गुरुवार, 26 जनवरी 2017

गणतंत्र दिवस बनाम सेल दिवस

गणतंत्र दिवस पर हम शहीदों को तो याद करते ही हैं। साथ-साथ इस दिन लगने वाली ‘सेल’ का फायदा उठाना भी हम नहीं भूलते। अब गणतंत्र और सेल एक-दूसरे के पूरक टाइप बन गए हैं। जब भी गणतंत्र दिवस आने को होता है, अखबारों के पहले पन्ने सेल-डिस्काउंट-ऑफर्स के विज्ञापनों से भर जाते हैं। ग्राहकों को ऐसे-ऐसे ऑफर्स दिए जाते हैं, एक बार को तो वो भूल ही जाता है कि आज ‘गणतंत्र दिवस’ है या ‘सेल दिवस’!

एक गणतंत्र दिवस ही नहीं लगभग सारे दिवसों का यही हाल है। बाजार हर दिवस को भुनाना जानता है। आप चाहें या न चाहें दिवसों पर ऑफर्स या सेल की लॉलीपॉप आपको मिलनी ही मिलनी है। विडंबना देखिए, बच्चों को भी अब गणतंत्र दिवस कम, किस्म-किस्म के ऑफर्स ज्यादा ध्यान रहते हैं। ऑन-लाइन बाजार ने सबको अपना दीवाना बना दिया है। खरीददारी के लिए आपको यहां-वहां बाजार में धक्के खाने की जरूरत नहीं, अब बाजार आपके फोन की टच-स्क्रीन पर खुद-ब-खुद हाजिर है। न मोल-भाव, न हील-हुज्जत सस्ते पर सस्ते की लूट मची है।

मैंने बहुतों को देखा है कि वे 26 जनवरी का इंतजार अपने गणतंत्र को शान से मनाने के लिए नहीं बल्कि इस दिन मिलने वाले ऑफर्स का लाभ उठाने के लिए करते हैं। सेल के लिए यों पगलाए रहते हैं मानो आज के बाद लाइफ में यह कभी मिलेगी ही नहीं। छुट्टी और ऑन-लाइन परचेचिंग ही उनकी प्राथमिकता में रहती है।

ऑन-लाइन स्टोर्स की देखा-दाखी यही हाल अब हमारे शहरों के बाजारों का हो गया है। वे भी अब गणतंत्र दिवस वाले दिन तैयार रहते हैं अपनी सेल और ऑफर्स से ग्राहकों को पटाने के लिए। गणतंत्र दिवस पर हर कोई बेचने और डिस्काउंट का लाभ उठाने में ही लगा रहता है। मुझे नहीं लगता कि शायद कोई भी इस दिन किसी महान क्रांतिकारी या शहीद की फोटो भी खरीदता होगा। विडंबना देखिए, इसका ध्यान न ऑन-लाइन स्टोर्स रखते हैं न आम बाजार वाले। ऑफर्स और सेल की दीवानगी या तो मोबाइल फोन में दिखाती या फिर कपड़ों-लत्तों में।

गणतंत्र... कैसा गणतंत्र, कहां का गणतंत्र? गणतंत्र के मायने अब बाजार और वहां मिलने वाले किस्म-किस्म के ऑफर्स हैं। गणतंत्र दिवस एक दिन की रस्म-अदायगी है जो छुट्टी और डिस्कांउट का लाभ उठाकर मना ली जाती है।

लोग भी कैसे-कैसे अहमक हैं, अपने परिचितों को फलां-फलां ऑन-लाइन स्टोर्स पर लगी सेल या महा-सेल बताने के लिए तो फोन करेंगे किंतु बातचीत में एक बार भी गणतंत्र दिवस की एक-दूसरे को शुभकामनाएं नहीं देंगे। भला क्यों देने लगे शुभकामनाएं, उनके तईं सेल-ऑफर्स-डिस्काउंट अहम हैं या गणतंत्र दिवस। गणतंत्र दिवस तो सरकारों-नेताओं-स्कूलों के जिम्मे है, वे ही उसकी रस्मों को निभाएं। ऑन-लाइन सेल में तीन हजार की चीज उन्हें दो हजार में मिल गई, उनका तो हो गया गणतंत्र दिवस।

सारा खेल बाजार का है। बाजार हम पर इस कदर हावी हो चुका है कि वो अपने ऑफर्स की च्वाइस के अतिरिक्त हमें कुछ सोचने का मौका ही नहीं देता। उसके तईं चीज को बेचना महत्त्वपूर्ण है। फिर चाहे वो गणतंत्र दिवस हो या स्वतंत्रता दिवस या फिर कनागत ही क्यों न हो। हर कहीं वो खुद को बेचने की जुगाड़ सेट कर ही लेता है।

जहां सेल, वहां भीड़। हम अब इसी रास्ते पर चल रहे हैं। बाजार में खरीद-बेच की होड़ लगी है चाहे दिवस कोई-सा भी क्यों न हो।

तो प्यारे, गणतंत्र दिवस पर ज्यादा सेंटी-वेंटी होने की जरूरत नहीं। सीधा किसी ऑन-लाइन स्टोर की वेब साइट पर जाओ। वहां विकट सेल लगी है। अपने तईं कुछ खरीदो। छुट्टी का आनंद लो। शाम को किसी महंगे रेस्त्रां में डिनर एन्जॉय करो। बाकी गणतंत्र दिवस का क्या है, उसे तो हर साल ही आना है। लेकिन ऑफर्स का लाभ लेने में कहीं कोई ‘कोताही’ नहीं होनी चाहिए। समझे न...।

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