बुधवार, 15 फ़रवरी 2017

टि्वटर के बाबा लोग

टि्वटर पर बाबाओं की धूम है। ये बाबा धरती पर पाए जाने वाले भगवा-धारी बाबाओं से भिन्न होते हैं। ज्यादातर बाबा ‘ट्रौलर्स’ हैं पर हैं ‘मजेदार’। उनके ट्वीटस पढ़कर तबीयत हरी हो जाती हैं। विषय चाहे राजनीति का हो या कोई और बाबा किसी को नहीं बख्शते। टि्वटर पर सबसे उम्दा वनलाइन बाबाओं की तरफ से ही आते हैं।

एक व्यंग्य को लिखने में जहां हम 400 से 500 शब्द खरचा कर देते हैं टि्वटर के बाबा मात्र 140 कैरेक्टर में ही समा बांध देते हैं। उनके 140 कैरेक्टर भारी-भरकम व्यंग्य पर भारी पड़ते हैं। बाबाओं ने ही हमें बताया कि व्यंग्य 140 कैरेक्टर में भी खींचा जा सकता है। बस आपका ‘विट’ स्ट्रांग होना चाहिए। क्या समझे...।

इस वक्त सबसे बढ़िया व्यंग्य टि्वटर पर ही लिखा जा रहा है। न विषय की सीमाएं। न अधिक शब्दों का झंझट। न इस-उस की रोक-टोक। न भाषाई हदबंदियां। मात्र 140 कैरेक्टर हैं आपके पास। इसी दायरे के बीच आपको धांसू-सा वनलाइनर (व्यंग्य) खींचना है। टि्वटर के बाबा लोग यह काम बहुत प्रोफेशनल तरीके से कर रहे हैं। कम शब्दों में बात को कहने का हुनूर तो कोई टि्वटर के बाबाओं से सीखे।

जोकबाजी और वनलाइनर के लिए टि्वटर सबसे मस्त जगह है। फेसबुक पर कब्जा जमाए बैठे किस्म-किस्म की विचारधाराओं के बुद्धिजीवि तो यहां कहीं नहीं ठहरते। न वे ज्यादा टि्वटर पर आते हैं, न ट्रौलर-बाबाओं से सीधा पंगा ही लेते हैं। उन्हें यह अच्छे से मालूम है, बाबा लोग ट्रौल करने में माहिर होते हैं। ट्रौलर्स से तो सेलिब्रिटी लोग भी हट-बचकर रहते हैं।

टि्वटर पर मौजूद बाबाओं की खास बात यह है कि वे न किसी खास (अपवादों को छोड़कर) राजनीतिक दल के समर्थक हैं, न विचारधाराओं के गुलाम। एकदम स्वतंत्र। खुल्ला होकर अपने ट्वीट करते हैं। अच्छा लगे तो रि-ट्वीट कर दीजिए वरना मन ही मन कुढ़ते रहिए। उनकी सेहत पर कोई फरक न पड़ना। दीन-दुनिया से बेखबर अपनी ही मस्तियों में मस्त रहते हैं टि्वटर के बाबा लोग।

टि्वटर पर बाबा लोगों की पूरी फौज है। फौज मौज लेने का कोई मौका नहीं छोड़ती। या तो ये बाबा लोग आपस में ही ट्रौलिंग करते हैं या फिर वनलाइनर जोक चिपकाते रहते हैं। अजीबो-गरीब नाम के बाबा लोग मिलेंगे यहां। मसलम- अदृश्य बाबा, गंजेड़ी बाबा, धाकड़ बाबा, चिलम बाबा, बलिया वाले बाबा, ट्रौल बाबा, बावला बाबा, डॉलर वाले बाबा, लड्डू वाले बाबा, रिउड बाबा, बाबा उल्टानंद, बुलट बाबा, नीम-हकीम बाबा, लुटेरा बाबा आदि-आदि। एक तरह से टि्वटर के हर कोने में कोई न कोई बाबा घुसा बैठा है।

जिन भाषावादियों को भाषा की चिंता हर वक्त परेशान किए रहती है, उन्हें जरूर बाबा लोगों के ट्वीट की भाषा रास न आए फिर भी टि्वटर पर उनके ‘फॉलोअर्स’ की संख्या गजब है। यों भी, उनका उद्देश्य लोगों का मनोरंजन करना है, भाषा-सुधार का ठेका लेना नहीं। सोशल मीडिया में तो ऐसी भाषा चलती है। एकदम आम और फ्री टाइप। मानसिक तृप्ति भी अब इसी भाषा में मिलती है।

भाषाई गरिमा या किन्हीं आदर्शों को परे रख कभी टि्वटर के बाबा लोगों की दुनिया के बीच जाकर देखिए अगर आनंद न आए तो वापस अपनी दुनिया में लौट आइएगा। वनलाइनर ट्वीट का असली लुत्फ तो यहीं है प्यारे।

कोई टिप्पणी नहीं: