मंगलवार, 17 जनवरी 2017

साइकल, पार्टी, झंडा, बत्ती सब गया हाथ से

पॉलिटिक्स केवल ‘दांव-पेच’ का खेल है। दांव सही निशाने पर लग गया तो ‘जीत’, चूक गए तो ‘हार’। इन दांव-पेच में न सगे को बख्शा जाता है न पराए को। इत्ते खेल-तमाशे के बाद भी यहां इस बात की कोई गारंटी न रहती कि कौन नेता अपनी पार्टी में या बाहर कित्ते लंबे समय तक टिका रह पाएगा। लंबी रेस का घोड़ा यहां कोई नहीं होता। सत्ताएं राजी से नहीं, दांव-पेच से ही हासिल की जाती हैं।

ताजा-ताजा उदाहरण हमारे सामने है। कल तक पिताजी का पार्टी और साइकल दोनों पर एकाधिकार था, चुनाव आयोग के एक फैसले के बाद, पिताजी कने न पार्टी रही, न साइकल और न ही पुत्र। एक झटके में पुत्र ने पिताजी को साइकल से उतार पैदल कर डाला। हालांकि पिताजी का मान-सम्मान रखने के वास्ते पुत्र अब भी उन्हें ही आगे रखे हुए है। लेकिन प्यारे ये पॉलिटिक्स है पॉलिटिक्स... यहां परिवार से लेकर जनता तक सबकुछ साधने के लिए खुद को ‘मुलायम’ रखना ही पड़ता है।

फैसले से पिताजी खासा खफा हैं। भीतर ही भीतर भन्नाए हुए हैं। भन्नाहट में तीखा टाइप का एक बयान भी दे डाला है। मगर समस्या तो यही सबसे बड़ी है कि करें तो करें क्या...। जिस साइकल पर बैठ कभी उनकी तूती समूचे प्रदेश में बोला करती थी, आज वो गद्दी भी पराई हो ली है। यहां तक कि साइकल के पिछले लगे कैरियर तक पर अब उनका कोई हक न रहा। न झंडा अपना रहा, न लाल-नीली बत्ती। पिताजी अब केवल मार्गदर्शक की भूमिका में हैं।

एक न एक दिन तो यह होना ही था। सत्ता की चाबी जब ताकतवर के हाथों में आ जाती फिर वो वहां लगे हर ताले को आसानी खोल-बंद कर सकता है। यहां भी यही हुआ। पिताजी अपनी जिद पर डटे रहे। पुत्र ने तगड़ा दांव खेल एक झटके में बाजी पलट डाली। अमां, मिनट की छोड़िए पॉलिटिक्स में तो क्षणभर में समीकरण बदल जाते हैं। कल तक सारे विधायक, मंत्री, नेता पिताजी के खैरखा थे, आज पुत्र के हैं। इसे ही कहते हैं- उगते सूरज को सलाम।

पूरे ड्रामे का पटाक्षेप खासा दिलचस्प रहा। साइकल- पुत्र की सरपरती में- प्रदेश में कित्ती आगे तलक खींच पाएगी, देखेंगे ‘हम लोग’।

2 टिप्‍पणियां:

Kavita Rawat ने कहा…

कुछ दिन की बात है सब एक हो जाएंगे .....हाथी के दांत दिखने और खाने के और ..
अच्छी चिकोटी ...

राजा कुमारेन्द्र सिंह सेंगर ने कहा…

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन ’स्वतंत्र दृष्टिकोण वाले ओशो - ब्लॉग बुलेटिन’ में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...