शुक्रवार, 4 नवंबर 2016

खामोश! आपातकाल आने को है

इस वक्त घर में दुबक के बैठे रहने के अतिरिक्त मेरे पास कोई चारा नहीं। विद्रोह और विरोध करना मुझे आता नहीं। क्रांति मैं कर नहीं पाऊंगा। क्रांतिकारी बनने का मुझे शौक नहीं। हां, बहुत से बहुत मैं यह कर सकता हूं कि अपनी फेसबुक वॉल पर सरकार या बुद्धिजीवियों से सहमति-असहमति जताते हुए कुछ लिख भर दूं।

ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूं, किसी ने मुझे बताया कि आपातकाल आने को है! कोई ऐसा-वैसा नहीं बड़ा भयंकर किस्म का आपातकाल आएगा। सच बोलूं- आपातकाल का नाम सुनते ही मेरी ‘घिघ्घी’ बंधना शुरू हो गई है। कुछ समझ नहीं पा रहा कि क्या करूं, क्या न करूं। आखिर आपातकाल है कोई मजाक नहीं। सुना है, आपातकाल में लिखने से लेकर बोलने तक पर विकट टाइप का बैन लग जाता है। जिसने सरकार या नेता के खिलाफ जरा भी हिमाकत की, उसे तुरंत जेल में हवा खाने भेज दिया जाता है। पिछले आपातकाल में बहुत से सूरमाओं की पाजामे ढिले हुए थे। इससे भला कौन इंकार करेगा।

मैं इस चिंता में घुला-पिघला जा रहा हूं अगर आपातकाल आ गया तो मेरे लिखने (बोलने में मैं ज्यादा विश्वास नहीं करता) का क्या होगा? लेखन से जो ठीक-ठाक कमाई हो रही है, वो कैसे नियमित रह पाएगी? हालांकि मैं विद्रोही टाइप का लेखन नहीं किया करता फिर भी सरकार के दिमाग का क्या भरोसा कब में पलटी मार जाए। यों भी, सरकार ने अभी एक अति-क्रांतिकारी चैनल को चौबीस घंटे के लिए बैन किया ही है।

इस बैन के खिलाफ उठ रहीं ज्यादातर आवाजें वे हैं, जो वर्तमान सरकार के साथ ‘एडजस्टमेंट’ नहीं कर पा रहीं। बात-बात में उन्हें विचार और लोकतंत्र खतरे में जान पड़ता है। इस समय आपातकाल का हल्ला भी सबसे अधिक इन्हीं अति-क्रांतिकारियों ने मचाया हुआ है। मचाने दीजिए न, किसे परवाह है।

मुझे न एक पैसे का लेना अति-क्रांतिकारियों से है न देना बैन या सरकार से। मेरी इच्छा केवल इत्ती-सी है कि मेरे लेखन की गाड़ी बिन बाधा चलती रहे। एडजस्टमेंट तो मैं हर कहीं कर सकता हूं। बेवजह बुद्धिजीवि या प्रगतिशील बनने का मुझे शौक नहीं। जिन्हें सरकार या व्यवस्था से लड़ने-भिड़ने की बीमारी है, वे अपनी दुकानें सजाए रखें।


खैर, आपताकाल को जब आना होगा आ जाएगा। मुझे ज्यादा डर लगेगा तो मैं अपनी रजाई में दुबक जाऊंगा। यही ठीक भी रहेगा। कोशिश मेरी तब भी यही रहेगी कि अपनी लेखन की दुकान यों ही चलती रहे। बाकी तब की तब देखी जाएगी।

1 टिप्पणी:

ब्लॉग बुलेटिन ने कहा…

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, "मीठा मीठा गप्प गप्प और खारा खारा थू थू“ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !