मंगलवार, 5 दिसंबर 2017

प्याज से मोहब्बत

प्याज से मुझे उतनी ही मोहब्बत है जितनी शीरीं को फरहाद से थी। व्हाट्सएप्प चलाए बिना दो पल को फिर भी रह सकता हूं किंतु प्याज बिना एक पल भी नहीं। प्याज मेरा आदि और अंत है। प्याज के बिना न मुझे खाना हजम होता है न लिखने का आईडिया ही आता है। बोते होंगे लोग बाग अपनी जिंदगी में चरस, मैं तो प्याज ही बोता हूं।

प्याज पर जब भी मुनाफाखोरी या महंगाई का संकट आया है, मैं हमेशा प्याज के साथ खड़ा हुआ हूं। मैंने उन लोगों की कड़ी निंदा की है, जिन्होंने प्याज को बुरा-भला कहा है। मैं उन लोगों का भी सख्त विरोधी हूं जो गाहे-बगाहे प्याज न खाने की सलाह देते हुए पाए जाते हैं। अजी, बन्दर क्या जाने अदरक का स्वाद!

कोई मुझे समझाए कि प्याज के महंगा होने का भला प्याज से क्या मतलब? प्याज ने तो किसी से कहा नहीं कि उसे महंगा करा जाए। उसे तो मालूम भी नहीं होता कि ये सस्ता-महंगा होता क्या है? प्याज के कंधे पर बंदूक रखकर चलाए कोई और दोष बेचारे प्याज को भुगतना पड़े। ये कहां की इंसानियत है दया?

और फिर, प्याज अभी इतना महंगा नहीं हुआ है कि एक सामान्य क्लास का आदमी उसे एफोर्ड न कर सके। 60-70 रुपये किलो ही तो बिक रहा है! ये कोई इतना भारी-भरकम रेट नहीं कि सरे बाजार हाय-तौबा काटी जाए। इससे कहीं महंगा तो टमाटर बिक रहा है। तो क्या लोग टमाटर खाना छोड़ देंगे! हद है यार...।

प्याज की अपनी ताकत है। अपनी राजनीतिक हैसियत है। हालांकि उसने कभी अपनी राजनीतिक हैसियत का फायदा उठाना नहीं चाहा। बल्कि नेता लोग ही उससे खेलते रहते हैं। उधर मुनाफाखोर बाजार में उसका रेट बढ़ा देते हैं सुननी उसे पड़ती है। सब कहते हैं कि प्याज महंगा हो गया। कोई यह नहीं कहता कि प्याज को जानबूझकर महंगा किया गया है। करे कोई, भरे कोई!

मैं भी कम शाणा नहीं। जब-जब प्याज महंगा होता है, तब-तब हर रेट पर उसे खरीदता हूं। देखने वालों की आंखें फटी की फटी रहें इसलिए उसे झोले में नहीं पोली-बैग में भरकर लता हूं। ऐसा तो कभी हुआ ही नहीं जब खाना मैंने बिना प्याज के खाया हो। प्याज के प्रति अपना स्नेह दिखावा नहीं प्योर वाला है।

मैंने तो अपने हर पड़ोसी तक से कह रखा है, जब जरूरत हो मुझसे प्याज मांग ले जाएं। कभी मना नहीं करूंगा। खाने-पीने की चीजों में भला कैसा भेद-भाव।

मैं फिर कह रहा हूं, बढ़ी कीमतों के लिए दोष प्याज को न दें। उनकी गर्दनों को पकड़ें जिन्होंने बेचारे प्याज को जनमानस के बीच बदनाम किया हुआ है। प्याज तो भोला है। उसे क्या मालूम उसका कौन और किस तरह से फायदा उठा रहा है।

प्याज को इज्जत बख्शें। प्याज खाएं और खिलाएं। प्याज के प्रति अपनी मोहब्बत में कमी न आने दें। जय प्याज।

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