रविवार, 10 जुलाई 2016

बदले-बदले से मियां

मियां आज कुछ बदले-बदले से नजर आ रहे थे। हमेशा बदन पर चढ़े कुर्ते-पायजामे की जगह जींस-टी-शर्ट थी। सीधे हाथ में झूलने वाली छड़ी नदारद थी। बाईं बगल में अखबार नहीं बल्कि डायरी-नुमा काला-सा कुछ दबाए थे। गजब यह था कि आज मियां की टहल मेरी टहल से पहले ही पूरी हो गई थी। सो सुबह-सुबह मेरे घर आन धमके।

आते ही मियां ने मुझे चाय की जगह कोल्ड-ड्रिंक लाने का ऑडर दिया। साथ में साल्टिड चिप्स भी। इत्ते भाव देखके मैंने पूछा- 'अमां, मियां क्या बात आज सिर से लेकर हाव-भाव तक सब में बदले-बदले से नजर आ रहो हो। सब खैरियत तो है।' एक नजर मेरे तरफ देख मियां थोड़ा मुस्कुराए। फिर बोले- 'खैरियत-वैरियत तो सब है। आज से मैंने जमाने और वक्त के साथ चलना शुरू कर दिया है। कपड़े से लेकर खाने-पीने तक की 'च्वाइस' बदल डाली है। सबसे जरूरी काम मैंने यह किया है कि अब मैं भी सोशल मीडिया से जुड़ गया हूं। तब ही तो अखबार की जगह यह नया टैबलेट बगल में दबाए घुम रहा हूं।'

कोल्ड-ड्रिंक और चिप्स के पैकेट को मियां की तरफ धकेलते हुए मैंने कहा- 'वो तो सब ठीक है पर जरा अपनी उमर और सेहत की भी फिकर करो। इस उमर में लौंडो-लफाड़े वाले शौक जांचते नहीं तुम्हें।'

इत्ता सुन मियां हत्थे से उखड़ लिए। मेरे करीब यों आन बैठे मानो मेरे कहे का अभी हिसाब-किताब पूरा कर देंगे। कोल्ड-ड्रिंक के सिप को सुड़पते हुए बोले- 'क्या स्मारट होने-बनने की भी उमर होती है? खुदा के फजल से अभी मेरे बत्तीसों दांत टनाटन। सिर के- किनारे के बालों को छोड़के- बाकी बाल काले और नजरें एकदम मस्त हैं। सेहत भी माशाअल्लाह धांसू रहती है।'

मैंने मियां को बीच में टोकते हुए कहा- 'ठीक है... ठीक है... लेकिन आस-पड़ोस का कुछ तो लिहाज करना चाहिए न।' मियां भड़कते हुए बोले- 'अमां, काहे का लिहाज? मैं कौन-सा किसी की बीवी को अपने साथ उड़ाए लिए जा रहा हूं। आजकल के ट्रेंड के साथ चलने-ढलने में हरज ही क्या है?'

कुछ देर सुस्ता लेने के बाद मियां ने अपने डायरी-नुमा टैबलेट पर कुछ अखबार एक मिनट में ही खोल डाले। बोले- 'अखबार पढ़ने का मजा तो इसी पर है। न अखबार खरीदने का झंझट, न पढ़कर रद्दी इकठ्ठी करने का झाड़। उमर के साथ बदलने में ही भलाई है बरखुरदार। जो वक्त के साथ नहीं बदलता हाशिए पर सिमटकर रह जाता है।'

'मेरी मानो तुम भी खुद को डिजिटल कर लो। कब तक कागज-दवात के चक्कर में उलझे रहोगे।'- मियां कहते हुए निकल लिए।

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ब्लॉग बुलेटिन ने कहा…

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, " सिनेमा का गाना और ताऊ की कमेंट्री - ब्लॉग बुलेटिन " , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !