सोमवार, 18 जुलाई 2016

इमरान की तीसरी शादी : अभी तो मैं जवान हूं

सुनने में आया है, (इसे सुनी-सुनाई बात ही माना जाए) इमरान खान तीसरी शादी रचाने जा रहे हैं। खबर यह भी है कि यह महज 'अफवाह' भर है। अगर यह सच्चाई नहीं सिर्फ अफवाह ही है तो भी मैं इमरान खान के जिगर और जज्बे को झुककर सलाम करता हूं। जिस उम्र की दहलीज पर इमरान खान खड़े हैं, उस उम्र में शादी करने की सोच से ही दिमाग 'डिप्रेशन' में चला जाता है लेकिन वे कर रहे हैं। यह न सिर्फ बड़ी बात है बल्कि हर इंसान के दिल में अभी तो मैं जवान हूं टाइप हिम्मत भी पैदा करता है।

शादी करना कोई हंसी-ठिठोली नहीं। अच्छे-अच्छे पहलवानों के टांके ढीले और टखने कमजोर पड़ जाते हैं। यहां लोग एक शादी का बोझ उम्र भर झेल नहीं पाते और इमरान का तीसरी शादी का विचार है। नेक विचार है। ऐसे विचारों को दुनिया भर में फैलना एवं फैलाया जाना चाहिए। एहसास जिंदा रहता है कि शादी एक नहीं कई विकल्पों के खुले रहने का नाम है।

इमरान ने तीन तलाक की बंदिशों को तीसरी शादी के वार से ध्वस्त कर दिया है। जिंदगी तलाक के बाद खत्म नहीं बल्कि नए तरीके से शुरू की जा सकती है, बताया है। जमाना और रिश्ते अब पहले जैसे नहीं रहे। इसमें दिन-ब-दिन बदलाव और एक्सपेरिमेंट हो रहे हैं। बंदा किसी भी सूरत में 'बोर' नहीं होना चाहिए। शायद यही सोचकर इमराम, कबीर बेदी और पेले ने दूसरी या तीसरी शादी के विकल्प को चुना होगा।

मेरे मोहल्ले के कई वरिष्ठ इमरान के फैसले से खासा नाराज हैं। उनका कहना है, इस उम्र में इमरान को शादी का लड्डू न खाकर कुछ संस्मरण-आत्मकथा टाइप लिखना चाहिए था। अपने जीवन-संघर्ष के अनुभवों को मंजरे-आम पर लाना चाहिए था। शादी करके इमरान ने अपने पैरों पर खुद ही कुल्हाड़ी मारी है।

मैंने वरिष्ठों को समझाया। इमरान का कदम एकदम उचित है जी। उम्रदराज होने का मतलब ये थोड़े न होता है कि बंदा तुरंत संस्मरण या आत्मकथा मोड में चला जाए। जिंदगी में मस्तियों का ग्राफ हमेशा ऊंचा रखना चाहिए। ताकि जिंदगी थकाऊ और ऊबाऊ न लगे।

और फिर इमरान ने तीसरी शादी ही तो की है, कोई चोरी थोड़े न की है। शादी करना या तोड़ना इत्ती स्वतंत्रता तो बंदा-बंदी के हाथ होनी ही चाहिए। तीसरी के साथ रहना-निभाना इमरान को है, आप काहे को दुबले हुए जा रहे हो। बंदा क्रिकेट और राजनीति का 'ऑलराउनडर' है, मैनेज कर लेगा।

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