिहास में ऐसा पहली दफा हुआ है, जब सोशल मीडिया के माध्यम से चम्मच चोरी की घटना सामने आई। मुद्दा चूंकि एक बड़ी मुख्यमंत्री साहिबा ने उठाया था तो सामने आना ही था। वरना तो तमाम रूटीन चोरियों के साथ चम्मच चोरी की वारदात भी दबी की दबी रह जाती। जब हीरे-जवाहरात चोरी होने की घटनाएं कुछ समय बाद ठंडी पड़ लेती हैं, ये तो बेचारे चम्मच थे!

कोई माने या न माने मगर मैं तो चम्मच के चुर जाने को लोकतंत्र का सबसे दुखद पहलू मानता हूं। अरे, इससे क्या होता है कि चम्मच रसोई का आइटम है। इसकी जरूरत सिर्फ खाना खाने या परोसने के लिए पड़ती है। तरह-तरह के चम्मच प्लेट्स की शोभा बढ़ाते हैं। एक दिन की छोड़िए, बस एक टाइम ही बिना चम्मच खाना खाकर देखिए- अमां, दाल-चीनी के भाव मालूम पड़ जाएंगे।

खुदा-न-खास्ता चम्मच बिरादरी अगर हड़ताल कर दे तो रसोई में न खाना पकेगा न कोई खाएगा। भूखमरी की नौबत आ जाएगी। क्या समझे!

चम्मच मूलतः शांतिप्रिय होते हैं। न किसी से उलझते हैं न अपना दुख-दर्द किसी से बांटते। अपनी छोटी किंतु सुखद लाइफ में मस्त रहते हैं। पर इसका ये मतलब तो नहीं कि उन्हें शादियों या पार्टियों में चुरा लिया जाए। चोरी चले जाने की खबर तक थाने में दर्ज न करवाई जाए। वैसे तो हम बड़े ही जिम्मेदार नागरिक बने फिरते हैं। कार, कूलर, मग्गा, कुत्ता चुर जाए तो थाना छोड़ अखबारों तक में खबर देने से नहीं चूकते।
आसमान सर पर उठा लेते हैं। यहां चम्मच चोरी हो गए तो सब कानों में तेल डाले ऐसे बैठे हैं मानो कुछ हुआ ही न हो। वाकई, किसी ने सही कहा है धरती पर इंसान से ज्यादा मतलबी प्राणी कोई और नहीं।

अब तक एक भी बंदा निकलकर सामने नहीं आया है जिसने चम्मच चोरों के खिलाफ चोरी की रपट दर्ज कराई हो। सब मिलकर सोशल मीडिया पर चम्मचों पर चुटकुले बनाने में लगे हैं। विडंबना देखिए, इनमें वो लोग भी शामिल हैं जो चम्मचों की सहायता से आज किसी न किसी के चमचे बने मौज काट रहे हैं।

और एक मैं हूं जब से इस खबर का पता चला है, खुद को गहरे सदमे में फील कर रहा हूं। रात-दिन इसी चिंता में डूबा जा रहा हूं, चोरी गए चम्मच पता नहीं किस हालत में होंगे? उनके साथ कैसा बर्ताव बरता जा रहा होगा?

चम्मच का चोरी होना लोकतंत्र का लिए खतरे की घंटी है! देश में जब चम्मच ही सुरक्षित नहीं फिर आम आदमी की बिसात ही क्या? जजों और बुद्धिजीवियों को इस मसले को बहुत गंभीरता से लेना चाहिए। साथ ही, राजनीतिक दलों को इस मसले पर राजनीति कतई नहीं करनी चाहिए।

ध्यान रखें, चम्मच की हिफाजत में ही देश का लोकतंत्र और चमचे सुरक्षित हैं। मेरे विचार में इस मसले को यूएन तक लेके जाना चाहिए। नहीं क्या...!

1 टिप्पणी:

राजा कुमारेन्द्र सिंह सेंगर ने कहा…

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन सड़क दुर्घटनाओं से सब रहें सुरक्षित : ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...