बुधवार, 22 मार्च 2017

क्योंकि हर एक रोमियो लफंगा नहीं होता

न केवल मेरे मोहल्ले बल्कि समूचे उत्तर प्रदेश के रोमियों पर ‘विकट संकट’ आन खड़ा हुआ है। एंटी रोमियो स्कावॉयड बन जाने से उनकी इज्जत पर ‘तगड़ा हमला’ हुआ है। बेचारे अब न खुलकर लड़कियों के स्कूल-कॉलेजों के आसपास टहलकदमी कर सकते हैं न अपनी महबूबा को बाइक पर बैठा कोचिंग छोड़ने जा सकते हैं। यहां तक कि लौंडेनुमा लड़कों को अपनी शर्ट का बटन बंद करके और हेयर स्टाइल को करीने से रखना होगा। नहीं तो कोई भी पुलिस वाला उन्हें पकड़कर बीच सड़क मुर्गा बनाने में कतई गुरेज नहीं करेगा।

रोड साइड रोमियों के प्रति इतने सख्त कानून से मैं बेहद खफा और आहत हूं। तमाम रोमियों के दिलों पर क्या और कैसी गुजर रही होगी बहुत अच्छे से समझ सकता हूं। क्योंकि मैं स्वयं अपने स्कूल-कॉलेज के दिनों में रोमियो रहा हूं। शादी हो जाने के बाद से अब अपनी पत्नी का रोमियो हूं। रोमियोगीरी की जो आवारा टाइप भावनाएं मन में होती है, उन्हें मैंने अभी भी नहीं छोड़ा है। लेकिन हालिया स्थिति को देख-जानकर मुझे अपनी रोमियोगीरी पर पुनः विचार करना पड़ सकता है।

ऐसा सरकार या आम लोगों का सोचना है कि रोमियो सड़कछाप मजनू या लफंगे होते हैं। आती-जाती लड़कियों को छेड़ते या फब्तियां कसते हैं। हां, उनमें से कुछ ऐसी ‘लंफगताऊ प्रवृति’ के हो सकते हैं (इससे इंकार नहीं करता) किंतु एक ही हल से सारे रोमियों को हांक देना भी ठीक नहीं।

मुझे ही देख लीजिए। मेरे जैसे संवेदनशील एवं शालीन रोमियों बहुत कम मिलेंगे। मैं अपनी रोमियोगीरी के प्रति बचपन से ही समर्पित रहा हूं। पड़ोसियों की जली-कटी को सुनने से लेकर पुलिसिया डंडा खाने के बाद भी मैंने रोमियोपंती नहीं छोड़ी। बैठे-ठाले पत्नी भी अक्सर कह देती है कि मैंने इतने टाइप के रोमियो देखे मगर तुम्हारी बात ही कुछ और है।

वही कि ‘एक मछली सारे तलाब को गंदा कर देती है’ की तर्ज पर सारे रोमियो को एक जैसा ही मान लिया गया है। जबकि यह रोमियो बिरादरी पर ज्यादती टाइप है। क्योंकि हर एक रोमियो लफंगा नहीं होता।


मेरी उत्तर प्रदेश सरकार से विनम्र गुजारिश है कि वो एंटी रोमियो स्कावॉयड के बारे में पुर्नविचार करे। लफंगे रोमियो पर बेशक सख्त रहे मगर हम जैसे संवेदनशील रोमियो को बख्शे। इतने जुल्म न ढहाए।

1 टिप्पणी:

Dr. Arvindanabha Shukla ने कहा…

बढ़िया है| इससे मिलते जुलते विषय पर एक लेख मेरे ब्लॉग पर भी काफी पहले प्रकाशित हुआ था| url de रहा हूँ - http://arvindanabha.blogspot.in/2015/08/blog-post_26.html आप ब्लॉग पर पधारेंगें तो अच्छा लगेगा|
आपका,
अरविन्दनाभ शुक्ल