गुरुवार, 12 अक्तूबर 2017

किम कने 'हाइड्रोजन बम' है

नॉर्थ कोरिया का तानाशाह गजब का 'बमचक' बंदा है। चेहरे से जितना 'भोला-भाला' जान पड़ता है, दिमाग का उतना ही 'टेढ़ा'। किस बात का कब बुरा मान जाए, उसके फरिश्ते भी न जानते। लोग गुस्से को 'नाक' पर रखकर चलते हैं मगर वो 'हाइड्रोजन बम' पर रखता है। तुरंत हाइड्रोजन बम से उड़ाने का अल्टीमेटम दे डालता है। मानो- हाइड्रोजन बम फेंकना उसके लिए 'गेंद' फेंकने जितना 'सरल' हो!

फिलहाल तो उसने धमकियां दे-देकर ट्रंप चचा की नाक में नकेल डाल रखी है। जब मौका मिलता है, ट्रंप चचा को दो-चार भारी-भरकम धमकियां दे डालता है। उसकी हर धमकी में अमरिका को हाइड्रोजन बम से उड़ाने की ऐंठ काबिज रहती है।

उधर चचा ट्रंप तानाशाह की धमकी सुन-सुनकर दूध के माफिक 'उबाल' मारते रहते हैं। गुस्से में वे भी 'ऊंची धमकी' दे डालते हैं, समूचे नॉर्थ कोरिया को तबाह कर डालने की। दोनों तरफ से धमकियों का खेल फिलहाल अनवरत चल रहा है।

मैं तो यह सोच-सोचकर 'सदमे' में आ लिया हूं कि तानशाह की जनता और उसके घर-परिवार वाले उसे कैसे 'झेलते' होंगे? अगला जरा-जरा सी बात पर तो मारने-उड़ाने की धमकी दे डालता है। सुना है, एक बार उसने अपने मंत्री को महज झपकी लेने के जुर्म में भरी मीटिंग में गोली से उड़ा दिया था। एक हमारे यहां है, मंत्री या अफसर मीटिंग में चाहे सोये या फिल्म देखे कोई डांट-डपटी नहीं। इतना 'मनोरंजन' करने के बाद भी हमारे यहां के मंत्री-अफसर रात-दिन जनता की सेवा में जी-जान से जुटे रहते हैं!

तानाशाह के दिल में यह गम तो कहीं घर किए नहीं रहता कि 'हाइट' में खुद 'नाटा' होने के कारण वो अपने देश को भी अन्य शक्तिशाली देशों के मुकाबले 'नाटा' समझता हो! इसीलिए कभी इस देश तो कभी उस देश को हाइड्रोजन बम से उड़ाने का उलहाना दे डालता हो। मन के किसी कोने में यह सच तो उसके भी दबा पड़ा होगा कि अमरिका जैसे घोर शक्तिशाली मुल्क को खुल्ला ललकारना हंसी खेल नहीं। कभी भी लेने के देने पड़ सकते हैं। मगर तानाशाह की खोपड़ी तो तानाशाह ठहरी। कहां किसी से दबने वाली। अपने जमाने में हिटलर भी कहां किसी से दबा था।

धमकी चचा ट्रंप की भी सही है। इतना पावरफुल मुल्क काहे को पिद्दी भरे देश के तानाशाह के ताने सुनेगा। चचा ट्रंप अगर जरा-सी फूंक भी मार दें तो तानाशाह किम सीधा मंगल ग्रह पर चाय बनाता नजर आएगा। लेकिन अड़ियल किम माने तब न। उसने तो अमरिका पर हाइड्रोजन बम टपकाने की ठान रखी है। वो सपने भी रात-दिन हाइड्रोजन बम गिराने के ही देखा करता होगा।

ऐसे तानाशाह से तो न 'यारी' भली न 'दुश्मनी'। क्या भरोसा कब किस बात का बुरा मान जाए और धमकाने लगे- 'सुन बे, मेरे कने हाइड्रोजन बम है। उड़ाके रख दूंगा।'

1 टिप्पणी:

Udan Tashtari ने कहा…

गहरी चिकोटी