सोमवार, 26 दिसंबर 2016

दिसंबर, रजाई और देश

इत्ती सर्दी में बाहर निकलने का दिल न किया तो सोचा क्यों न रजाई के भीतर समाके ही दिसंबर में देश के हालातों को देखा-परखा जाए। यों भी, देश-दुनिया-जहान को देखने या चिंता करने का जो ‘आनंद’ रजाई में है कहीं और नहीं। रजाई के भीतर से सबकुछ अपना-अपना-सा लगता है।

यों तो दिसंबर में देश में बहुत कुछ घटा किंतु सब पर ‘हावी’ नोटबंदी ही रही। नोटबंदी के नशे ने हर खबर का भूत सिर से यों उतार दिया जैसे- ‘राम तेरी गंगा मैली हो गई’ में मंदाकनी ने अपने कपड़े उतारे थे। हालांकि तब से अब तब समय की रेत पर से बहुत कुछ मिट चुका है, पर क्या कीजिएगा, इतिहास में एक दफा जो दर्ज हो जाता है फिर हो ही जाता है।

चलिए... खैर...।

दिसंबर में देश को करीना-सैफ से एक नया नन्हा मेहमान मिला। मगर नन्हें मेहमान के दुनिया में आते ही उसके ‘नाम’ पर ऐसी जूतम-पैजार मची, ऐसी जूतम-पैजार मची कि सारा का सारा सोशल मीडिया ही इस बहस में कूद लिया। कुछ उसके नाम के समर्थन में खड़े दिखे तो कुछ विरोध में। हर किसी ने बारी-बारी से अपनी ‘कथित विद्वता’ का प्रदर्शन फेसबुक-टि्वटर पर किया। कुछ आलोचक तो इत्ते ‘वीर’ निकले कि उन्होंने उस बेचारे नन्हे मेहमान के समूचे खानदान को ही ‘गलिया’ डाला। क्या कीजिएगा, सोशल मीडिया पर न किसी का हाथ पकड़ सकें हैं न जुबान रोक सकें। ‘कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना...।‘

केवल नाम पर इत्ता दिमाग खरच करने से कहीं बेहतर होता कि वे लाइन में खड़े लोगों की मदद के लिए कुछ सार्थक करते।

दिसंबर में देश में आमिर खान की बहुचर्चित ‘दंगल’ भी रिलीज हो ली। फिल्म तो अपनी रिलीज से पहले ही अच्छी-खासी ‘चर्चे’ पा चुकी थी। फिल्म के बारे में अब तलक जो भी सुनाई या पढ़ाई में आया, लगभग सभी ने इसकी ‘तारीफ’ ठोकी है। अपना तो हमेशा से मानना रहा है कि हर अच्छी चीज की तारीफ होनी चाहिए। फिर भी, जिन्हें ‘दंगल’ की कामयाबी या तारीफ पर एतराज है, वे लंबी तानकर सोएं। बाहर ठंड बहुत है।

दिसंबर में देश में यहां-वहां से पकड़े गए गुलाबी नोटों की रंगत भी खूब तारी रही। नजरें जहां-जहां दौड़ीं गुलाबी नोटों की रंगत देखकर आंखे चौंधियां गईं। बताइए, हमारे देश के कथित अमीरों कने कित्ता नोट है। इत्ता कमाने के बाद भी नोट के प्रति उनकी भूख कम नहीं होती। किसी ने गुलाबी नोटों को अपने गुसलखाने में छिपाकर रखा तो किसी ने तहखाने में दबाकर। क्या चाय वाला, क्या भिखारी, क्या रद्दी वाला तक करोड़ों-करोड़ों के मालिक निकले। और एक मैं हूं। इत्ते सालों से कलम घिसाई कर रहा हूं फिर भी हाथ-पल्ले ‘घंटा’ कुछ नहीं आता। ऊपर से दिमाग का दही होता है सो अलग। हालांकि वे सब बदनाम जरूर हुए पर नाम भी तो खूब हुआ न। तिस पर भी लोग कहते हैं कि भारत गरीब मुल्क है। अमां, अपना देश तो अब भी ‘सोने की चिड़िया’ ही है। लेकिन चंद लोगों ने इस चिड़िया को अपने जाल में कैद कर रखा है।

दिसंबर में देश में राजनीतिक और नेताओं के बीच उठक-पठक और तू-तू, मैं-मैं भी खूब हुई। पर उस सब का जिक्र यहां करने बैठूंगा तो यह ‘व्यंग्य’ पूरा ‘उपन्यास’ बन लेगा। यों, राजनीति में हलचल 24x7 होती रहती है। इसमें क्या खोपड़ी खपाना।

दिसंबर का अंत करीब आते-आते एक अच्छी खबर मशहूर लेखिका नासिरा शर्मा को साहित्य अकादमी पुरस्कार मिलने की आई। नासिराजी को बधाईयां रहेंगी। उन्होंने जो भी लिखा कमाल लिखा। हां, कुछ साहित्यिक टाइप सयानों ने उनमें भी हिंदू-मुसलिम होने की दरार खोज ली। उन पर ‘मुसलिम लेखिका’ होने का तमगा जड़ दिया। लेखिका इससे आहत भी हुईं जोकि लाजिमी था। किंतु श्रेष्ठ काम के आगे ऐसी बौनी बातें या लोग लंबे समय तक टिके नहीं पाते। चिंता न कीजिए, एक दिन हवा में भाप बनकर ये लोग भी उड़ लेंगे। सो, बी-कूल डूड।

बाकी दिसंबर में देश एकदम ‘मस्त’टाइप ‘टनाटन’रहा। उधर सनी लियोनी का ‘रईस’ का आइटम नंबर ‘लैला मैं लैला…’खासी धूम मचाए रहा तो इधर पूनम पांडे का क्रिसमस पर यू-ट्यूब पर डाला पर अपना हॉट वीडियो।

चला-चली के बीच दिसंबर में देश पर फिलहाल सर्दी का ताप तारी है। और मैं अपनी रजाई में बैठा इन सबका आनंद ले रहा हूं।

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