मंगलवार, 6 सितंबर 2016

सीडी का रायता

उन्होंने कहा कि दलित होने के नाते उन्हें 'सीडी एपिसोड' में 'फंसाया' जा रहा है! यह विपक्ष की 'साजिश' है! जबकि न सीडी, न उस नंग-धड़ंग दिखने वाले आदमी से उनका दूर-पास का कोई लेना-देना नहीं!

अगर उनके कहे को ही 'अंतिम सत्य' मान लिया जाए फिर तो उनकी पार्टी ने उनके साथ कतई ठीक नहीं किया। पार्टी से तो बाहर निकाला ही, साथ में 'गंदी मछली' और कह दिया।

उफ्फ... इत्ती तौहीन। अपने एक ईमानदार मंत्री (!) की। अमां, आप तो ऐसे न थे।

लेकिन इसमें आप भी क्या कर सकते हैं? राजनीति का कायदा ही यह रहा है कि जहां बात अपने सिर पर सवार होने लगे तुरंत उससे पल्ला झाड़ लो। ऐसे अनजान बन जाओ कि न हम तुम्हें जानें, न तुम हमें जानो...। यहां भी सेम-टू-सेम यही हो रहा है।

मामला किसी टाइप के भ्रष्टाचार-फ्रटाचार का होता तो भी संभाल लिया जाता। लेकिन यहां तो समस्त क्रिया-कलाप खुल्ला सीडी में दिख रहे हैं। भला इससे कैसे इंकार कर सकते हैं। एक-दो मिनट का नहीं पूरे दस मिनट का सीन है। साथ में कामासूत्र टाइप फोटू-शोटू भी हैं।

नेता-मंत्री लोग भी न पिछले सीडी एपिसोडों से कोई सबक नहीं लेते। जबकि उन्हें अच्छे से मालूम है कि पिछले सीडी कांडों में नेताओं-मंत्रियों की कित्ती दुर्गत हुई थी। मगर फिर भी...। अमां, अपनी सीडीयां बनवाने का इत्ता ही शौक है तो राजनीति छोड़कर फिल्म इंडस्ट्री क्यों नहीं ज्वाइन कर लेते। फिर हर रोज बनाते-बनवाते रहियो सीडीयां। कौन रोकने, कौन टोकने वाला होगा वहां।

देखा, एक सीडी ने अंदर-बाहर हर जगह 'रायता' फैलवा दिया। पार्टी के मालिक जो अब तलक दूसरों के रायते फैलाकर मजा लेते थे, अब जुटे हुए हैं अपने ही मंत्री के फैलाए रायते को समेटने में। मगर यह रायता है ही इत्ता पतला कि न टोपी में समा पा रहा है न ईमानदारी की गागर में। ऊपर से विपक्षी दल भी उचक-उचक के मजे ले रहे हैं। सोशल मीडिया पर तो जोकों की बाढ़-सी आई हुई है। हर दूसरा ट्वीट मंत्री जी की सीडी पर टारगेटिड रहता है।

मंत्री जी और मुख्यमंत्री जी के तईं यह विकट समय है। क्या करें, क्या न करें के बीच गाड़ी फंसी हुई है। बीच-बीच में कुछ कड़े बयान देकर मामले पर पानी डालने की कोशिशें जरूर की जा रही हैं पर कोई फायदा नहीं। रायता बहुत तगड़ा करके फैल चुका है।

अफसोस कि एक और मंत्री जी सीडी एपिसोड की भेंट चढ़ गए। आगे-आगे देखिए होता है क्या।

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