रविवार, 3 दिसंबर 2017

नाक पर भला क्या गर्व करना!

मुझे अपनी नाक पर कभी गर्व नहीं रहा! रहे न रहे। कटे न कटे। नाक ही तो है कोई इतिहास थोड़े ही कि हर वक़्त ध्यान रखता फिरूं- कौन इसके साथ छेड़छाड़ कर रहा है, कौन सम्मान दे रहा है। यह मैं अच्छे से जानता हूं कि दुनिया में चाहे कुछ हो जाए मेरी नाक जहां है वहां सही सलामत ही रहेगी। फिर क्या फायदा बेमतलब की टेंशन लेने से।

एक मुझे ही नहीं दुनिया भर में किसी को भी अपनी नाक के प्रति मोह नहीं पालना चाहिए। नाक को आपके चेहरे से उठकर कहीं नहीं जाना है। वो अपने जन्म से लेकर मृत्यु तक वहीं जमी मिलेगी। उसे कोई नहीं उखाड़ सकता।

मेरा तो बचपन से यही मानना रहा है कि मनुष्य की लाइफ-लाइन दिल नहीं बल्कि नाक है। ये नाक ही है जिससे सूंघकर हम पदार्थ की कोमलता और तीव्रता का अंदाजा लगा सकते हैं। संसार भर की खुशबूओं का अस्तित्व नाक की वजह से ही तो कायम है। नाक न होती तो कितना ही सैंट-डियो खुद पर डाल लो किसी को महसूस न होता। नाक न होती तो बीवी या बावर्ची के बने खाने की महक का अहसास ही मन में न जागता।

तो फिर नाक के प्रति इतना फिक्रमंद क्यों रहना? क्यों इतना गर्व करना? अरे, ये सब तो नाक के फर्ज हैं जिन्हें उसे हर हाल में निभाना ही निभाना है।

इन दिनों जिस तरह से इस-उस की नाक काटने की धमकियां सुनाई में आ रही हैं, सब कोरी लफ्फबाजियां हैं। नाक कोई आलू-तुरई थोड़े है कि जब मन करा काट ली। नाक काटने के लिए लक्ष्मण जैसी ताकत और हिम्मत चाहिए होती है। वो भी सूर्पनखा के कु-कर्मों के कारण उसकी नाक काटनी पड़ी थी। वरना इतनी नौबत ही न आती। जबकि यहां तो बेवजह ही नाक-गला काटने के फरमान जारी हो रहे हैं।

फरमान जारी करने वालो में आधे से ज्यादा तो ऐसे महापुरुष होंगे जिन्होंने जिंदगी में कभी भिंडी तक न काटी होगी। चले हैं नाक काटने!

यों भी इंसान एक नाक कटा प्राणी ही है। अपने जन्म से लेकर बुढ़ापे तक जाने कितनी दफा किस-किस तरह से अपनी नाक कटवाता रहता है। लेकिन मुंह से कभी स्वीकारता नहीं कि हां उसकी नाक काटी जा चुकी है। नाक को यों बचाता फिरता है मानो वो कोई सोना-चांदी हो!

न भूलिए, जब तलक मनुष्य का अस्तित्व रहेगा, नाक का भी रहेगा। फिर खामखां की चिंता क्यों?

गर्व नाक पर मत कीजिए। गर्व करना ही है तो जीभ पर कीजिए। जीभ कंट्रोल में रहेगी तो नाक भी बची रहेगी। बाकी कहते-गाते कुछ भी रहिए।

1 टिप्पणी:

Digamber Naswa ने कहा…

सही कहा है जीभ पे गर्व करना चाहिए ... ये है तो जिंदगी का स्वाद है ...
उत्तम व्यंग ...