सोमवार, 8 मई 2017

थोड़ी सी जो पी ली है

हालांकि चीते को पीते कभी देखा तो नहीं मगर एक ऐड में दिखाया गया था कि चीता भी पीता है। यों, पीने पर किसी के ‘रोक-टोक’ नहीं। इंसान हो या जानवर कभी भी, कहीं भी, कैसे भी पी सकता है। बहुत से तो पीने को अपना ‘लोकतांत्रिक अधिकार’ मानते हैं। हां, यह बात अलग है कि पीने के बाद वे खुद ‘होश’ में नहीं रहते। लेकिन पीना जरूरी है। ऐसी उनकी ‘दिली-मान्यता’ है।

ऐसा सुना है, इंसान या तो दर्द गलत करने या फिर खुशी को सेलिब्रेट करने के लिए पीता है। उसकी तासीर ही कुछ ऐसी है कि हलक से नीचे जाते है पूरी दुनिया रंगीन टाइप नजर आने लगती है। चलो, इंसान की पीने-पिलाने की दिलचस्पी तो समझ आती है लेकिन चूहों को उस रंगीन पानी में ऐसा क्या खासा नजर आया जो- बिना हिचकी लिए- पूरी नौ लाख लीटर अकेले ही गटक गए। क्या इंसान के साथ-साथ चूहे भी मदिरा-प्रेमी हैं? हां, हो भी सकते हैं। दुनिया में किसी इंसान या जानवर का कोई भरोसा नहीं कब किस तरह का शौक पाल ले। शौक बड़ी चीज है।

वैसे, वैज्ञानिकों के लिए चूहों का इतनी मात्रा में शराब गटकना बड़ा शोध का विषय बन सकता है। पीने के बाद उनका व्यवहार खुद के या अपने साथियों के प्रति कैसा रहा? पीने के बाद वे कितना लुढ़के, कितना संभले, किस टाइप की शायरी उनके मुंह से निकली? हां, कौन सा वाला ब्रांड उन्हें सबसे ज्यादा पसंद आया।

पीने के मामले में अब कोई यह नहीं कह सकता कि चूहे इंसानों से कमतर हैं। इस नाते शराब की डिमांड देश में और अधिक बढ़ जानी चाहिए। फिर भी, पता नहीं क्यों कुछ राज्य शराब-बंदी पर इतना जोर दे रहे हैं। गम को गलत करने का इससे बेहतर साधन कोई नहीं हो सकता। यह बात बिहार के चूहों ने साबित भी कर दी है।

अब तो उस दिन का इंतजार है मुझे जब इंसान और चूहे साथ बैठकर जाम छलकाएंगे। क्या उम्दा जुगलबंदी होगी दोनों के बीच। कभी इंसान चूहे को तो कभी चूहा इंसान को पैग बनाकर देगा। बीच-बीच में दोनों के बीच थोड़ी-बहुत तू तू मैं मैं भी हो जाया करेगी।

पीने की इतनी सामर्थ्य चूहों में होगी किसी से सोचा भी न था। फिर भी, चूहों ने नौ लाख लीटर शराब गटक कर ठीक ही किया। शराब के बेकार चले जाने से तो बेहतर यही रहा कि किसी के काम ही आ गई। भले ही चूहों के आई। भलाई में किसी की क्या जाता है।

मगर चूहों के पीने पर हंगामा खड़ा होना गलत है। उनके जरा से पेट में थोड़ी सी ही तो गई होगी। थोड़ी सी पी लेने में क्या जाता है। शौक बड़ी चीज है। बना रहना चाहिए। बाकी कहने वाले तो जाने क्या-क्या कहते रहते हैं।

1 टिप्पणी:

राजा कुमारेन्द्र सिंह सेंगर ने कहा…

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन ’ओ बुद्ध! एक बार फिर मुस्कुराओ : ब्लॉग बुलेटिन’ में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...