मंगलवार, 17 मई 2016

बोतल में बंद हवा

हवा पर हवा का 'अधिकार' नहीं रहा। हवा अब इंसान के 'नियंत्रण' में आ गई है। इंसान ने हवा की 'आत्मा' को बोतल में कैद कर बेचना शुरू कर दिया है। जी हां, अब हवा भी बाजार में बिकने को तैयार है। जिस प्रकार सील्ड बोतल में पानी भरकर बेचा जाता है। ठीक उसी तरह अब हवा को भी बोतल में बंदकर बेचा जाएगा।

विदेशों में लोग प्राकृतिक हवा के बदले बोतल की हवा लेना अधिक पसंद कर रहे हैं। कारण, प्राकृतिक हवा विषैली हो चुकी है। सांस के लिए तमाम तरह की बीमारियां पैदा कर रही है। तो होशियार लोगों ने सोचा क्यों न कनाडा के पहाड़ों की हवा को बोतल में बंद कर बेचा जाए। आडिया अच्छा है। यों भी, इंसान की खोपड़ी का कोई भरोसा नहीं होता, कब क्या खोजकर सामने ले आए।

कनाडा की कंपनी अब भारत में बोतल में हवा के मार्केट को विस्तार देने की जुगाड़ में है। मगर बोतल में मौजूद हवा भारत के पहाड़ों की नहीं कनाडा के पहाड़ों की होगी। लीजिए, अब भारत के पहाड़ इस लायक भी नहीं रहे कि शुद्ध-ताजी हवा दे सकें। इसमें पहाड़ों को क्या दोष देना, हमीं ने उनकी हवा के टेस्ट को जहरीला बना दिया। फिर रोते फिरते हैं कि हाय! हवा बहुत प्रदूषित हो गई है। किस्म-किस्म की बीमारियां पैदा कर रही है।

लेकिन पानी के बाद हवा का कारोबार हमसे, जरा-बहुत बचा प्राकृतिक हवा का सुख, भी छीन लेगा। पानी का तो बंटा-धार हमने कर ही दिया है। गली-मोहल्ले में चल रहीं पानी स्पलाई की दुकानें मस्त मुनाफा पीट रही हैं। देखा-देखी यही सब अब हवा के करोबार में भी आ जाएगा। हवा की बोतल खरीदकर जित्ती जरूरत हो उत्ती सांसों में भर लो। बाकी अगली बार के लिए छोड़ दो। वाह! क्या कमाल का आइडिया निकाला है बंदे ने।

बोतल में हवा के कॉसेप्ट को मार्केट में डेवलप होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। देश-समाज में ऐसी अजीबो-गरीब चीजें बहुत जल्दी अपनी जगह बना लेती हैं। बहुत से लोग तो बोतल वाली हवा केवल यह देखने के लिए ही खरीदेंगे कि इनहेल करने में कैसा महसूस होता है। सांस को कित्ती राहत पहुंचती है। आज टीवी पर जैसे डियो, कोल्ड-ड्रिंक्स आदि के एड आते हैं, हो सकता है, कल को बोतल में हवा के भी आने लगें। बहुत संभव है, हमारे देश की कोई मल्टीनेशल कंपनी ही इस मार्केट में उतर आए। बेचने के मामले में हम उस्ताद हैं ही। पानी से लेकर जरूरत पड़ने पर जमीर तक को बेच सकते हैं। बिना किसी समस्या के।

बोतल में हवा कैद कर बेचना अच्छा 'स्टार्ट-अप' भी है। जिन्हें हवाखोरी का खासा शौक है, वे इस बिजनेस में आराम से कूद सकते हैं। हवा को बोतल में बंद करके ही तो बेचना है। हवा चाहे पहाड़ की हो या रेगिस्तान की क्या फर्क पड़ता है। जैसे, पानी का कोई रंग नहीं होता, वैसे ही हवा का भी कोई रंग नहीं। भविष्य में हवा-पानी के रंग की खोज कर ली जाए, कह नहीं सकता। क्योंकि दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं।

फिलहाल, अभी बोतल में हवा का कॉसेप्ट मार्केट में आया है। कल को, एहसासों-जज्बातों को बोतल में बंदकर बेचने का चलन भी आ जाए, कह नहीं सकते। आजकल सब बिकता है। बस बेचने का हुनर आना चाहिए। इसीलिए तो पहले-पहल हवा को बोतल में बंदकर बेचने की खबर पर मुझे कोई 'आश्चर्य' नहीं हुआ। फिजा और धरती में जैसे-जैसे कीटाणुओं की संख्या बढ़ेगी, ऐसे नए-नए तरीके सामने आते रहेंगे। लोग झूठ कहां कहते हैं कि जमाना बदल रहा है।

4 टिप्‍पणियां:

शब्दनगरी ने कहा…

अंशुल जी, आपका लेख पढ़ा । आपको हिंदी के एक सशक्त मंच के सृजन एवं कुशल संचालन हेतु बहुत-बहुत बधाई । इन्टरनेट पर अभी भी कई बेहतरीन रचनाएं अंग्रेज़ी भाषा में ही हैं, जिसके कारण आम हिंदीभाषी लोग इन महत्वपूर्ण आलेखों से जुड़े संदेशों या बातों जिनसे उनके जीवन में वास्तव में बदलाव हो सकता है, से वंचित रह जाते हैं| ऐसे हिन्दीभाषी यूजर्स के लिए ही हम आपके अमूल्य सहयोग की अपेक्षा रखते हैं ।

इस क्रम में हमारा विनम्र निवेदन है कि आप अपने लेख शब्दनगरी "www.shabdanagri.in" पर आपके नाम के साथ प्रकाशित करें । इस संबंध में आपसे विस्तार से बात करने हेतु आपसे निवेदन है की आप हमसे अपना कोई कांटैक्ट नंबर शेयर करें ताकि आपके रचना प्रकाशन से संबन्धित कुछ अन्य लाभ या जानकारी भी हम आपसे साझा कर सकें ।
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उम्मीद है हमारी इस छोटी सी कोशिश में आप हमारा साथ अवश्य देंगे ।
आपके उत्तर की प्रतीक्षा है ...

धन्यवाद,
संजना पाण्डेय
शब्दनगरी संगठन
फोन : 0512-6795382
ईमेल-info@shabdanagari.in

yashoda Agrawal ने कहा…

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" गुरुवार 19 मई 2016 को लिंक की जाएगी............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

राजा कुमारेन्द्र सिंह सेंगर ने कहा…

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन बुद्ध मुस्कुराये शांति-अहिंसा के लिए - ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

चलो ,बोतल में बंद ही सही ,कनाडाई हवा तो खाने को मिलेगी - बांग्ला में पानी पीते नहीं खाते हैं तो हवा भी ....
पर हम रोबोट नहीं हैं यह सिद्ध करना बड़ा मुश्किल है-कमेंट भेजने में सबसे बड़ी बाधा .