सोमवार, 12 सितंबर 2016

कॉमेडियन खुद बन गए कॉमेडी

ऐसा नहीं है कि हर बार निशाना सीधा ही लगे। कभी-कभी उलटा भी लग जाता है। उलटा लगने पर जो 'छिछालेदर' होती है, उसे अगले को 'झेल' पाना बड़ा मुश्किल हो जाता है। ठीक ऐसा ही मशहूर कॉमेडियन कपिल शर्मा के साथ हुआ। मियां ने शिकायत की थी बीएमसी के भ्रष्टाचार की (वो भी प्रधानमंत्री को ट्वीट कर) मगर जाल में फंस खुद गए।

जब खुद के भ्रष्टाचार पर उनसे जवाब मांगा जा रहा है, तब मियां अपनी बगलें झांकने में लगे हैं। दूसरों की कॉमेडी करते-करते आज कपिल शर्मा खुद कॉमेडी बन गए हैं। टि्वटर पर उन्हें जिस तरह से 'ट्रॉल' किया जा रहा है, देखने काबिल है। इसीलिए तो कहा जाता है, दूसरे के गिरेबान में हाथ घुसेड़ने से पहले खुद का गिरेबान जरूर देख लेना चाहिए- कि, पाक साफ है या नहीं।

भ्रष्टाचार पर लाख सरकार, नेता, व्यवस्था को गालियां दीजिए लेकिन उससे पहले एक दफा अपना भ्रष्टाचार भी जरूर चेक कर लीजिए हुजूर। यह हकीकत है कि हमें अपना किया भ्रष्टाचार कभी दिखता नहीं। जबकि हम भी जाने-अनजाने किसी न किसी भ्रष्टाचार में सीधे लिप्त रहते हैं। चूंकि भ्रष्टाचार के मुद्दे हमारे यहां सबसे अधिक सुर्खियों में रहते हैं, शायद कपिल शर्मा ने भी यही सोचा हो कि वो बीएमसी का भ्रष्टाचार जतला कर ओवरनाइटली केजरीवाल बन जाएंगे। लेकिन सबकुछ सोच के मुताबिक होता ही कहां हैं प्यारे।

दांव उलटा पड़ने के बाद से महाराज कपिल शर्मा अपनी सफाई में न टि्वटर पर, न मीडिया के सामने कुछ नहीं कह-बोल रहे। प्रधानमंत्री जी से अच्छे दिन पर सवाल करने वाले खुद बुरे दिन में हिलग-से गए हैं।

सेलिब्रिटी टाइप लोग जब व्यवस्था पर सवाल उठाते हैं न तो मुझे उन पर खासा तरस आता है। जबकि वे खुद इसी व्यवस्था से कहीं न कहीं समझौता करे बैठे होते हैं। और फिर आज के जमाने में कौन इत्ता दूध का धुला है? या किसकी दाल में कालापन नहीं है? क्या कपिल शर्मा की कॉमेडी पूरी तरह से साफ-सुथरी (स्वच्छ) है?

देखो जी, आप कॉमेडियन हो। अच्छी कॉमेडी भी कर लेते हो। नामी सेलिब्रिटियों में आपकी पूछ है। फिर क्यों भ्रष्टाचार की टांग में टांग घुसेड़कर उसे टंगड़ी देना चाहते हो। अमां, भ्रष्टाचार की जड़ें बहुत गहरी हैं। इत्ती आसानी से न उखड़ने वाली। केजरीवाल जी आए थे न, देश-समाज-जनता को भ्रष्टाचार से मुक्त करवाने, एक नई तरह की राजनीति सिखलाने, आज उनके तमाम मंत्री-विधायक उसी दलदल में धसे हुए हैं।

तो प्यारे, भ्रष्टाचार पर बोलना बहुत आसान है किंतु खुद पर खरा उतरना उत्ता ही मुश्किल। क्या समझे...।

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