गुरुवार, 8 सितंबर 2016

आइफोन-7 और खाट

नहीं। मेरी इत्ती 'औकात' नहीं है कि मैं आइफोन-7 खरीद सकूं। यह तो आइफोन-7 रहा, मैं ऐसी किसी भी चीज को खरीदने का 'पक्षधर' नहीं, जहां मुझे अपना घर फूंकता नजर आए। अपना घर फूंककर तमाशा देखना मेरा शौक नहीं। हां, आइफोन-7 से भी महत्त्वपूर्ण एक और चीज है मेरे पास। जी हां, मेरे पास खाट है। खाट के आगे आइफोन-7 की क्या बिसात होगी, इसे आप सहज ही समझ सकते हैं।

आज मार्केट में जित्ता हो-हल्ला आइफोन-7 के वास्ते मचा हुआ है, उससे कहीं ज्यादा हल्ला खाट को लेकर मच रहा है। हर तरफ बस खाट, खाट और खाट के ही चर्चे हैं। 'खाट सभा' के बाद जिस तरह से खाट-लूट के लिए भगदड़ मची- कसम से- उन नजारों को देखकर मेरा दिल 'प्रसन्न' हो गया। वाकई, लोगों के दिलों में अब भी खाट के प्रति इत्ता मोह, इत्ता सम्मान बचा है कि खाट को सिर पर या साइकिल पर उठाए लिए जा रहे हैं। कुछ ऐसे लोग भी दिखे जिन्होंने खाट के पाए ही उखाड़ लिए ताकि कंधों पर बोझ कम पड़ सके।

खाट के ठाठ को देखकर मेरे दिलो-दिमाग से आइफोन-7 का क्रेज तुरंत उतर गया। लोगों की बुद्धि पर मुझे 'तरस' आने लगा, जो हजारों रुपए देखकर आइफोन-7 को खरीदने के लिए 'बेताब' हुए जा रहे हैं। इत्ते रुपए में तो कित्ती ही खाटें खरीदी जा सकती हैं। खाट की खरीद से कम से कम खाट बनाने वालों का ही भला हो जाएगा। हाशिए पर जा चुका उनका धंधा फिर से चमकने लगेगा।

सोशल मीडिया पर मैं कई लोगों को खाट-लूट के खिलाफ निरंतर लिखते-बोलते सुन रहा हूं पर मैं उनसे सहमत नहीं। मेरे विचार में, जनता ने कुछ गलत नहीं किया खाट लूटकर। यह जनता कम से कम उस माल्या से तो बेहतर ही है, जो देश का करोड़ों रुपया लेकर चंपत हो लिया। सरकार के ऐड़ी-चोटी का दम लगाने के बाद भी उसका देश लौटना असंभव-सा जान पड़ता है।

इससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता कि लोगों का विश्वास नए आइफोन-7 में कित्ता बन पाता है, कित्ता नहीं। मुझे तो यह देखकर अथाह खुश हो रही है कि जनता खाट की ओर लौट रही है। अपना विश्वास खाट में कायम कर रही है। न केवल गांव-देहात बल्कि शहरी बंदे भी अब घर में खाट होनी चाहिए पर सहमति बनाते दिख रहे हैं।

'खाट सभा' के बाद खाट के 'अच्छे दिन' लौटते हुए से जान पड़ रहे हैं। बाकी आइफोन-7 के दिन अच्छे रहते या बुरे इससे अपनी सेहत पर कोई खास फरक नहीं पड़ता। अपने हित तो केवल खाट से जुड़े हैं। जय खाट। जय जनता।

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