मंगलवार, 13 सितंबर 2016

हिंदी डे सेलिब्रेशन

यू नो, 'हिंदी डे' को 'सेलिब्रेट' करने का अपना ही लुत्फ है। आज के दिन हिंदी अपनी बहुत अपनी-सी लगती है। आज हिंदी को फुल-टू जी लेने का दिल करता है। सोते-जागते, खाते-पीते, नाचते-गाते, रोते-हंसते, टहलते-दौड़ते बस हिंदी ही हिंदी दिमाग और जहन पर छाई रहती है। ऐसा फील होता है, जैसे हिंदी आज हमारी प्रेमिका टाइप बन गई है।

अपने मोहल्ले में मैं 'हिंदी डे' पर हिंदी के सम्मान में ग्रैंड-प्रार्टी रखता हूं। इलाके के सम्मानीत राइटर्स को बुलाता हूं। इसमें यंग राइटर्स की भागीदार अधिक रहती है। हिंदी पर तमाम टाइप के लेक्चर होते हैं। मंच से सब अपनी-अपनी छोड़ते हैं। सबसे खास बात यह है कि कोई भी राइटर न तो हिंदी के प्रति बेचारगी का भाव जतलाता है, न हिंदी की चिंता में दुबला हुआ जाता है। सब मस्त रहते हैं। मस्ती के साथ अपने व दूसरे के कहे को 'एन्जॉय' करते हैं।

यों भी, मेरा बचपन से यही मानना रहा है कि हिंदी रोने-धोने की नहीं बल्कि 'एन्जॉयमेंट' की लैंग्वेज है। भाषा और शब्दों की मस्तियां जित्ती हिंदी में हैं, उत्ती कहीं नहीं। आजकल टि्वटर और फेसबुक पर लिखे जाने वाले 'वनलाइर्स' का सबसे ज्यादा मजा हिंदी में मिलता है। पढ़कर तबीयत ग्रीन-ग्रीन हो लेती है। एक से बढ़कर एक फन्नी वनलाइनर्स पूरा दिन बना देते हैं।

हिंदी अपनी स्पीड में 'धांसू' बढ़ रही है। इत्ता बड़ा मार्केट आज हिंदी का गुलाम है। बिना हिंदी का सहारा लिए मार्केट एक कदम आगे नहीं बढ़ सकता। सारे ऐड केवल हिंदी के दम पर ही हिट हो रहे हैं। जिन ऐड्स में हिंदी का तड़का नहीं होता, वो बड़े ही 'बोगस' टाइप लगते हैं। डियो से लेकर कंडोम तक के ऐड में हिंदी अपना जलवा जमाए हुए है।

न केवल बॉलीवुड बल्कि हॉलीवुड की फिल्मों में भी हिंदी ने अपना असर जमा रखा है। हॉलीवुड फिल्म हिंदी में डब होकर मजे को दोगुना कर देती है। बॉलीवुड फिल्मों की अथाह कमाई में हिंदी का बहुत बड़ा योगदान है।

इत्ते पर भी हिंदी के कथित चिंताधारियों को हिंदी की चिंता रहती है। आए दिन वे हिंदी के गिरते स्तर का रोना रोते रहते हैं। खासकर, 'हिंदी डे' पर तो हिंदी के प्रति चिंता जतलाते-जतलाते इत्ते गमगीन हो जाते हैं, मानो कहीं मंच पर लुढ़क न पड़ें। जबकि इन सब चिंताधारियों की कथित चिंताओं से बेफिकर हिंदी मस्ती के साथ चली और बढ़ी जा रही है। ग्लोबल मार्केट में 'बिंदास' अपनी धाक जमा रही है। यहां तक कि अंगरेजों को भी हिंदी बोलने-सीखने के वास्ते प्रेरित कर रही है। फिर मैं क्यों न कहूं कि 'हिंदी इज ए फन्नी लैंग्वीज'।

केवल 14 सिंतबर ही नहीं बल्कि मेरा तो दिल करता है कि मैं 24x7 'हिंदी डे' को 'सेलिब्रेट' करता रहूं। मैं जिस भाषा में लिखता, पढ़ता, सोचता, कमाता हूं, उसे हर पल सेलिब्रेट करना मेरे भीतर प्राउड टाइप फीलिंग को जिंदा रखता है। यू नो, हिंदी मेरी लाइफ का सबसे 'इंर्पोंटेंट पार्ट' है।

तो प्यारे हिंदी के लिए कतई चिंतित न हो। हिंदी अपनी सेहत में एकदम ठीक और मस्त है। हर डे को हिंदी डे के सेलिब्रेशन के नाम रख दो। फिर देखो हिंदी का असली मजा। 

1 टिप्पणी:

अजय कुमार झा ने कहा…

बिलकुल करारा ...खरी खरी हिंदी की चिंता की कोई जरूरत नहीं