गुरुवार, 11 अगस्त 2016

व्यंग्य में प्रेरणाएं

व्यंग्यकार को व्यंग्य खींचने की प्रेरणा कहीं से भी मिल सकती है। जरूरी नहीं वो प्रेरणा बहुत धीर-गंभीर या क्रांतिकारी टाइप हो। ग्लैमरस, मस्त और बिंदास प्रेरणा से भी उसका काम चल सकता है।

बाकी व्यंग्यकारों का मैं नहीं जानता लेकिन मैं ऐसी ही प्रेरणाओं से अक्सर प्रेरणा पाता रहता हूं। अगर ये प्रेरणाएं न हों तो शायद मैं व्यंग्य खींच ही न पाऊं। व्यंग्य में मेरी प्रेरणाएं सनी लियोनी और राखी सावंत हैं। हो सकता है, ऐसा सुनकर वरिष्ठ टाइप व्यंग्यकारों को 'तीखी मिर्ची' लगी हो। उन्होंने मुझे व्यंग्य-लेखक मानने से भी 'इंकार' कर दिया हो। मगर इससे मेरी सेहत पर कोई असर नहीं पड़ता। भई, इत्ती बड़ी दुनिया में लेखक कहीं से, किसी से भी प्रेरणा पा सकता है। क्या नहीं?

मैंने प्रायः देखा है, प्रत्येक छोटे-बड़े लेखक की प्रेरणा में कोई न कोई वरिष्ठ टाइप लेखक ही रहता है। रात-दिन वो उन्हीं के गुणगानों का बैंड बजाता रहता है। जब जहां भी मिलता है अपने प्रेरणा-संपन्न लेखक का ये या वो पढ़ने पर इत्ता जोर डालता है, इत्ता जोर डालता है कि अगला भी उक्ता जाए। लेकिन मैं किसी वरिष्ठ टाइप लेखक-साहित्यकार को अपनी प्रेरणा न मानता। उन्हें प्रेरणा मानकर मुझे अपने व्यंग्य या भाषा का बैंड थोड़े न बजाना है।

मेरी प्रेरणाएं ग्लैमरस हैं इसीलिए पूरी कोशिश रहती है व्यंग्य में ग्लैमर का तड़का लगाए रखने की। मेरे विचार में व्यंग्य 'ग्लैमर-प्रधान' ही होना चाहिए ताकि अगला पढ़कर 'बोर' न हो। व्यंग्य को ही गंभीर बना देंगे, तो क्या खाक मजा आएगा लिखने-पढ़ने में।

मुझे लगता है अखबारों को व्यंग्य को छोटा रखने की प्ररेणा इन्हीं ग्लैमरस बालाओं की 'माइक्रो-ड्रेसस' से मिली होगी। सही भी है, व्यंग्य जित्ता माइक्रो होगा, पढ़ने में उत्ता ही लुत्फ देगा। लंबे-चौड़े व्यंग्य न अब कोई पढ़ना चाहता है न लिखना। वक्त के साथ पाठकों ने अपनी चॉइस भी बदल ली है।

बालाओं से प्रेरणा पाकर मुझे भी माक्रो टाइप व्यंग्य खींचने में ही ज्यादा आनंद आता है। न खोपड़ी पर वैचारिता हावी होती है न बुद्धिजीविता का दंभ सवार रहता है। मस्त होकर माइक्रो व्यंग्य खींचे जाओ। माइक्रो ड्रेस और माइक्रो व्यंग्य का यही तो मजा है प्यारे।

आगे कभी मूड बना तो मैं अपना व्यंग्य संग्रह इन्हीं प्रेरणाओं को समर्पित करूंगा। इस बहाने मार्केट में मेरी किताब की डिमांड भी धांसू रहेगी। सेलिब्रिटी प्रेरणाओं के सहारे सेलिब्रिटी लेखक बनने का मजा ही कुछ और है। प्रेरणाएं जिंदाबाद।

1 टिप्पणी:

Ravishankar Shrivastava ने कहा…

मुझे भी आपके इस लेख को पढ़कर बड़ी ग्लैमरस व्यंग्य प्रेरणाएँ मिली हैं :)