मंगलवार, 7 नवंबर 2017

कूड़े पर बहस के बहाने

उस दिन मोहल्ले में दो पड़ोसी आपस में सिर्फ इस मुद्दे पर भिड़ लिए कि तूने मेरे घर के आगे कूड़ा क्यों डाला! दोनों के मध्य बहुत देर तक इस मुद्दे पर हल्की-फुल्की गालियों के साथ विचार-विमर्श चलता रहा। बात कूड़े के रास्ते होती-होती कभी एक दूसरे के खानदान तक पहुंच जाती तो कभी एक-दूसरे के अत्यंत निजी प्रसंगों तक। कुछ देर के लिए यह समझना दुर्लभ जान पड़ता कि दोनों के बीच विमर्श या बहस का विषय है क्या?

अक्सर जब आप किसी 'राष्ट्रीय समस्या' पर आपस में बहस को जुटते हैं तो विषय से इतर दो-चार बातें हो ही जाती हैं। बहस को प्रासंगिक बनाए रखना बहुत जरूरी है ताकि आस-पास के लोग भी इंटरेस्ट के साथ उसमें शरीक हो सकें।

यों भी, कूड़े पर लड़ाई या बहस हमारे देश की अनादि काल से राष्ट्रीय समस्या रही है। शायद ही ऐसा कोई शहर, घर, मोहल्ला, कॉलोनी, सोसाइटी हो जहां इस मुद्दे पर लोग आपस में लड़े-भिड़े न हों। बहुत से मामलों में तो बात थाना-कोतवाली, कोर्ट-कचहरी तक भी पहुंच चुकी है। तिस पर भी लोग अपने व्यवहार में अंतर न ला पाए हैं।

बात जहां तक आपस में भिड़ने की है तो हम कूड़े तो क्या भूलवश एक-दूसरे से टच हो जाने तक पर भिड़ लेते हैं। भिड़ना हमारी 'लड़ताऊ संस्कृति' का अहम हिस्सा-सा है। इसे हम कदापि नहीं त्याग सकते।

दूसरी तरफ सरकार के तमाम छोटे-बड़े मंत्री जी-जान से जुटे हैं कूड़े की समस्या के निस्तारण के लिए। आए दिन किसी न किसी अखबार में कोई न कोई मंत्री साफ-सुथरी झाड़ू पकड़े नजर आ ही जाता है, कूड़ा (गंदगी) साफ करते हुए। कई बार तो ऐसा भी हुआ है कि मंत्रीजी के जाने से पहले ही कथित जगह पर कूड़े को पहुंचा दिया जाता है। ताकि मंत्रीजी की कूड़े को झाड़ू मारते हुए फोटू टनाटन आ सके।

विपक्षी लोग इसे बेशक पब्लिसिटी का फण्डा मान सकते हैं किंतु है ये खालिस नेक काम है। नेक कामों के लिए पब्लिसिटी का दरवाजा हमेशा खुला रखना चाहिए।

देखिए, सुधरते-सुधरते ही हममें सुधार आ पाएगा। सुधार कोई जादुई छड़ी न होता कि घुमाई और असर चालू।

कूड़े पर झगड़े-टनटें शाश्वत हैं। ये कभी न कम होने। फिर भी, यह उम्मीद तो कायम है ही कि एक दिन कूड़े पर बाजी हम जीत ही लेंगे।

2 टिप्‍पणियां:

Ashutosh Dubey ने कहा…

accha vyang likha hai ,samaj ki samasya hi yahi hai . isme sudhaar ki jarurat hai .
हिन्दीकुंज,हिंदी वेबसाइट/लिटरेरी वेब पत्रिका

HARSHVARDHAN ने कहा…

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन 97वां जन्म दिवस - सितारा देवी - ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।