रविवार, 30 अक्तूबर 2016

मार्केट और दीवाली

यों तो मार्केट का मूड 24x7 ही खिला रहता है पर दीवाली पर तो यह खिलकर और चौड़ा हो जाता है। हो भी क्यों न आखिर दीवाली है ही मार्केट का त्यौहार। दीवाली पर मार्केट हर उस हद से गुजर जाना चाहता है, जहां जाकर वो अपने कस्टमर्स को ‘लुभा’ सके। न केवल एक से बढ़कर एक प्रॉडेक्ट्स बल्कि इत्ता डिस्काउंट कि मन ललचाए बिना रह न पाए। मार्केट अपने कस्टमर्स की नस-नस को बहुत अच्छी तरह पहचान गया है। उसे मालूम है, कस्टमर को किस मूमेंट पर क्या चाहिए, क्या नहीं चाहिए। मार्केट और कस्टमर एक-दूसरे के पूरक बन चुके हैं।

आजकल की दीवाली को देखकर यही लगता है कि भईया जिसकी अंटी में अथाह नोट हो वो इसे मनाए अन्यथा घर बैठकर अतिशबाजी का आनंद ले। हालांकि ऐसा होता बहुत कम है क्योंकि हम भारतीय अपने त्यौहारों से इत्ता प्यार करते हैं कि उसके वास्ते समय और पैसा निकाल ही लेते हैं। मार्केट के अंदर भीड़। मार्केट के बाहर भीड़। ऑन-लाइन मार्केट में भीड़। यानी, दीवाली पर हर कोई कुछ न कुछ खरीद ही रहा होता है। कभी-कभी तो लोग अपनी हैसियत से ज्यादा भी खरीद जाते हैं। लेकिन कोई नहीं। कौन-सा दीवाली को रोज-ब-रोज आना है। साल में एक दिन का खेल है फिर तो धरा पर अंधेरे का रोना रोना ही है।

मार्केट ने खरीददारी को बहुत आसान बना डाला है। कुछ खरीदने के लिए आपको मार्केट जाने की जरूरत नहीं। मार्केट खुद-ब-खुद चलकर आपके पास आ जाएगा। ऑन-लाइन मार्केट का तो पूरा कॉस्पेट ही इसी पर टिका है। कस्टमर्स को कम में ज्यादा का फायदा और बिना भीड़-भड़क्के में धक्के खाए ईजी-परचेजिंग। बिग या महा-सेल में से अपने तईं कुछ भी चुनिए। मार्केट के पास आपकी पसंद का सबकुछ उपलब्ध है।

प्रॉडेक्ट्स के साथ-साथ मार्केट ने रिश्तों को भी ‘हाईजेक’ कर लिया है। घर बैठे ही अपने नाते-रिश्तेदारों को दीवाली-विश करें। टच-स्क्रीन मोबाइल ने रिश्तों को इत्ता टची बना दिया है कि एक टच में कित्ती ही विश्स के मैसेजस एक-साथ चले जाते हैं। अगर रिश्तेदार ज्यादा नजदीकी है तो घर बैठे ही उसे ऑन-लाइन गिफ्ट भेज सकते हैं। आने-जाने, मिलने-मिलाने का झंझट ही खत्म। आप मार्केट के इस कॉन्सेप्ट को कह भले ही कुछ भी लें लेकिन आजकल त्यौहारों पर रिश्ते और विश्स ऐसे ही निभ व निभाई जा रही हैं। जमाना डिजिटल हो रहा है न। हर मर्ज का इलाज एप पर उपलब्ध है।

तो हुजूर ज्यादा सोचिए मत। पुराने टाइम की दीवाली को याद कर ज्यादा ‘भावुक’ मत होइए। खिल-खिलौने, मिट्टी के दीए या हटरी की दीवानगी छोड़िए। सीधा मार्केट से जुडि़ए। मार्केट-बेसड त्यौहार सेलिब्रेट कीजिए। शरीर को कष्ट मत दीजिए, आपके हर कष्ट को हरने के लिए मार्केट है न।

दीवाली को मार्केट का त्यौहार मानकर इंज्वॉय कीजिए। दुनिया-समाज-जमाना हर दम बदल रहा है। बदलाव को स्वीकार करने में ही भलाई है।

हैप्पी (मार्केट-बेस्ट) दीवाली।

4 टिप्‍पणियां:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

शुभकामनाएं ।

शिवम् मिश्रा ने कहा…

ब्लॉग बुलेटिन टीम और मेरी ओर से आप सभी को दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएं|


ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, "ब्लॉग बुलेटिन का दिवाली विशेषांक“ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

Amrita Tanmay ने कहा…

बहुत बढ़िया ।

Amrita Tanmay ने कहा…

बहुत बढ़िया ।