मंगलवार, 4 अक्तूबर 2016

एलियन और फेसबुक

मार्क जुबकरबर्ग दो-तीन लोगों के साथ मिलकर एलियन की खोज करेंगे- जब से इस खबर को पढ़ा है, मुझे फेसबुक की ‘चिंता’ होने लगी है। चिंता हो भी क्यों न। अभी तलक तो फेसबुक पर हम इंसानों का कब्जा है। रात-दिन हम ही लोग उस पर लगे रहते हैं। कल को एलियन को खोज लेने के बाद- इस बात की क्या गारंटी है कि मार्क जुकरबर्ग उन्हें फेसबुक पर एकाउंट बनाने की परमिशन नहीं देंगे।

अगर ऐसा कुछ होता है फिर तो हम इंसान के फेसबुक खाते पचड़े में पड़ जाएंगे। ‘प्राइवेसी’ का क्या होगा? सुना है, एलियन लोग दिमाग के बहुत तेज होते हैं। इंसानी दिमाग से चार कदम आगे चलते हैं। तकनीक में माहिर होते हैं। कहीं भी बैठकर कुछ भी कर सकने की ताकत रखते हैं। और गुस्सा तो उन्हें विकट वाला आता है। एक अंगरेजी फिल्म में देखा था मैंने।

फिर तो वे हमारी लिखीं पोस्टों से भी ‘भयंकर छेड़छाड़’ कर सकते हैं। हम लिख कुछ रहे हैं और पोस्ट हो कुछ रहा है। चलिए मुझ जैसे वनलाइनर की छोड़िए। जरा उन बेचारे कवियों की सोचिए जो रात-दिन किस्म-किस्म की कविताएं फेसबुक पर चिपकाते रहते हैं। और तो और अपनी कविताओं को पढ़वाने के लिए ‘इन-बॉक्स’ तक में चले आते हैं। उनका क्या होगा? क्योंकि- जब हम इंसानों को ही उनकी लिखीं कविताएं पल्ले नहीं पड़तीं- फिर एलियनस को क्या खाक समझ आएंगे। वे तो उन कविताओं को क्या से क्या बना डालेंगे।

बेचारे फेसबुकिया कवियों का अस्तित्व ही संकट में आ जाएगा।

एक कवि ही क्यों फेमिनिस्ट टाइप लेखिकाएं, प्रगतिशील टाइप बुद्धिजीवि, राष्ट्रवादी-वामवादी टाइप विचारक इन सब की पोस्टों पर एलियन की निगाहें रहेंगी। ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ पर संकट आन खड़ा होगा। फिर अति-क्रांतिकारी टाइप लोग कैसे कहेंगे- ‘हमें चाहिए आजादी।‘

साथ-साथ, मुझे तो व्यंग्यकारों की चिंता भी सताने लगी है। व्यंग्यकारों के लिखे वनलाइनर या व्यंग्य एलियन को समझ आएंगे कि नहीं? पता लगा कि हम बात ‘व्यंग्य’ में कह रहे हैं और एलियन बिरादरी ने उसे ‘दिल पे’ ले लिया। और हो गए हम पर ‘सीधे’। एलियनों की खोपड़ी का कोई भरोसा थोड़े न है। कब में बिगड़ जाए।

फेसबुक पर एक नई तरह की ‘एलियनवादी विचारधारा’ अपना ‘कब्जा’ जमाने लग जाएगी। एलियन लोग हम इंसानों को ‘एलियनवादी’ बनाने की पुरजोर कोशिशें करेंगे- चाहे तो लिखकर रख लो।
मेरे विचार में- हम सभी फेसबुकियों को मिलकर मार्क जुकरबर्ग से ‘अपील’ करनी चाहिए कि वे एलियन को खोजने का विचार त्याग दें। यह जित्ता हम इंसानों के तईं भला होगा, उससे कहीं अधिक फेसबुक के लिए भी ठीक रहेगा। खामखां, इत्ती दूर बैठे एलियनों को छेड़ने से क्या हासिल। यहां तक- प्रसिद्ध वैज्ञानिक इस्टिफन हाकिंग्स ने भी एलियन से दूर रहने को कहा है।

बाकी डिपेंड जुकरबर्ग पर करता है कि वे आगे क्या पॉलिसी अपनाते हैं। हरिओम।

1 टिप्पणी:

HARSHVARDHAN ने कहा…

आपकी ब्लॉग पोस्ट को आज की ब्लॉग बुलेटिन प्रस्तुति अंतरराष्ट्रीय शिक्षक दिवस और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। सादर ... अभिनन्दन।।