बुधवार, 17 अगस्त 2016

यमराज से संवाद

गए रोज यह संवाद यमराज (जी हां, यमराज) से इन-बॉक्स में घटित हुआ। इस संवाद का किंचित संपादित अंश यहां प्रस्तुत है।

यमराज- हैलो वत्स।
मैं- जी। हैलो। मैं वत्स नहीं रस्तोगी हूं। र स्तो गी। आप कौन सर?
यमराज- हां हां मैं जानता हूं तुम वत्स नहीं रस्तोगी हो। किंतु हमारे यहां बेटे को प्यार से वत्स कहा जाता है। मैं यमराज हूं।
मैं- य..य..मराज। लेकिन सर आप मेरे इन-बॉक्स में। क्या मेरा समय पूरा हुआ? बट, अभी मैंने देखा ही क्या है?
यमराज- अरे, नहीं.. नहीं वत्स। तुम नाहक चिंतित हो रहे हो। मैं तो यों ही तुमसे इन-बॉक्स में चैट करने आ गया था।

(मैं राहत की सांस लेते हुए।)

मैं- ओह! थैंक गॉड। मैं तो डर ही गया था। जी, बताएं। आप फेसबुक पर कब आए? क्या इंटरनेट आपके इलाके में भी पहुंच गया?
यमराज- अभी चार-पांच महीने पहले ही सीधा धरती से इंटरनेट का कनेक्शन लिया है।
मैं- सीधा धरती से? वाह! जलवे हैं आपके।
यमराज- हा हा हा हा हा (भारी-भरक हंसी हंसते हुए।)
मैं- अच्छा। तभी फेसबुक पर आपने एकाउंट क्रिएट किया होगा।
यमराज- अरे वत्स, हमें कहां आता है इंटरनेट-फेसबुक चलाना। ये सब तो हमें स्टीव जॉब्स ने बताया-समझाया है। स्टीव पिछले दिनों ही तो आया है यहां।
मैं- स्वीट जॉब्स। एप्पल के को-फाउंडर थे।
यमराज- हां वही वही। बंदा वाकई बड़ा होशियार है। थोड़े दिनों में ही हम सब को इंटरनेट-फेसबुक चलाने में ट्रेंड कर दिया।
मैं- जी सर। वो तो हैं ही ग्रेट।
यमराज- अच्छा वत्स, ये बताओ। क्या धरती पर कविगण ज्यादा हो गए हैं?
मैं- नहीं। ऐसा तो नहीं हैं। यहां तो हर प्रकार का बंदा है। क्यों क्या हुआ?
यमराज- यार, जब से फेसबुक पर आया हूं हर तरफ कवि ही कवि दिखलाई देते हैं। हर रोज कोई न कोई कवि मेरे इन-बॉक्स को अपना बैडरूम समझके चला आता है सर, मेरी कविताएं पढ़कर बताइए।
मैं- ओह! अच्छा। फेसबुक के कवियों ने आपको भी कविताएं चिपका शुरू कर दीं। मैं स्वयं उनकी इस प्रवृति से दुखी हूं पर क्या करूं?
यमराज- मुझे कविताएं पढ़ने का रत्तीभर शौक नहीं। फेसबुक पर तो मैं इसलिए आया हूं ताकि हम सब देवतागण आपस में कनैक्ट रह सकें। किंतु धरती वालों ने हमें यहां भी न छोड़ा।
मैं- सर, फेसबुक की सेटिंग में आपको एक 'ब्लॉक' का ऑप्शन मिलेगा। जो कवि आपको ज्यादा परेशान करते हैं कृपया उन्हें ब्लॉक कर दें।
यमराज- हां। अब यही करना पड़ेगा। स्टीव को बोलता हूं इसे करने को।
मैं- इसके अतिरिक्त कोई और दिक्कत या परेशानी। तो बताएं, सर।
यमराज- नहीं.. नहीं..। बाकी सब यहां मस्त चल रहा है। वो तो मेरे पास खाली समय था। तुम्हारी हरी बत्ती जल रही थी। सोचा तुमसे ही थोड़ा संवाद कर लिया जाए।
मैं- आपका शुक्रिया सर। आपसे इन-बॉक्स में बतियाकर मैं धन्य हुआ।
यमराज- आयुष्मान भवः।
मैं- जब भी टाइम मिले इन-बॉक्स में आते रहिएगा।
यमराज- अवश्य वत्स। अवश्य। अब चलूंगा। संदेसा आया है, तुम्हारी धरती पर दो-चार लोगों का समय पूरा हो लिया है। उनको लाना है।
मैं- ओह! ड्यूटी इज फ्सर्ट। गुड वाय सर।
यमराज- गुड वाय। टेक केयर, वत्स।

1 टिप्पणी:

राजा कुमारेन्द्र सिंह सेंगर ने कहा…

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन 'कजली का शौर्य और ब्लॉग बुलेटिन’ में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...