शनिवार, 24 दिसंबर 2016

डिजिटल संता के झोले में डिजिटल गिफ्टस

चूंकि जमाना बहुत तेजी से ‘कैशलेस’ की तरफ बढ़ चला है तो इस दफा प्यारे संता के झोले में ‘पारंपरिक गिफ्टस’ न होकर ‘डिजिटल गिफ्टस’ होंगे! उम्मीद है, सदियों से चली आ रही परंपरा को इस बार संता तोड़ देगा। यों भी, पुरानी परंपराओं को टूट चाहिए भी ताकि समाज के बीच ‘यथास्थितिवादी’ की जड़ें मजबूत न हों। जब हम कलम से ‘की-बोर्ड’ और ‘टच-स्क्रीन’ पर आ सकते हैं तो क्या संता ‘डिजिटल गिफ्टस’ पर नहीं आ सकता? टाइम के साथ चेंज होने में ही भलाई है बंधु।

जब से कंप्यूटर, मोबाइल, वीडियो गेम, कार्टून चैनलस आदि-इत्यादि ने बच्चों के बीच खास जगह बनाई है, तब से उनका खिलौनों के प्रति चाव भी थोड़ा घटा है। बच्चे दिन-ब-दिन ‘हाई-टेक’ हो चले हैं। ‘इ-टेक्नॉलेजी’ या ‘डिजिटल नो-हाऊ’ को वो हम बड़ों से कहीं बेहतर समझते-जानते हैं। जित्ती देर में हम टच-स्क्रीन पर उंगलियां यहां-वहां नचा पाते हैं, उत्ती देर में तो वे टैक्स लिखकर वाट्सएप कर देते हैं। है न फर्क उनकी और हमारी ‘शार्पनेस’ में।

तो इसमें बच्चों को कोई हैरानी या परेशानी नहीं होनी चाहिए अगर इस बार संता के झोले में भिन्न-भिन्न टाइप के डिजिटल गिफ्टस मिलें। अजी ये तो संता का एक महत्त्वपूर्ण कदम होगा ‘डिजिटाइजेशन’ को आगे बढ़ाने में। हो सकता है, इस बहाने सरकार संता को कुछ डिस्काउंट-इस्काउंट भी दे दे, उसकी डिजिटल प्रतिबद्धता के प्रति।

हां, इन डिजिटल गिफ्टस पर कुछ लोग आपत्ति जरूर जतला सकते हैं कि संता ये सब देकर बच्चों को बिगाड़ रहा है। उनका बचपना छिन रहा है। तो क्या...? न उनके कहने से बच्चे बिगड़ने वाले हैं न संता ही मानने वाला है। अमां, दुनिया इत्ती तेजी से निरंतर बदल रही है। सुनाई में आ रहा है कि कुछ सालों के भीतर मंगल पर इंसान का आशियाना भी संभव हो सकता है। फिर संता के हाई-टेक होने में क्या परेशानी?

और फिर संता भी अब कहां घर-घर जाकर बच्चों को गिफ्टस बांटता फिरता है। वो या तो अब बच्चों से ‘फेसबुक’ या ‘वाट्सएप’ पर मिल लेता है। वहीं उसे जो देना होता है दे देता है। इस भाग-दौड़ भरी जिंदगी में न अब संता, न बच्चों कने टाइम ही कहां बचा है। दोनों अपनी-अपनी लाइफ में जबरदस्त बिजी हैं। बच्चों पर पढ़ाई-करियर का बोझ है तो संता पर उम्र का।

अब थोड़ा संता को भी आराम करना चाहिए। सदियां हो गईं हर क्रिसमस पर गिफ्ट्स बांटते-बांटते। नए संता आ नहीं रहे। जो हैं भी उनमें उन संता जैसे गुण नहीं। वैसे भी संता चाहे घर-घर जाकर गिफ्टस बांटे या मोबाइल-इंटरनेट पर बच्चों के प्रति उसका स्नेह या प्यार भला कहां कम होने वाला है। संता क्लॉज और बच्चों का संग-साथ तो जन्म-जन्मांतर का है।

कुछ भी कहिए, डिजिटल होते संता मस्त लगते हैं। भिन्न-भिन्न रूप-रंगों में देखने को मिलते हैं। कभी डिजिटली हंसाते हैं तो कभी लाइफ का बहुत बड़ा मंत्रा हमारे मानस-पटल पर छोड़ जाते हैं। न केवल बच्चे बल्कि बड़े भी उन्हें उत्ता ही एंजॉव्य करते हैं। इसीलिए तो संता क्लॉज हर किसी का प्यारा-दुलारा होता है।

इस तेजी से डिजिटल होते समय में डिजिटल संता के डिजिटल-गिफ्टस हमारे लिए अलग ही आकर्षण का केंद्र होंगे। हां, थोड़ा गिफ्टस का स्वरूप जरूर बदल जाएगा पर उनमें छिपी भावनाएं बिल्कुल वैसी ही रहेंगी।

तो बच्चों के साथ-साथ पूरी दुनिया को अपने डिजिटल संता के डिजिटल गिफ्टस का आनंद लेने दें।


हैप्पी मैरी क्रिसमस।

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