गुरुवार, 21 दिसंबर 2017

डिजिटल बदनामियां

इस भीषण डिजिटल जमाने में आप पर हर पल निगाह रखने वालो की कमी नहीं। किसी न किसी बहाने वो आप की हर बात जानने को उत्सुक यों रहते हैं मानो उनका आप पर कोई किताब लिखने का विचार हो! तमाम ऐसे किस्से भी सामने आए हैं कि जब किसी को किसी की जासूसी के पुख्ता प्रमाण मिले हैं। डिजिटल युग में जासूसी कोई खास बड़ा मुद्दा न रही अब। हैकर्स की तो रोजी-रोटी ही इस पर टिक कर चला करती है। कई हैकर्स ने तो सेलिब्रिटियों के ट्विटर, फेसबुक एकाउंट कहकर हैक किए हैं। इतिहास के पन्नों में जा चुकी खबरें इस बात की गवाह हैं।

हालांकि मैं कोई सेलिब्रिटी नहीं फिर भी कोशिश मेरी यही रहती है कि मैं अपने सोशल मीडिया से जुड़े एकाउंट्स को बचाए रखूं। कुछ ऐसा न लिखूं कि अगला मेरे एकाउंट पर गिद्ध दृष्टि डालकर बैठ जाए। यहां पर न्यूट्रल बने रहने में ही फायदा है। न काऊ से दोस्ती न काऊ से बैर।

मैं यह भी बहुत अच्छी तरह से जानता हूं कि खुदा-न-खास्ता मेरा एकाउंट अगर हैक होता भी है तो मुझे बदनामी जो मिलनी है सो तो मिलेगी ही पर नाम भी बहुत होगा। रातभर में मैं सेलिब्रिटी टाइप बन जाऊंगा। न केवल इंडियन बल्कि विदेशी मीडिया भी मुझे हाथों-हाथ लेगा। ट्विटर और फेसबुक पर मैं ट्रोल किया जाऊंगा। डिजिटल युग में सोशल बदनामी से मिला नाम ऊंची हैसियत रखता है।

ऐसे जाने कितने ही नाम जिन्हें कल तक कोई न जानता था न पहचानता- एक दफा वे सोशल मीडिया में बदनाम क्या हुए, रात भर में बादशाह बन गए। बच्चा-बच्चा तक उनके नाम और काम से यों परिचित हो गया मानो- उन्होंने कोई ऊंची रिसर्च की हो! कई बदनाम नाम आज राजनीति में अपना सिक्का जमाकर चला रहे हैं।

उनकी कथित बदनामियों को देखकर कभी-कभी तो मेरा दिल भी करता है जरा-बहुत यहां मैं भी बदनाम हो लूं। क्या जाता है? बाकी जो होगा सो होगा ही पर डिजिटल वर्ल्ड में नाम तो पा ही जाऊंगा। दुनिया में नाम का ही खेल है सारा। जिसका नाम है उसी के ठाठ हैं। ये इज्जत और आदर्शवाद सब बेकार की किताबी बातें हैं। जिनसे न फेम मिलना है नेम।

रही बात दुनिया की तो उसी फिक्र ही कौन करता है। यों भी, ये दुनिया कौन-सी दूध की धुली है! उसके गिरेबान में भी हजार दाग लगे पड़े हैं। ईमानदार और नेक लोगों के साथ इसने क्या किया, बताने की आवश्यकता नहीं। दुनिया से तो वो डरे जिसे इसकी गुलामी पसंद हो।
ये तय तो कर ही लिया है मैंने कि सोशल वर्ल्ड में एक बार बदनाम तो जरूर होना है मुझे। हर चीज का अनुभव लेना चाहिए। जहां इतने बरस इज्जत का मजा लिया अब थोड़ी बदनामी का लुत्फ भी ले लेंगे, क्या चला जाएगा। हो सकता है, किस्मत का सितारा यहीं से चमक जाए। अच्छे दिन आते देर ही कितनी लगती है।

बदनामी के रास्ते मिला नाम अब लोगों की इज्जत का सिंबल बन चुका है। उन्हें पूजा जाने लगा है। उनके चाहने वाले बड़े ध्यान से उन्हें सुनते हैं। मौके का फायदा उठाने में कोई हर्ज नहीं। कोशिश बस यही होनी चाहिए कि डिजिटल बदनामी जीवन में फेम लेकर आए। ठीक है न...!

1 टिप्पणी:

Udan Tashtari ने कहा…

यहां पर न्यूट्रल बने रहने में ही फायदा है। न काऊ से दोस्ती न काऊ से बैर।...सही कह रहे हैं!!