रविवार, 29 अक्तूबर 2017

33 हजार पार सेंसेक्स और विकास का चर्मोत्कर्ष

सेंसेक्स 33 हजार के पार निकल गया और आप कह रहे हैं कि विकास होता दिखाई नहीं दे रहा! निफ्टी 10 हजार के शिखर पर चढ़ इठला रही है और आप कह रहे हैं अच्छे दिन कहां आए हैं! वित्तमंत्री जी ने बैंकों को दो लाख करोड़ रुपये का बूस्टर दे दिया और आप कह रहे हैं कि अर्थव्यवस्था खड्डे में जा रही है! कितनी दकियानूसी सोच रखते हैं न आप!

कुछ मालूम भी है, सेंसेक्स का 33 हजार की चोटी पर पहुंचना विश्व भर में हमारे देश की अर्थव्यवस्था की नाक ऊंची कर गया है। दुनिया को अब हमारी अर्थव्यवस्था का लोहा मानने के लिए मजबूर होना ही पड़ेगा। स्टॉक मार्केट की सेहत जिस तेजी से दिन-ब-दिन सुधर रही है इसमें आर्थिक सुधारों की बहुत बड़ी भूमिका है।
सेंसेक्स ने हमें सिरमौर बना दिया है।

मेरा माथा तो सेंसेक्स की सफलता को देखकर गर्व से ऊंचा हो उठा है। कथित मंदड़ियों को सेंसेक्स ने एक ही झटके में पानी पिला डाला है। बड़ा कमजोर कह-कहकर सेंसेक्स का हर समय मजाक उड़ाया करते थे मगर क्या खूबसूरत खामोशी के साथ उसने उन्हें प्रति-उत्तर दिया है।

चाहे कोई माने या न माने पर देश में चमत्कारी विकास तो सेंसेक्स ही लेकर आया है। अपने पिछले सभी दुख-दर्दों को परे रखकर सेंसेक्स ने जिस बहादुरी के साथ खुद को स्टेबलिश किया है, वाकई काबिले-तारीफ है। वरना इतनी गर्त में चले जाने के बाद पुनः उठ खड़े होने में अच्छों-अच्छों के टांके ढीले पड़ जाते है। किंतु अपने सेंसेक्स ने हार न मानी। इसीलिए तो कहते हैं- कर्म किए जाओ फल की चिंता करे बिना।

जनता हूं प्रिये सेंसेक्स की आतिशी सफलता से सबसे ज्यादा दर्द विपक्ष के पेट में ही हो रहा होगा। मन ही मन उसे कोसे जा रहे होंगे। सेंसेक्स की कामयाबी पर उसे बधाई देना तो दूर रहा- कह रहे होंगे, सेंसेक्स ने 33 हजार का स्तर पार कर पूंजीपतियों को ही खुश किया है। ये भी कोई बात हुई भला! सेंसेक्स हमारा है। हमारे देश की अर्थव्यवस्था का प्रमुख टूल है। उसकी जीत को यों इग्नोर करना ठीक बात नहीं।

विपक्ष का बात-बेबात विकास को गरियाना भी कुछ जंचता नहीं। विकास चाहे सेंसेक्स के रास्ते हो या ताजमहल के विकास होना चाहिए। देश-दुनिया में अर्थव्यवस्था का मान बढ़ना चाहिए। यों भी, सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है तो विकास कायम करने में। कर भी रही है।

सौ बात की एक बात तो यह है कि हर समय रोते रहने से कुछ मिलने-मिलाने वाला नहीं। रो-रोकर अपनी आंखें दुखाने से क्या फायदा?

सेंसेक्स ने फिलहाल मस्त गति पकड़ी हुई है। ऐसे ही अगर चलता रहा तो एक दिन 50 हजार के पार भी निकल लेगा। अभी तो चमक ही रहा है तब और अधिक चमका देगा देश की एकोमोमिक्स को।

चिंता बस थोड़ी-सी यही लगी रहती है- सेंसेक्स की कामयाबी को किसी की नजर न लगे।

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