गुरुवार, 9 मार्च 2017

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नागिन डांस

आजकल ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ हर किसी की खूब जोर मार रही है। सोशल मीडिया पर तो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर ‘नागिन डांस’ टाइप ही चल रहा है। जिसे देखो वो अपने गले में तख्ती लटकाए झूमे पड़ा है, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के गाने पर। स्टेप कहीं के कहीं पड़ रहे हैं तब भी मन में जिद्द है, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नागिन डांस पर थिरके ही मानेंगे। चूंकि मुझे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर नागिन डांस करना नहीं आता इसीलिए मैं दूर खड़ा सबको नाचते देखने का आनंद ले रहा हूं। इसी में मेरी भलाई भी है।

कमाल देखिए, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर नागिन डांस करने वे लोग भी कूद पड़े हैं, जिन्हें अब तलक मैंने अपनी पत्नियों के आगे ही ‘फैमली डांस’ करते देखा-पाया है। पत्नियों के आगे ‘भीगी बिल्ली’ बने रहने वाले वीर पुरुष हमें सीख दे रहे हैं कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को हर हाल में बचाना ही होगा। जबकि घर में ये लोग अपनी पत्नी के बेलन से खुद के सिरों न बचा पाते हों पर सोशल मीडिया पर लेक्चर यों दे रहे हैं मानो- अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के एकमात्र ठेकेदार ये ही हों।

इत्ते लोगों को एक साथ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर नागिन डांस करते देख मन ही मन थोड़ा घबरा भी जाता हूं। घबरा कर दिमाग पर लोड लेने लग जाता हूं कि देश-समाज में ऐसी क्या ‘अनहोनी घटनाएं’ घट गईं जो कथित क्रांतिवीर यहां-वहां गुस्साए-गुस्साए घुम रहे हैं। ऐसा भयानक प्रचार कर रहे हैं मानो देश-समाज में हर किसी की जुबान पर ताले ठोक दिए गए हों। कोई विकट विपत्ति टाइप आन खड़ी हो। विपत्ति से निपटने की खातिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर अंड-वंड-शंड नागिन डांस किए जा रहे हैं। अगर नागिन डांस करने का इत्ता ही शौक है तो अपने मोहल्ले या रिश्तेदारों की शादियों में क्यों नहीं करते? वहां ऐसे बूत बने खड़े हो जाते हैं जैसे डांस के मामले में कतई ‘लल्ला’ हों।

एकाध दफा सोशल मीडिया पर मुझसे भी कहा गया कि मैं भी उनके साथ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता वाले नागिन डांस में शामिल हो जाऊं। मगर मैंने यह कहते हुए मना कर दिया- मुझे जित्ता डांस करना होता है अपनी पत्नी के आगे कर लेता हूं। फिर यहां-वहां डांस करने की मुझसे ‘हिम्मत’ ही नहीं बचती। मेरी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पत्नी से शुरू होकर पत्नी पर ही खत्म हो जाती है। फिर भला मैं क्यों दूसरों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लफड़े में पड़ूं? अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को आप संभालें।

सच बातऊं तो देश-समाज के बीच अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर खतरा-वतरा कुछ है नहीं। ये सब सोशल मीडिया पर बैठे चंद ठलुए प्रगतिशीलों के बनाए शोशे हैं, जिन्हें वे अपनी सुविधाओं या कुंठाओं की खातिर उछाले पड़े हैं। जरा ठंडे दिमाग से सोचकर देखिए, अभिव्यक्ति की जित्ती स्वतंत्रता हमारे देश में है उत्ती कहीं और है क्या?

खैर, मुझे क्या। मुझे तो उनका नागिन डांस देखने में फुल-टू आनंद आ रहा है। मैं चाहता भी यही हूं कि वे सोशल मीडिया पर यों ही नाच-नाचकर हम सब का ‘मनोरंजन’ करते रहें।

2 टिप्‍पणियां:

ब्लॉग बुलेटिन ने कहा…

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, "जैसी करनी ... वैसी भरनी - ब्लॉग बुलेटिन “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

Kavita Rawat ने कहा…

सच बातऊं तो देश-समाज के बीच अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर खतरा-वतरा कुछ है नहीं। ये सब सोशल मीडिया पर बैठे चंद ठलुए प्रगतिशीलों के बनाए शोशे हैं, जिन्हें वे अपनी सुविधाओं या कुंठाओं की खातिर उछाले पड़े हैं। जरा ठंडे दिमाग से सोचकर देखिए, अभिव्यक्ति की जित्ती स्वतंत्रता हमारे देश में है उत्ती कहीं और है क्या?