रविवार, 5 मार्च 2017

मार्केटिंग का फंडा

उस रोज मेरे मोबाइल पर एक कॉल आई। कॉल चूंकि अनजान नंबर से थी, सो मैंने रिसिव नहीं की। दस मिनट बाद उसी नंबर से पुनः कॉल आई। मैंने यह सोचकर रिसिव कर ली कि शायद किसी अखबार के संपादक का फोन रहा, मुझसे कुछ लिखवा हो।

कॉल रिसिव करते ही, उधर से बंदा बोलता है। सर, ‘मैं फलां मार्केटिंग कंपनी का सेल्स-मैनेजर बोल रहा हूं। क्या आपके दो मिनट ले सकता हूं?’ उस वक्त मैं भी थोड़ा खाली था, तो कह दिया, ‘दो क्या दो घंटे ले ले। लोग फोन पर गर्लफ्रैंड से दो घंटे बात करने में जाया कर देते हैं, तुम मेरे दो मिनट लेके कौन-सा खुद या मुझ पर एहसास कर दोगे?’

बंदा फोन पर तुरंत सवाल दागता है- ‘सर, आप टूथपेस्ट कौन-सा यूज करते हो?’ मैंने बता दिया। फिर उसने पूछा- ‘सर, आप बाथसोप कौन-सा यूज करते हो?’ यह भी बता दिया। फिर पूछा- ‘सर, आप टी किस कंपनी की लेते हो?’ यह भी बता डाला। फिर पूछता है, ‘सर- आपका रंग काला है या गोरा?’ अब तो मेरे माथे की सटक ली। मैंने कर्रा होकर उसे डंटा- ‘क्या बे, मेरे रंग से तुम्हारा क्या लेना-देना?’ वो बोला, ‘सर, किरपिया, बुरा न मानें, हमें अपने कस्टमर्स से ऐसा पूछना पड़ता है। प्लीज बताएं।‘ मैंने खुद को हल्का करते हुए कहा- ‘न ज्यादा काला, न ज्यादा गोरा। सामान्य।‘ उसने थैंक्स कहते हुए बोलना जारी रखा।

‘सर, हमारी कंपनी जेनटस के ‘ब्यूटी-प्रॉडेक्टस’ बनाती है। खासकर, फेस-क्रीम। कोले को गोरा कर देती है। नॉमर्ल क्लर वालों को नेचुरल क्लर में ले आती है। मैंने कहा- ‘अच्छा। लेकिन यार मुझे तो किसी फेस-क्रीम की रिकॉयरमेंट नहीं। मैं मेरे सामान्य क्लर से साथ खुश हूं।‘ मुझे बीच में टोकते हुए मार्केटिंग मैनेजर बोला- ‘नहीं सर, ऐसा न कहें कि फेस-क्रीम की जरूरत नहीं। फेस का गुड-लुकिंग होना समय की डिमांड है। सुंदर लगने-दिखने का क्रेज आजकल जेनटस में भी लेडिज के मुकाबले अधिक बढ़ गया है। आप एक बार हमारी कंपनी की फेस-क्रीम यूज करके तो देखें। न केवल भाभीजी बल्कि आपके आस-पास की लेडिज भी आप पर ‘क्रश’ करने लेगेंगी। गारंटी हमारी है।‘

बंदा अपने मार्केटिंग स्टाइल से मुझे लगातार रिझाए चला जा रहा था। अब मेरा मन भी धीरे-धीरे कर उसके ब्यूटी-प्रॉडेक्ट की तरफ खींच-सा रहा था। खासकर, उसकी क्रश वाली बात को सुनकर। अगर फेस-क्रीम लगाने से ऐसा हो जाता है तो क्या दिक्कत है थोड़ा-बहुत फ्लर्ट कर लेने में। लाइफ में थोड़ा चेंज तो मांगता है न। मैंने भी बंदे से कह ही दिया- ‘मैं तुम्हारा प्रॉडेक्ट खरीदने को एर्गी हूं, शर्त केवल इत्ती है पैसा फेस पर चेंज दिख लेने के बाद ही मिलेगा।‘ इत्ता सुन मार्केटिंग मैनेजर राजी भी हो गया। तुरंत बोला- ‘सर, पैसा देने की टेंशन न लें। आप हमारे प्रॉडेक्ट को यूज करें बस। खुद भी यूज करें और अपने फ्रैंड्स को भी यूज करवाएं। अगर आप अपने दो-चार फ्रैंड्स को हमारा प्रॉडेक्ट खरीदवा देते हैं तो हम इसे आपके लिए बिल्कुल ‘फ्री’ कर देंगे। बल्कि अपना मैंबर भी बना लेंगे। मतलब- हींग लगे न फिटकरी रंग चोखा।‘

इत्ता सुन मन ही मन लड्डू टाइप फूटने लगे। यह धंधा बढ़िया है। खुद मुफ्त में यूज करो, दूसरों से पैसा लो। वाह! मार्केटिंग के टेक्ट्स भी निराले हैं प्यारे। लेखन से कहीं बढ़िया तो मार्केटिंग का धंधा है। शुरू की थोड़ी मेहनत लाइफ बना डालती है। आजकल जमाना ही प्योर सेल्स का। आपमें बेचने का हुजूर होना चाहिए फिर तो कुछ भी बेच डालो।

फिलहाल, ‘फेस-क्रीम’ मंगवा ली है। खुद पर यूज बाद में करूंगा पहले अपने दोस्तों को बेच पैसा सीधा कर लूं। यू नो, सिंपल मार्केटिंग!

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