गुरुवार, 28 सितंबर 2017

खरीदो-खरीदो कि ऑनलाइन मार्केट में सेल लगी है

श्राद्ध निपटते ही सेल ने दरवाजे पर दस्तक दे दी है। खरीद-बेच का दौर शुरू हो गया है। ऑफलाइन से अधिक ऑनलाइन मार्केट हमें लुभाने में लगा है। ऑनलाइन मार्केट की सेल में किस्म-किस्म के ऑफर्स हैं। डिस्काउंट्स हैं। जीरो ईएमआई के सुनहरे वादे हैं। सारा जोर इस बात पर टिका है कि कस्टमर खरीदे। खूब खरीदे। बाहर मार्केट में जाकर नहीं सिर्फ ऑनलाइन खरीदे। ऑनलाइन खरीद में बाहर के धक्के खाने की संभावना न के बराबर रहती है। ऐसा ऑनलाइन परचेजिंग के प्रेमी यदा-कदा बताते रहे हैं।

ऑनलाइन सेल हमारे लिए 'कंफर्ट जोन' की तरह है। न भीड़ में आना न जाना। न एक दुकान से दूसरी दुकान का चक्कर काटना। बस घर बैठे अपने मोबाइल फोन की टच-स्क्रीन पर उंगुलियां ही तो चलानी हैं। ऑनलाइन मार्केटिंग में सारा गेम उंगुलियों का रहता है। जो जितना अधिक उंगुलियां चलाएगा, वो उतना ही बेहतर माल पा लेगा। उंगुलियों का निरंतर प्रेशर झेलते-झेलते एक बार को मोबाइल की टच-स्क्रीन जरूर झल्ला जाती होगी मगर उंगुलियां फिराना हम तब भी बंद नहीं करते।

मूलतः हम सेल, डिस्काउंट और ऑफर्स पसंद सोसाइटी हैं। ऐसा कोई मौका अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहते जहां हैवी डिस्कांउट की सेल न लगी हो। एक बार को घर की ईएमआई चुकाने में आना-कानी कर सकते हैं पर सेल से डिस्काउंट का लाभ उठाने का मौका नहीं गंवा सकते। मार्केट का पहला ऊसूल भी तो यही है कि कस्टमर को खरीदने के लिए मजबूर करो ताकि उसके भीतर परचेजिंग पावर की लौ हमेशा जलती रहे।

फेस्टिवल बेशक हमारे लिए उत्सव हैं। मगर बिना ऑनलाइन सेल का लाभ उठाए हर उत्सव फीका है। कोई बात नहीं अगर आपकी जेब खाली है। एकमुश्त चुकाने को रकम नहीं है। तो ईएमआई का फायदा उठाएं न। मार्केट के पास आपकी हर समस्या का तोड़ है। आप पहल तो करें शिरिमानजी।

ऑनलाइन सेल में मिले रहे ऑफर्स को हथिया लें। मौके पे चौक्का मारने में ही होशियारी है। मार्केट में लंबे समय तक टिक वही रह पाएगा, जो ज्यादा से ज्यादा खुद को बेच लेगा। मार्केट का यही शाश्वत सेंस है।

3 टिप्‍पणियां:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

बढ़िया।

विकास नैनवाल ने कहा…

सही व्यंग। खरीद फरोख्त का जमाना है। जितना बेचेगा उतना ऊपर तक जाएगा।

anshumala ने कहा…

हमें आज तक भरोसा ही न हुआ ऑनलाइन पर |